कश्मीर के बारामूला में ऑपरेशन के दौरान नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे बलिदान, सेना ने दी श्रद्धांजलि

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कश्मीर के बारामूला में ऑपरेशन के दौरान नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे बलिदान, सेना ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

32 राष्ट्रीय राइफल्स के नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे बारामूला के रफियाबाद में रात्रि पेट्रोलिंग के दौरान खड़ी ढलान पर फिसलकर खाई में गिरने से बलिदान हो गए। चिनार कोर ने उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए परिवार के साथ एकजुटता जताई।

मुख्य बातें

नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे , 32 राष्ट्रीय राइफल्स , उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के रफियाबाद में स्पेशल ऑपरेशन के दौरान बलिदान हुए।
रात के अंधेरे में मरकूट हमाम जंगल में पेट्रोलिंग के दौरान खड़ी ढलान पर फिसलकर गहरी खाई में गिरने से गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही मृत्यु हुई।
साथी सैनिकों ने तत्काल रेस्क्यू कर शव बरामद किया।
सेना की चिनार कोर ने एक्स पर पोस्ट कर उनके बलिदान को श्रद्धांजलि दी और परिवार की भलाई का संकल्प लिया।
स्थानीय पुलिस ने घटना को दुर्घटना मानते हुए गिरने का केस दर्ज किया।

32 राष्ट्रीय राइफल्स के जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में एक स्पेशल ऑपरेशन के दौरान रविवार देर रात बलिदान हो गए। रफियाबाद के ऊपरी जंगली इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान खड़ी पहाड़ी ढलान पर फिसलने से वे एक गहरी खाई में गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। सेना की चिनार कोर ने मंगलवार, 13 मई को उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों ने रविवार देर रात रफियाबाद के ऊपरी इलाकों में स्थित मरकूट हमाम जंगल में एक स्पेशल ऑपरेशन शुरू किया था। इस घने और ऊबड़-खाबड़ इलाके में रात के अंधेरे में पेट्रोलिंग के दौरान नायब सूबेदार पांडे कथित तौर पर एक खड़ी पहाड़ी चढ़ाई पर फिसल गए और गहरी खाई में जा गिरे।

साथी सैनिकों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और उन्हें उस दुर्गम इलाके से निकालने में सफलता पाई। अधिकारियों ने पुष्टि की कि गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इसके बाद शव बरामद कर लिया गया।

सेना की श्रद्धांजलि

सेना की श्रीनगर मुख्यालय वाली चिनार कोर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भूगोल से आता है। रफियाबाद जैसे ऊपरी वन क्षेत्रों में रात के ऑपरेशन की आवृत्ति बताती है कि सुरक्षा का दायरा कितना व्यापक और थकाऊ है। यह घटना सेना के उस अनकहे बलिदान की याद दिलाती है जो मुठभेड़ों की सुर्खियों में नहीं आता, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा में उतना ही निर्णायक होता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नायब सूबेदार हीरा बहादुर पांडे कैसे बलिदान हुए?
वे उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के रफियाबाद में मरकूट हमाम जंगल में रात्रि पेट्रोलिंग के दौरान एक खड़ी पहाड़ी ढलान पर फिसलकर गहरी खाई में गिर गए। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
चिनार कोर ने श्रद्धांजलि में क्या कहा?
चिनार कोर ने कहा कि वह बारामूला में ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान नायब सूबेदार पांडे के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करती है और उनकी हिम्मत व लगन हमेशा प्रेरित करेगी। कोर ने परिवार के साथ खड़े रहने और उनकी भलाई के लिए प्रतिबद्धता भी जताई।
यह घटना किस ऑपरेशन के दौरान हुई?
यह घटना रफियाबाद के ऊपरी इलाकों में मरकूट हमाम जंगल में रविवार देर रात शुरू हुए एक स्पेशल ऑपरेशन के दौरान हुई। अधिकारियों ने इसे दुर्घटना बताया है और स्थानीय पुलिस ने गिरने का मामला दर्ज किया है।
32 राष्ट्रीय राइफल्स क्या है?
32 राष्ट्रीय राइफल्स भारतीय सेना की एक काउंटर-इन्सर्जेंसी यूनिट है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में तैनात रहती है। यह यूनिट उत्तरी कश्मीर के दुर्गम इलाकों में नियमित पेट्रोलिंग और स्पेशल ऑपरेशन संचालित करती है।
रफियाबाद के जंगल इतने खतरनाक क्यों माने जाते हैं?
रफियाबाद के ऊपरी जंगल अत्यंत कठिन, ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम भूभाग के लिए जाने जाते हैं। रात के अंधेरे में यहाँ पेट्रोलिंग करना विशेष रूप से जोखिमभरा होता है, क्योंकि खड़ी ढलानें और घना जंगल दृश्यता और आवाजाही दोनों को कठिन बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस