असम बाढ़: विपक्ष नेता वाजेद अली चौधरी ने PM मोदी से माँगा ₹2,000 करोड़ का विशेष पैकेज
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने 30 जुलाई को केंद्र सरकार से असम के बाढ़-प्रभावित जिलों के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए ₹2,000 करोड़ के विशेष वित्तीय पैकेज की माँग की। गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तबाही का पैमाना इतना व्यापक है कि राज्य सरकार के संसाधन अपर्याप्त साबित हो रहे हैं और केंद्र का हस्तक्षेप अपरिहार्य है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस विधायक दल ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए अपने विधायकों को तीन अलग-अलग टीमों में बाँटकर सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा किया। विपक्ष के उप-नेता जाकिर हुसैन सिकदर ने चराइदेव जिले का दौरा किया, एक अन्य टीम जोरहाट गई, जबकि चौधरी स्वयं अन्य विधायकों के साथ शिवसागर पहुँचे। इन तीनों जिलों में आई अभूतपूर्व बाढ़ से अब तक लगभग 75 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं।
बाढ़ की विकरालता और प्रशासनिक तैयारी पर सवाल
चौधरी ने आरोप लगाया कि बाढ़ की चपेट में आए कई इलाके ऐसे हैं जहाँ पहले कभी बाढ़ नहीं आई थी, जिसके कारण प्रशासन और स्थानीय निवासी इस आपदा के लिए पूरी तरह अप्रस्तुत थे। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान के लिए नावें लगभग नगण्य थीं और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई नौकाओं की संख्या बेहद कम रही, जिसके चलते दूर-दराज के इलाकों में फँसे लोगों तक राहत पहुँचाने में गंभीर विलंब हुआ।
चौधरी ने यह भी चेतावनी दी कि बचाव और राहत कार्य अभी जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
कांग्रेस की राहत पहल और केंद्र से माँग
कांग्रेस ने अपनी जिला कमेटियों के माध्यम से दौरे के दौरान लगभग ₹2 लाख की राहत सामग्री वितरित की। हालाँकि चौधरी ने स्वीकार किया कि तबाही के पैमाने के सामने यह सहायता बेहद मामूली है। उन्होंने कहा कि जमीनी वास्तविकता को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों को पटरी पर लाने और लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए कम-से-कम ₹2,000 करोड़ की आवश्यकता है।
इसी माँग को औपचारिक रूप देते हुए चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाढ़-प्रभावित जिलों के लिए यह विशेष केंद्रीय पैकेज जारी करने का आग्रह किया है।
सरकार की प्रतिक्रिया पर विपक्ष का आरोप
चौधरी ने विधानसभा के चल रहे सत्र में बाढ़ की स्थिति को पर्याप्त प्राथमिकता न दिए जाने पर राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आपदा पर विस्तृत चर्चा की विपक्ष की माँग को सदन में नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होता है, लेकिन इस बार नए इलाकों के जलमग्न होने ने आपदा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि असम में बाढ़ एक वार्षिक संकट है, किंतु इस वर्ष नए क्षेत्रों के प्रभावित होने और मृत्यु संख्या के बढ़ने से राहत-पुनर्वास की माँग और तीव्र हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत सहायता की गति और पारदर्शिता दोनों पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है।