14 अक्टूबर 2026
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सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी का हमला: 'पूरी पीढ़ी को डराने की कोशिश'

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सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी का हमला: 'पूरी पीढ़ी को डराने की कोशिश'

सारांश

ममता बनर्जी ने सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी को 'पूरी पीढ़ी को डराने की कोशिश' बताते हुए एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सौरव दास और आशुतोष रांका पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं — जंतर-मंतर की गैर-अधिसूचना के बाद यह मामला विरोध के अधिकार की बड़ी राष्ट्रीय बहस बन गया है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 14 अक्टूबर 2026 को एक्स पर सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की।
सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत ; अजिंक्य शिंदे निजी मुचलके पर रिहा।
तीनों पर जंतर-मंतर में पुलिस बैरिकेड पार करने और 10 अक्टूबर के बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला।
विरोध चुनाव आयोग की मतदाता सूची SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ था।
12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को गृह मंत्रालय समिति की सिफारिश पर गैर-अधिसूचित किया।
बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल में 14,000 लोग पुलिस और राजनीतिक अत्याचारों का सामना कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 14 अक्टूबर 2026 को सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए बयान में उन्होंने इसे 'पूरी पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश' करार दिया और इसे 'अस्वीकार्य' बताया।

ममता बनर्जी ने क्या कहा

बनर्जी ने एक्स पर लिखा, 'हमने और हमसे पहले की कई पीढ़ियों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए मजबूती से लड़ाई लड़ी है। हमें ऐसा करना जारी रखना चाहिए। मैं सीजेपी के आशुतोष और सौरव की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करती हूं।' उन्होंने आगे कहा कि यह वह क्षण है जब सभी को एकजुट होकर 'महान लोकतंत्र की रक्षा' के लिए खड़ा होना चाहिए।

अपनी दूसरी पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि 'इस समय बंगाल में 14,000 लोग पुलिस और राजनीतिक अत्याचारों का सामना कर रहे हैं।' उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, 'लाखों युवाओं से मैं कहती हूं कि आपकी 'दीदी' आपके साथ है।'

मुख्य घटनाक्रम: गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

सीजेपी नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर में पुलिस बैरिकेड्स पार कर प्रवेश करने की कोशिश पर हिरासत में लिया गया था। तीनों को बुधवार को मंदिर मार्ग स्थित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहाँ दास और रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ दास और रांका को 10 अक्टूबर के एक विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले में पहले ₹50,000 का बॉन्ड भरने के बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक वर्ष तक शांति भंग के किसी भी मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बार उन पर अतिक्रमण और बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है, और उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देखा जा रहा है।

विरोध की वजह और जंतर-मंतर की स्थिति

तीनों नेता चुनाव आयोग के विरुद्ध मतदाता सूची की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश में थे।

12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने सूचित किया कि जंतर-मंतर को 'निर्धारित' विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। यह फैसला गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अब दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड — तीन नए स्थान तय किए गए हैं।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से विरोध-प्रदर्शन अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तनाव बढ़ रहा है। जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक प्रदर्शनों का प्रतीकात्मक केंद्र रहा है; इसकी गैर-अधिसूचना को आलोचकों ने असहमति की आवाज़ दबाने का प्रयास बताया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि यह कानून-व्यवस्था की ज़रूरतों के आधार पर लिया गया प्रशासनिक निर्णय है।

बनर्जी का यह बयान आने वाले दिनों में सीजेपी मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है, विशेष रूप से तब जब विपक्षी गठबंधन लोकतांत्रिक अधिकारों के मसले पर अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल जंतर-मंतर की गैर-अधिसूचना को लेकर है — एक ऐसा कदम जो प्रशासनिक बताया गया, पर जिसका असर सीधे विपक्षी और नागरिक समाज के विरोध की क्षमता पर पड़ता है। आलोचकों का कहना है कि बैरिकेड तोड़ने के आरोप में 'आदतन अपराधी' की श्रेणी लगाना अनुपातहीन है। दूसरी ओर, बॉन्ड शर्तों का उल्लंघन एक स्पष्ट कानूनी तथ्य है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। असल परीक्षा यह है कि नए विरोध-स्थलों की व्यवस्था राजधानी की दृश्यता और प्रतीकात्मकता की कसौटी पर कहाँ खड़ी होती है — और क्या यह पुनर्व्यवस्था सुविधा है या नियंत्रण।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरव दास को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दोनों नेताओं को नई दिल्ली के जंतर-मंतर में पुलिस बैरिकेड्स पार कर प्रवेश करने की कोशिश पर हिरासत में लिया गया। उन पर अतिक्रमण और 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन के बाद जारी बॉन्ड शर्तों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।
ममता बनर्जी ने इस गिरफ्तारी पर क्या कहा?
ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट करके गिरफ्तारी को 'पूरी पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश' बताया और इसे 'अस्वीकार्य' करार दिया। उन्होंने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
जंतर-मंतर को विरोध-स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित क्यों किया गया?
12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर को गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्धारित विरोध-स्थल की सूची से हटाया गया है। अब रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को वैकल्पिक स्थानों के रूप में अधिसूचित किया गया है।
सीजेपी नेता किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे?
तीनों नेता चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने जंतर-मंतर पहुँचे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
सौरव दास और आशुतोष रांका को कितने दिनों की हिरासत में भेजा गया?
बुधवार को मंदिर मार्ग स्थित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने के बाद दोनों को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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