18 अक्टूबर 2026
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एंटीलिया केस: परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग, एनआईए कोर्ट में घाडगे की याचिका पर एक घंटे की बहस

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एंटीलिया केस: परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग, एनआईए कोर्ट में घाडगे की याचिका पर एक घंटे की बहस

सारांश

एंटीलिया विस्फोटक मामले में रिटायर्ड एसीपी भीमराज घाडगे की याचिका पर एनआईए कोर्ट में एक घंटे की तीखी बहस हुई। वकील निलेश ओझा ने पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर झूठा हलफनामा दाखिल कर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाया और बॉम्बे हाईकोर्ट को अवमानना रेफरेंस भेजने की माँग की।

मुख्य बातें

रिटायर्ड एसीपी भीमराज रोहिदास घाडगे की याचिका पर 17 अक्टूबर को एनआईए कोर्ट में करीब एक घंटे तक बहस हुई।
याचिका में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को एंटीलिया मामले में सह-आरोपी बनाने की माँग की गई है।
वकील निलेश ओझा ने परमबीर सिंह पर बिना कोर्ट की माँग के झूठा हलफनामा दाखिल करने का आरोप लगाया।
ओझा ने बॉम्बे हाईकोर्ट को परमबीर सिंह और उनके वकील के खिलाफ न्यायालय अवमानना रेफरेंस भेजने की माँग की।
आरोप है कि परमबीर सिंह ने सचिन वाजे को पुलिस बल में वापस लाकर क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख बनाया था।
मामले में सीबीआई को भी हलफनामा सौंपा गया है; अगली सुनवाई में कोर्ट का फैसला अपेक्षित।

एंटीलिया विस्फोटक मामले में 17 अक्टूबर 2026 को नया मोड़ आया, जब एनआईए कोर्ट में रिटायर्ड एसीपी भीमराज रोहिदास घाडगे की याचिका पर करीब एक घंटे तक जोरदार बहस हुई। इस याचिका में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को मामले में सह-आरोपी बनाने की माँग की गई है। घाडगे के वकील निलेश ओझा ने परमबीर सिंह पर अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और अदालत को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया।

कोर्ट में क्या हुआ

वकील निलेश ओझा ने बताया कि हस्तक्षेप याचिका के जवाब में परमबीर सिंह ने एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कथित तौर पर दो बड़ी गलतियाँ और झूठे बयान शामिल थे। ओझा के अनुसार, कोर्ट ने परमबीर सिंह से यह हलफनामा माँगा ही नहीं था, फिर भी उन्होंने इसे दाखिल किया।

ओझा ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि सीआरपीसी की धारा 340 (अब बीएनएसएस की धारा 379) के तहत जब न्यायिक सुनवाई के दौरान धोखाधड़ी की जाती है, तो आरोपी को बोलने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह इस मामले में आरोपी हैं, इसलिए उनका यह हलफनामा दाखिल करना कानूनी दृष्टि से अनुचित है।

बॉम्बे हाईकोर्ट को रेफरेंस भेजने की माँग

वकील ओझा ने माँग की कि परमबीर सिंह और उनके वकील दोनों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट को न्यायालय अवमानना का रेफरेंस भेजा जाए। उनका आरोप है कि इस हलफनामे को दाखिल करके परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों का उल्लंघन किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब एंटीलिया मामला पहले से ही कई कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है और इसमें शामिल नामों की वजह से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।

परमबीर सिंह पर लगाए गए आरोप

वकील निलेश ओझा ने कहा कि उनके मुवक्किल के अनुसार परमबीर सिंह इस पूरे षड्यंत्र के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने कहा कि सचिन वाजे जैसा अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ की अनुमति के बिना इतने बड़े काम नहीं कर सकता था। इस संबंध में सीबीआई को भी हलफनामा सौंपा गया है, जैसा कि ओझा ने बताया।

ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि परमबीर सिंह ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने सचिन वाजे को पुलिस बल में वापस लाया और उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख बनाया। उनके अनुसार, दिशा सालियान के मामले, सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच और अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के दौरान ये सभी लोग कथित तौर पर एक साथ काम कर रहे थे।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एंटीलिया विस्फोटक मामला 2021 में तब सामने आया था जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक वाहन में विस्फोटक सामग्री मिली थी। इस मामले में तत्कालीन मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया था।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस प्रशासन के बीच के कथित संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। अब रिटायर्ड एसीपी घाडगे की याचिका इस मामले में एक नई कानूनी परत जोड़ती है।

आगे क्या होगा

एनआईए कोर्ट ने अभी याचिका पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग पर क्या कार्रवाई की जाए और बॉम्बे हाईकोर्ट को अवमानना का रेफरेंस भेजा जाए या नहीं। यह फैसला इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एनआईए कोर्ट में इस पर औपचारिक बहस का होना इस मामले को एक नए कानूनी मोड़ पर ले जाता है। असली सवाल यह है कि क्या अदालत इस याचिका को स्वीकार कर एक पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी को आरोपी के कटघरे में खड़ा करने की हिम्मत दिखाएगी। वकील ओझा के आरोप — कि परमबीर सिंह ने बिना माँगे झूठा हलफनामा दाखिल किया — अगर सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल उनकी कानूनी स्थिति को कमजोर करेगा, बल्कि महाराष्ट्र पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी गहरे सवाल उठाएगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि यह मामला सिर्फ एक विस्फोटक-बरामदगी की जाँच नहीं है — यह उस पूरे तंत्र की परीक्षा है जो पुलिस, राजनीति और न्यायपालिका के बीच काम करता है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटीलिया केस में परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की माँग क्यों की जा रही है?
रिटायर्ड एसीपी भीमराज घाडगे के वकील निलेश ओझा का आरोप है कि परमबीर सिंह एंटीलिया विस्फोटक मामले में पूरे षड्यंत्र के मुख्य सूत्रधार थे और उन्होंने सचिन वाजे को पुलिस बल में वापस लाकर क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख बनाया था। इसी आधार पर एनआईए कोर्ट में उन्हें सह-आरोपी बनाने की याचिका दाखिल की गई है।
परमबीर सिंह पर झूठे हलफनामे का आरोप क्या है?
वकील निलेश ओझा के अनुसार, परमबीर सिंह ने एनआईए कोर्ट में एक जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कथित तौर पर दो बड़ी गलतियाँ और झूठे बयान थे। ओझा का कहना है कि कोर्ट ने परमबीर सिंह से यह हलफनामा माँगा ही नहीं था, और बीएनएसएस की धारा 379 के तहत आरोपी को ऐसा हलफनामा दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
एंटीलिया विस्फोटक मामला क्या है?
यह मामला 2021 में सामने आया था जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास 'एंटीलिया' के बाहर एक वाहन में विस्फोटक सामग्री मिली थी। इस मामले में तत्कालीन मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था और परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट को अवमानना रेफरेंस भेजने की माँग क्यों की गई है?
वकील ओझा का तर्क है कि परमबीर सिंह ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों का उल्लंघन करते हुए यह हलफनामा दाखिल किया। इसलिए उन्होंने माँग की है कि परमबीर सिंह और उनके वकील दोनों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट को न्यायालय अवमानना का रेफरेंस भेजा जाए।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
एनआईए कोर्ट ने अभी याचिका पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाया जाए या नहीं और बॉम्बे हाईकोर्ट को अवमानना रेफरेंस भेजा जाए या नहीं। इस फैसले का इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा पर सीधा असर पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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