लखनऊ पुलिस का बड़ा खुलासा: अपहरण की झूठी FIR, नौकरी ठग सत्यरत्न दीक्षित अहमदाबाद से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को एक कथित अपहरण मामले में चौंकाने वाला पर्दाफाश किया — जाँच में सामने आया कि नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रकम ऐंठने वाले सत्यरत्न दीक्षित ने खुद ही फर्जी अपहरण की कहानी गढ़ी थी और गुजरात के अहमदाबाद में एक होटल में छिपा बैठा था। पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से उसे विट्ठल मॉल के चौथे तल स्थित होटल से सकुशल बरामद कर गिरफ्तार कर लिया।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
6 अक्टूबर 2026 को शिप्रा यादव नाम की एक महिला ने लखनऊ के मड़ियांव थाने में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसके पति सत्यरत्न दीक्षित का अपहरण हो गया है। महिला ने दावा किया कि एक व्यक्ति उनके घर आकर पति के अपहरण की सूचना दे गया था। प्रार्थना पत्र मिलते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।
गौरतलब है कि उसी दिन — 5 अक्टूबर को — सत्यरत्न ने डायल-112 पर फोन कर झूठी सूचना दी थी कि दो स्कॉर्पियो गाड़ियाँ उसका पीछा कर रही हैं, जिससे अपहरण का भ्रम पैदा हो सके।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच में गंभीरता देखते हुए पुलिस ने उत्तरी जोन की सर्विलांस टीम को शामिल किया। संदिग्ध मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस की गई, जो अहमदाबाद में मिली। इसके बाद मड़ियांव थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने अहमदाबाद पहुँचकर संबंधित स्थानों पर तलाशी ली और विट्ठल मॉल स्थित होटल के कमरे में सत्यरत्न को सकुशल पाया।
पूछताछ के अनुसार, सत्यरत्न ने 5 अक्टूबर को लखनऊ छोड़ा, अपनी सियाज कार पुरनिया चौराहे के पास खड़ी की और चारबाग रेलवे स्टेशन से साबरमती एक्सप्रेस के ज़रिये 7 अक्टूबर को अहमदाबाद पहुँचा। उसने मोबाइल फोन बंद कर रखा था।
ठगी की असली कहानी
अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में सत्यरत्न ने स्वीकार किया कि उसने कई व्यक्तियों से नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ली थी, किंतु न तो नौकरी दिला सका और न ही धनराशि वापस कर सका। पीड़ितों का दबाव बढ़ने पर उसने मामले का भंडाफोड़ होने के भय से यह पूरी झूठी अपहरण की कहानी रची।
5 अक्टूबर को उसने कुछ लोगों को नियुक्ति के लिए ज्वाइनिंग लेटर देने के बहाने बुलाया था, जबकि उसी दिन अन्य पीड़ित भी फोन पर अपनी रकम वापस माँग रहे थे। रकम न लौटा पाने की स्थिति में उसने फरार होने का रास्ता चुना।
पुलिस की कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के बाद सत्यरत्न दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है और नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही जारी है। पुलिस अब उन पीड़ितों की भी पहचान कर रही है जिनसे नौकरी के नाम पर ठगी की गई।
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि रोज़गार के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों में आरोपी कितनी चालाकी से पुलिस और परिजनों का ध्यान बँटाने की कोशिश करते हैं। आगे की जाँच में ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या और स्पष्ट होने की संभावना है।