22 सितंबर 2026
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श्रीनगर में 50,000 दिहाड़ी मजदूरों का प्रदर्शन, वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग

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श्रीनगर में 50,000 दिहाड़ी मजदूरों का प्रदर्शन, वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के दौरान 50,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों के प्रतिनिधियों ने श्रीनगर में प्रदर्शन किया। वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की माँग वर्षों पुरानी है, सरकार की समिति मार्च 2025 से काम कर रही है — लेकिन समयसीमा अब भी अस्पष्ट।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर दिहाड़ी/दैनिक वेतन भोगी फोरम ने 22 सितंबर 2026 को श्रीनगर में प्रदर्शन किया।
फोरम के अध्यक्ष सज्जाद अहमद पर्रे के नेतृत्व में कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की माँग रखी।
केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न विभागों में 50,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं।
मार्च 2025 में गठित सरकारी समिति नियमितीकरण के मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं की जाँच कर रही है।
सरकार ने चरणबद्ध नियमितीकरण का आश्वासन दिया है, लेकिन कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई।

जम्मू-कश्मीर सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 50,000 से अधिक दिहाड़ी और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को श्रीनगर में वेतन वृद्धि और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। यह विरोध ऐसे समय में हुआ जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र चल रहा था और सदन में अस्थायी मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श भी जारी था।

प्रदर्शन का आयोजन और नेतृत्व

यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर दिहाड़ी/दैनिक वेतन भोगी फोरम द्वारा आयोजित किया गया और इसका नेतृत्व फोरम के अध्यक्ष सज्जाद अहमद पर्रे ने किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि नियमितीकरण और बेहतर वेतन की उनकी मांगें लंबे समय से अनसुलझी पड़ी हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से ठोस और त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया।

सरकार का रुख और समिति का गठन

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने विधानसभा को सूचित किया है कि वह अस्थायी मजदूरों — जिनमें दिहाड़ी मजदूर, आकस्मिक और मौसमी श्रमिक तथा अन्य संविदात्मक कर्मचारी शामिल हैं — के नियमितीकरण के लिए एक समान ढाँचा तैयार करने पर विचार कर रही है। मार्च 2025 में गठित एक समिति ऐसे श्रमिकों के नियमितीकरण के मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं की जाँच कर रही है। सरकार के अनुसार, अंतिम नीतिगत निर्णय लेने से पहले संबंधित विभागों से परामर्श आवश्यक है।

दिहाड़ी मजदूरों की भूमिका और निर्भरता

आंकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में 50,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं। जमीनी रिपोर्टें यह भी बताती हैं कि इन विभागों का अधिकांश परिचालन कार्यभार इन्हीं श्रमिकों पर टिका है। लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED), बाढ़ एवं सिंचाई विभाग और विद्युत विकास विभाग (PDD) जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग इन कर्मचारियों के बिना व्यावहारिक रूप से ठप हो जाएँगे।

मांगें और माहौल

यह ऐसे समय में आया है जब विधानसभा में अस्थायी और दिहाड़ी श्रमिकों से संबंधित मुद्दों पर सक्रिय चर्चा चल रही थी, जिससे इस प्रदर्शन का राजनीतिक महत्त्व और बढ़ गया। श्रमिकों ने प्रशासन से प्रक्रिया में तेजी लाने और वेतन व नियमितीकरण के मुद्दों पर तत्काल राहत देने की माँग की। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश में सभी दिहाड़ी मजदूरों के चरणबद्ध नियमितीकरण का आश्वासन तो दिया है, परंतु कोई निश्चित समयसीमा अभी तक नहीं बताई गई है।

आगे की राह

मार्च 2025 की समिति की रिपोर्ट और विधानसभा में जारी बहस को देखते हुए, कथित तौर पर अगले कुछ हफ्तों में नीतिगत स्पष्टता की उम्मीद है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि माँगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 दिहाड़ी मजदूरों की यह स्थिति एक व्यापक प्रशासनिक विरोधाभास को उजागर करती है — ये वही कर्मचारी हैं जिन पर PHED, PDD और सिंचाई जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग टिके हैं, फिर भी इनकी सेवा शर्तें वर्षों से अनिश्चित हैं। मार्च 2025 में बनी समिति डेढ़ साल बाद भी रिपोर्ट नहीं दे पाई है, जो दर्शाता है कि 'विचाराधीन नीति' अक्सर निर्णय को टालने का औजार बन जाती है। विधानसभा सत्र के दौरान प्रदर्शन का समय संयोगवश नहीं है — यह राजनीतिक दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति है। सवाल यह नहीं कि नियमितीकरण होगा या नहीं, बल्कि यह है कि बिना समयबद्ध ढाँचे के 'आश्वासन' कितने और वर्षों तक काफी माने जाते रहेंगे।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीनगर में दिहाड़ी मजदूरों का प्रदर्शन किस बारे में था?
यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत दिहाड़ी और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों द्वारा वेतन वृद्धि और सेवाओं के नियमितीकरण की माँग को लेकर था। 22 सितंबर 2026 को श्रीनगर में आयोजित इस प्रदर्शन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर दिहाड़ी/दैनिक वेतन भोगी फोरम के अध्यक्ष सज्जाद अहमद पर्रे ने किया।
जम्मू-कश्मीर में कितने दिहाड़ी मजदूर सरकारी विभागों में कार्यरत हैं?
आंकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी विभागों में 50,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं। PHED, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग और PDD जैसे महत्त्वपूर्ण विभागों का कामकाज इन्हीं श्रमिकों पर बड़े पैमाने पर निर्भर है।
नियमितीकरण के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
जम्मू-कश्मीर सरकार ने मार्च 2025 में एक समिति का गठन किया है जो दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण के मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं की जाँच कर रही है। सरकार ने चरणबद्ध नियमितीकरण का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है।
यह प्रदर्शन विधानसभा सत्र के दौरान क्यों हुआ?
प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान हुआ, जब सदन में अस्थायी और दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा चल रही थी। श्रमिकों ने इस अवसर का उपयोग विधायकों और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया।
नियमितीकरण के लिए बनाई गई समान नीति में क्या शामिल होगा?
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित समान ढाँचे में दिहाड़ी मजदूर, आकस्मिक और मौसमी श्रमिक तथा अन्य संविदात्मक और आवश्यकता-आधारित कर्मचारी शामिल होंगे। अंतिम नीतिगत निर्णय लेने से पहले संबंधित विभागों से परामर्श की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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