31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम बाढ़: विपक्ष नेता वाजेद अली चौधरी ने PM मोदी से माँगा ₹2,000 करोड़ का विशेष पैकेज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम बाढ़: विपक्ष नेता वाजेद अली चौधरी ने PM मोदी से माँगा ₹2,000 करोड़ का विशेष पैकेज

सारांश

असम में भीषण बाढ़ से ~75 मौतें और हज़ारों बेघर — विपक्ष नेता वाजेद अली चौधरी ने PM मोदी को पत्र लिखकर ₹2,000 करोड़ के विशेष केंद्रीय पैकेज की माँग की। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में कांग्रेस विधायकों के दौरे के बाद यह माँग उठी, जहाँ नाव की कमी से राहत कार्य बाधित रहा।

मुख्य बातें

असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने 30 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ₹2,000 करोड़ के विशेष केंद्रीय पैकेज की माँग की।
बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जिले शिवसागर , चराइदेव और जोरहाट हैं; अब तक लगभग 75 लोगों की मौत हो चुकी है।
कांग्रेस विधायकों ने तीन टीमों में बाँटकर प्रभावित जिलों का दौरा किया और लगभग ₹2 लाख की राहत सामग्री वितरित की।
चौधरी ने आरोप लगाया कि कई बाढ़-प्रभावित इलाके पहले कभी जलमग्न नहीं हुए थे, जिससे प्रशासन और निवासी दोनों अप्रस्तुत थे।
विपक्ष ने राज्य सरकार पर विधानसभा सत्र में बाढ़ पर विस्तृत चर्चा की माँग को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया।

असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने 30 जुलाई को केंद्र सरकार से असम के बाढ़-प्रभावित जिलों के पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए ₹2,000 करोड़ के विशेष वित्तीय पैकेज की माँग की। गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तबाही का पैमाना इतना व्यापक है कि राज्य सरकार के संसाधन अपर्याप्त साबित हो रहे हैं और केंद्र का हस्तक्षेप अपरिहार्य है।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस विधायक दल ने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए अपने विधायकों को तीन अलग-अलग टीमों में बाँटकर सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा किया। विपक्ष के उप-नेता जाकिर हुसैन सिकदर ने चराइदेव जिले का दौरा किया, एक अन्य टीम जोरहाट गई, जबकि चौधरी स्वयं अन्य विधायकों के साथ शिवसागर पहुँचे। इन तीनों जिलों में आई अभूतपूर्व बाढ़ से अब तक लगभग 75 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं।

बाढ़ की विकरालता और प्रशासनिक तैयारी पर सवाल

चौधरी ने आरोप लगाया कि बाढ़ की चपेट में आए कई इलाके ऐसे हैं जहाँ पहले कभी बाढ़ नहीं आई थी, जिसके कारण प्रशासन और स्थानीय निवासी इस आपदा के लिए पूरी तरह अप्रस्तुत थे। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान के लिए नावें लगभग नगण्य थीं और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई नौकाओं की संख्या बेहद कम रही, जिसके चलते दूर-दराज के इलाकों में फँसे लोगों तक राहत पहुँचाने में गंभीर विलंब हुआ।

चौधरी ने यह भी चेतावनी दी कि बचाव और राहत कार्य अभी जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

कांग्रेस की राहत पहल और केंद्र से माँग

कांग्रेस ने अपनी जिला कमेटियों के माध्यम से दौरे के दौरान लगभग ₹2 लाख की राहत सामग्री वितरित की। हालाँकि चौधरी ने स्वीकार किया कि तबाही के पैमाने के सामने यह सहायता बेहद मामूली है। उन्होंने कहा कि जमीनी वास्तविकता को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों को पटरी पर लाने और लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए कम-से-कम ₹2,000 करोड़ की आवश्यकता है।

इसी माँग को औपचारिक रूप देते हुए चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाढ़-प्रभावित जिलों के लिए यह विशेष केंद्रीय पैकेज जारी करने का आग्रह किया है।

सरकार की प्रतिक्रिया पर विपक्ष का आरोप

चौधरी ने विधानसभा के चल रहे सत्र में बाढ़ की स्थिति को पर्याप्त प्राथमिकता न दिए जाने पर राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आपदा पर विस्तृत चर्चा की विपक्ष की माँग को सदन में नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब असम हर वर्ष मानसून बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होता है, लेकिन इस बार नए इलाकों के जलमग्न होने ने आपदा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि असम में बाढ़ एक वार्षिक संकट है, किंतु इस वर्ष नए क्षेत्रों के प्रभावित होने और मृत्यु संख्या के बढ़ने से राहत-पुनर्वास की माँग और तीव्र हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के तहत सहायता की गति और पारदर्शिता दोनों पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की माँग राजनीतिक दबाव की रणनीति भी है और एक वास्तविक नीतिगत चुनौती भी — क्योंकि असम में हर वर्ष बाढ़ आती है, फिर भी नए इलाकों का जलमग्न होना यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन ढाँचा अभी भी अधूरा है। केंद्र से विशेष पैकेज माँगना आवश्यक है, लेकिन असली सवाल यह है कि पिछले वर्षों में मिले NDRF फंड का उपयोग किस हद तक टिकाऊ बुनियादी ढाँचे पर हुआ। जब तक राहत-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर नदी-प्रबंधन और जल-निकासी पर ध्यान नहीं दिया जाता, यह माँग हर मानसून में दोहराई जाती रहेगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम बाढ़ के लिए ₹2,000 करोड़ के केंद्रीय पैकेज की माँग किसने और क्यों की?
असम विधानसभा में विपक्ष के नेता वाजेद अली चौधरी ने 30 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह माँग की। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में भीषण बाढ़ से लगभग 75 मौतें और हज़ारों लोगों के बेघर होने के बाद उन्होंने कहा कि पुनर्वास के लिए राज्य के संसाधन अपर्याप्त हैं।
असम में इस बार बाढ़ से कितने जिले और लोग प्रभावित हुए हैं?
कांग्रेस विधायकों के दौरे के अनुसार शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं। अब तक लगभग 75 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं; बचाव कार्य जारी रहने से मृत्यु संख्या और बढ़ने की आशंका है।
कांग्रेस ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में क्या राहत पहुँचाई?
कांग्रेस ने अपनी जिला कमेटियों के माध्यम से दौरे के दौरान लगभग ₹2 लाख की राहत सामग्री वितरित की। हालाँकि चौधरी ने स्वयं माना कि तबाही के पैमाने के सामने यह सहायता बेहद सीमित है।
विपक्ष ने राज्य सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने विधानसभा सत्र में बाढ़ पर विस्तृत चर्चा की माँग को नज़रअंदाज़ किया। इसके अलावा बचाव के लिए नावों की भारी कमी रही, जिससे दूर-दराज के इलाकों में फँसे लोगों तक राहत देर से पहुँची।
केंद्र सरकार ने अब तक असम बाढ़ पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
चौधरी के पत्र और माँग के संदर्भ में केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेष पैकेज स्वीकृत होगा या नहीं, यह अभी अनिश्चित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले