मायावती की माँग: NRHM संविदाकर्मियों समेत वर्षों से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करे UP सरकार
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की कि सरकारी विभागों में वर्षों से अस्थायी रूप से सेवाएँ दे रहे संविदाकर्मियों को नियमित रोज़गार दिया जाए। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के तहत कार्यरत कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें स्वास्थ्य विभाग में नियमित किया जाना चाहिए।
मायावती की मुख्य माँग
मायावती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने अगले छह महीनों के भीतर एक लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। उनका कहना था कि यह बेहतर होता यदि इस भर्ती प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को भी शामिल किया जाता जो पहले से ही वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं।
BSP प्रमुख ने सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग और संविदा नियुक्ति की व्यवस्था को शोषणकारी करार दिया और कहा कि पार्टी इस प्रकार की प्रणाली के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दीर्घकालिक सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायित्व का अधिकार मिलना चाहिए।
NRHM संविदाकर्मियों का आंदोलन — पृष्ठभूमि
यह माँग ऐसे समय उठाई गई है, जब NRHM के संविदाकर्मी अपनी स्थायीकरण की माँग को लेकर पिछले कई दिनों से लखनऊ स्थित कांशीराम ईको गार्डेन के निकट धरने पर बैठे हैं। इन कर्मचारियों की प्रमुख माँगें स्थायीकरण और सेवा शर्तों में सुधार से जुड़ी हैं।
गौरतलब है कि NRHM देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की रीढ़ मानी जाने वाली योजना है, जिसमें ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए बड़ी संख्या में संविदा आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
BSP का रुख और राजनीतिक संदर्भ
मायावती का यह बयान UP की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा घोषित एक लाख नौकरियों की योजना के साथ-साथ उन पहले से कार्यरत कर्मचारियों की आवाज़ उठाने की कोशिश भी है, जिन्हें नई भर्ती प्रक्रिया में आमतौर पर शामिल नहीं किया जाता।
आलोचकों का कहना है कि संविदा और आउटसोर्सिंग पर आधारित नियुक्ति की व्यवस्था सरकारी खर्च घटाने के नाम पर कर्मचारियों के दीर्घकालिक हितों की अनदेखी करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कर्मचारी न्यूनतम वेतन, पेंशन और नौकरी की सुरक्षा से वंचित रहते हैं।
आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
NRHM के संविदाकर्मियों में एएनएम (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ), आशा वर्कर, प्रयोगशाला तकनीशियन और अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं, जो ग्रामीण उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करते हैं। इनके धरने से प्रदेश के कुछ ज़िलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आगे क्या होगा
अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मायावती की इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। BSP ने स्पष्ट किया है कि वह संविदाकर्मियों के नियमितीकरण के मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस बात पर है कि आगामी दिनों में सरकार इस दबाव पर क्या कदम उठाती है।