श्रीनगर में आशा कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन, ₹2,000 वेतन पर न्यूनतम मजदूरी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में 24 सितंबर 2026 (गुरुवार) को बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से न्यूनतम वेतन में तत्काल संशोधन करने की माँग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें मात्र ₹2,000 प्रति माह दिया जाता है, जो बढ़ती महंगाई के बीच गुज़ारे के लिए पर्याप्त नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शन में शामिल आशा कार्यकर्ता आमना ने बताया कि विधानसभा सत्र चल रहे होने के कारण इस अवसर का उपयोग अपनी माँगें सरकार तक पहुँचाने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन पहली बार नहीं हो रहा — पिछले महीने भी आशा कार्यकर्ताओं ने इसी तरह का आंदोलन किया था, परंतु सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली।
आमना ने आरोप लगाया कि करीब दो वर्ष पूर्व सरकार ने ₹1,500 की मासिक बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन यह राशि अब तक नियमित रूप से उनके हाथ नहीं पहुँची है। उनका कहना है कि घोषणा और क्रियान्वयन के बीच की यह खाई आशा कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को और कठिन बनाती है।
कार्यकर्ताओं की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष कई माँगें रखी हैं। सबसे प्रमुख माँग यह है कि आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया जाए, ताकि वे सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की हकदार बन सकें। इसके अलावा उन्होंने 'वर्कर' का दर्जा दिए जाने और दो वर्ष पूर्व घोषित ₹1,500 की बढ़ोतरी को तत्काल लागू करने की माँग की।
कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वे स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं — ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीकाकरण अभियान तक हर मोर्चे पर उनकी भूमिका अहम है — फिर भी उनके परिश्रम के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा।
आम जनता पर असर
आशा कार्यकर्ताएँ भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत काम करती हैं और ज़मीनी स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करती हैं। कम पारिश्रमिक और अनिश्चित रोज़गार स्थिति के कारण इस कार्यबल में असंतोष बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह मुद्दा केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं — देशभर में आशा कार्यकर्ताएँ समय-समय पर वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की माँग को लेकर आंदोलन करती रही हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
अभी तक जम्मू-कश्मीर प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कार्यकर्ताओं के अनुसार पिछले कई आंदोलनों के बावजूद सरकार ने उनकी माँगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
क्या होगा आगे
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि विधानसभा सत्र के दौरान उनकी माँगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र चल रहा है और नीतिगत फैसलों पर विशेष ध्यान है — ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं का यह विरोध नीति-निर्माताओं के लिए एक अहम संकेत है।