फर्जी IPS बनकर चाय वाले से विवाद: लखनऊ में मिथिलेश शुक्ला गिरफ्तार, पुलिस को सैल्यूट का दिया था आदेश
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के महानगर थाना पुलिस ने 16 जून 2026 को एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो फर्जी IPS अधिकारी बनकर एक चाय विक्रेता से विवाद कर रहा था और मौके पर पहुँची पुलिस टीम को भी सैल्यूट करने का आदेश दे रहा था। आरोपी ने खुद को नोएडा में तैनात IPS अधिकारी बताया, जबकि वह वास्तव में एक निजी कंपनी में अकाउंट एग्जीक्यूटिव है।
मुख्य घटनाक्रम
पूरी घटना महानगर इलाके के गोल मार्केट की है। आरोपी मिथिलेश शुक्ला (40 वर्ष) एक चाय दुकानदार से पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद में उलझ गया। जब दुकानदार ने पुलिस को सूचित किया और पुलिस टीम मौके पर पहुँची, तो शुक्ला ने रौब दिखाते हुए कहा — 'टोपी क्यों नहीं लगाई है? मुझे सैल्यूट करो। मैं नोएडा में तैनात IPS अधिकारी हूँ।'
जब पुलिसकर्मियों ने पहचान पत्र माँगा, तो आरोपी ने टालमटोल करते हुए कहा कि सुबह लाकर दे दूँगा। इस संदिग्ध व्यवहार पर पुलिस ने उसे तत्काल हिरासत में ले लिया और पूछताछ में उसका पूरा झूठ सामने आ गया।
आरोपी की असली पहचान
पुलिस के अनुसार, मिथिलेश शुक्ला लखनऊ के मड़ियाव थाना क्षेत्र अंतर्गत सीतापुर रोड स्थित भारत नगर का निवासी है। वह नोएडा सेक्टर-18 में स्थित सैमसंग कंपनी में अकाउंट एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत है। वह किसी भी प्रकार का पुलिस अधिकारी नहीं है।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी अक्सर फर्जी IPS अधिकारी बनकर लोगों को धमकाता और रौब झाड़ता था। गोल मार्केट में यह कोई पहली बार नहीं था — स्थानीय लोग भी उसके इस व्यवहार से हैरान रह गए।
कानूनी कार्रवाई
महानगर थाने में दरोगा आर्यन शर्मा की शिकायत पर मिथिलेश शुक्ला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है:
धारा 132 (सरकारी सेवक का छद्म वेश धारण करना), धारा 221 (छद्म वेश में अपराध करना) तथा धारा 204 (साक्ष्य गुप्त रखने या नष्ट करने संबंधी)। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
आम जनता पर असर
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सरकारी अधिकारी का छद्म वेश धारण करना न केवल आम नागरिकों को गुमराह करता है, बल्कि कानून-व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास को भी ठेस पहुँचाता है। गौरतलब है कि इस तरह के मामले उत्तर प्रदेश में पहले भी सामने आते रहे हैं, जहाँ फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को ठगा या डराया जाता है।
क्या होगा आगे
पुलिस जाँच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने इससे पहले कितने लोगों को इसी तरह डराया या ठगा। BNS की संबंधित धाराओं के तहत दोषसिद्ध होने पर आरोपी को कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।