एंटीलिया केस: परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग, एनआईए कोर्ट में घाडगे की याचिका पर एक घंटे की बहस
सारांश
मुख्य बातें
एंटीलिया विस्फोटक मामले में 17 अक्टूबर 2026 को नया मोड़ आया, जब एनआईए कोर्ट में रिटायर्ड एसीपी भीमराज रोहिदास घाडगे की याचिका पर करीब एक घंटे तक जोरदार बहस हुई। इस याचिका में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को मामले में सह-आरोपी बनाने की माँग की गई है। घाडगे के वकील निलेश ओझा ने परमबीर सिंह पर अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और अदालत को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया।
कोर्ट में क्या हुआ
वकील निलेश ओझा ने बताया कि हस्तक्षेप याचिका के जवाब में परमबीर सिंह ने एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कथित तौर पर दो बड़ी गलतियाँ और झूठे बयान शामिल थे। ओझा के अनुसार, कोर्ट ने परमबीर सिंह से यह हलफनामा माँगा ही नहीं था, फिर भी उन्होंने इसे दाखिल किया।
ओझा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि सीआरपीसी की धारा 340 (अब बीएनएसएस की धारा 379) के तहत जब न्यायिक सुनवाई के दौरान धोखाधड़ी की जाती है, तो आरोपी को बोलने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह इस मामले में आरोपी हैं, इसलिए उनका यह हलफनामा दाखिल करना कानूनी दृष्टि से अनुचित है।
बॉम्बे हाईकोर्ट को रेफरेंस भेजने की माँग
वकील ओझा ने माँग की कि परमबीर सिंह और उनके वकील दोनों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट को न्यायालय अवमानना का रेफरेंस भेजा जाए। उनका आरोप है कि इस हलफनामे को दाखिल करके परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों का उल्लंघन किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब एंटीलिया मामला पहले से ही कई कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है और इसमें शामिल नामों की वजह से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।
परमबीर सिंह पर लगाए गए आरोप
वकील निलेश ओझा ने कहा कि उनके मुवक्किल के अनुसार परमबीर सिंह इस पूरे षड्यंत्र के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे जैसा अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ की अनुमति के बिना इतने बड़े काम नहीं कर सकता था। इस संबंध में सीबीआई को भी हलफनामा सौंपा गया है, जैसा कि ओझा ने बताया।
ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि परमबीर सिंह ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने सचिन वाजे को पुलिस बल में वापस लाया और उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख बनाया। उनके अनुसार, दिशा सालियान के मामले, सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच और अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के दौरान ये सभी लोग कथित तौर पर एक साथ काम कर रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि एंटीलिया विस्फोटक मामला 2021 में तब सामने आया था जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक वाहन में विस्फोटक सामग्री मिली थी। इस मामले में तत्कालीन मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया था।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस प्रशासन के बीच के कथित संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। अब रिटायर्ड एसीपी घाडगे की याचिका इस मामले में एक नई कानूनी परत जोड़ती है।
आगे क्या होगा
एनआईए कोर्ट ने अभी याचिका पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग पर क्या कार्रवाई की जाए और बॉम्बे हाईकोर्ट को अवमानना का रेफरेंस भेजा जाए या नहीं। यह फैसला इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।