बिहार: फर्जी IAS बनकर ठगी करने वाला मनीष गुप्ता गिरफ्तार, टेस्ला-टाटा सफारी और 31 लीटर विदेशी शराब बरामद
सारांश
मुख्य बातें
खगड़िया जिले की पुलिस ने 9 अगस्त 2026 को गोगरी थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार निवासी मनीष कुमार उर्फ मनीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर बिहार के कई जिलों में लोगों को ठगता आ रहा था। आरोपी की गाड़ियों पर 'भारत सरकार' का बोर्ड लगा था और उसने फर्जी पहचान पत्र के जरिए सरकारी रौब कायम किया हुआ था।
गिरफ्तारी और छापेमारी का घटनाक्रम
खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने रविवार को बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मनीष गुप्ता लंबे समय से फर्जी IAS अधिकारी बनकर गोगरी थाना क्षेत्र सहित बिहार के अन्य जिलों में लोगों को गुमराह कर कथित ठगी कर रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम गठित की गई और आरोपी के घर पर छापेमारी की गई।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने खुद को केंद्रीय सतर्कता आयोग से जुड़ा बताने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उसने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का गुप्त एजेंट होने का भी दावा किया। पुलिस ने इन सभी दावों को प्रथम दृष्टया फर्जी पाया है।
बरामदगी: टेस्ला से लेकर बारहसिंगा के सींग तक
छापेमारी में पुलिस ने आरोपी के घर से करीब 31 लीटर विदेशी शराब बरामद की, जो अलग-अलग विदेशी ब्रांड की बताई गई है। इसके अलावा बारहसिंगा के दो सींग भी मिले हैं, जिनकी बरामदगी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
वाहनों में एक टेस्ला कार जब्त की गई जिस पर 'भारत सरकार' का बोर्ड लगा था। एसपी भानु प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि यह टेस्ला का बड़ा मॉडल है जिसमें उन्नत स्वचालित ड्राइविंग सहायता प्रणाली के फीचर हैं, हालांकि इसे तकनीकी रूप से पूरी तरह चालक रहित कार कहना उचित नहीं होगा। इसके अतिरिक्त एक टाटा सफारी भी बरामद की गई, जिस पर कथित तौर पर 'भारत सरकार' का बोर्ड लगा था।
डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से Apple के 5 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, विभिन्न बैंकों के 20 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड और 4 चेकबुक भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद सामान और दस्तावेजों की विस्तृत जांच जारी है।
वित्तीय जांच और संपत्ति का मूल्यांकन
एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी की संपत्ति और आय के स्रोतों का मूल्यांकन किया जा रहा है। मामले की वित्तीय जटिलताओं को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई की सहायता भी ली जाएगी। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने फर्जी पहचान और कथित भ्रष्ट गतिविधियों के माध्यम से संपत्ति अर्जित की है।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी की संपत्ति बिहार के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों में भी होने की सूचना है, हालांकि इन दावों का सत्यापन अभी जारी है। एसपी ने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ और तथ्य सामने आ सकते हैं। यह मामला महज फर्जी पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।