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अगरतला एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों को ड्रोन सुरक्षा प्रशिक्षण, असम राइफल्स ने संभाली कमान

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अगरतला एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों को ड्रोन सुरक्षा प्रशिक्षण, असम राइफल्स ने संभाली कमान

सारांश

त्रिपुरा के अगरतला स्थित एमबीबी एयरपोर्ट पर असम राइफल्स ने सीआईएसएफ जवानों को ड्रोन पहचान, निष्क्रियकरण और हवाई खतरों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया — यह बहु-एजेंसी सुरक्षा तैयारी की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 12 जून 2026 को अगरतला के एमबीबी हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ जवानों के लिए ड्रोन सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया।
जवानों को ड्रोन की पहचान , निगरानी , निष्क्रियकरण और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
असम राइफल्स , सीआईएसएफ , भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
असम राइफल्स ने हाल ही में नागालैंड के जालुकी में स्पीयर कोर के तहत दो दिवसीय ड्रोन अभ्यास भी किया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल को सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

असम राइफल्स ने 12 जून 2026 को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाई अड्डे पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों के लिए ड्रोन संचालन और उभरते हवाई खतरों से निपटने पर केंद्रित एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का उद्देश्य सीआईएसएफ कर्मियों को आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करना और हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाना था।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया

रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, कार्यक्रम में जवानों को ड्रोन की पहचान, निगरानी तकनीक, निष्क्रिय करने की प्रक्रिया और सुरक्षित इंटरसेप्शन के तरीकों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधानों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) पर भी चर्चा हुई।

प्रशिक्षकों ने विभिन्न प्रकार के ड्रोन, उनकी तकनीकी क्षमताओं और दुरुपयोग से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को समझाया। यह ऐसे समय में आया है जब नागरिक और सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।

बहु-एजेंसी समन्वय पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम में असम राइफल्स, सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच समन्वय और सतर्कता अनिवार्य है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी असम राइफल्स और सीआईएसएफ ने मिलकर एमबीबी एयरपोर्ट पर बहु-एजेंसी सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया था, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और संयुक्त कार्रवाई की रणनीतियों का प्रदर्शन किया गया था।

नागालैंड में भी ड्रोन अभ्यास

असम राइफल्स ने हाल ही में नागालैंड के पेरेन जिले के जालुकी स्थित ड्रोन ट्रेनिंग नोड पर भारतीय सेना की स्पीयर कोर के तहत दो दिवसीय ड्रोन अभ्यास भी आयोजित किया था। इस अभ्यास का लक्ष्य निगरानी क्षमता बढ़ाना, तकनीकी दक्षता विकसित करना और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।

सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

वरिष्ठ अधिकारियों और सीआईएसएफ जवानों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा बलों की परिचालन दक्षता बढ़ाने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

आगे की राह

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई अड्डों जैसे अति-संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर ड्रोन-रोधी क्षमता का निरंतर विकास राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनती जा रही है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की नियमितता यह संकेत देती है कि सुरक्षा एजेंसियाँ उभरते हवाई खतरों के प्रति सजग और सक्रिय हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये एकल कार्यक्रम एक सुसंगत राष्ट्रीय ढाँचे का हिस्सा हैं या महज़ छिटपुट प्रयास। भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर ड्रोन-घुसपैठ की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं, और पूर्वोत्तर की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए एमबीबी जैसे हवाई अड्डे विशेष रूप से असुरक्षित हो सकते हैं। बहु-एजेंसी समन्वय की बात तो होती है, पर इसका मानकीकृत मूल्यांकन तंत्र सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित है। जब तक प्रशिक्षण परिणामों को मापने योग्य सुरक्षा मानकों से नहीं जोड़ा जाता, तब तक ये कार्यक्रम प्रभावशाली दिखने वाले, पर प्रभाव में अनिश्चित बने रहेंगे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगरतला एयरपोर्ट पर ड्रोन सुरक्षा प्रशिक्षण क्यों आयोजित किया गया?
नागरिक और सुरक्षा क्षेत्रों में ड्रोन के बढ़ते उपयोग और दुरुपयोग के खतरों को देखते हुए असम राइफल्स ने सीआईएसएफ जवानों को उभरते हवाई खतरों से निपटने के लिए तैयार करने हेतु यह प्रशिक्षण आयोजित किया। हवाई अड्डे जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना इसका मुख्य उद्देश्य था।
इस प्रशिक्षण में सीआईएसएफ जवानों को क्या सिखाया गया?
जवानों को ड्रोन की पहचान, निगरानी, निष्क्रिय करने की तकनीक, सुरक्षित इंटरसेप्शन प्रक्रिया, ड्रोन संचालन से जुड़े कानूनी प्रावधान और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की जानकारी दी गई। विभिन्न प्रकार के ड्रोन और उनकी क्षमताओं को भी समझाया गया।
एमबीबी एयरपोर्ट पर पहले भी ऐसे अभ्यास हुए हैं?
हाँ, इससे पहले भी असम राइफल्स और सीआईएसएफ ने मिलकर एमबीबी हवाई अड्डे पर बहु-एजेंसी सुरक्षा अभ्यास आयोजित किया था। उस अभ्यास में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और संयुक्त कार्रवाई की रणनीतियों का प्रदर्शन किया गया था।
नागालैंड के जालुकी में असम राइफल्स का ड्रोन अभ्यास क्या था?
असम राइफल्स ने नागालैंड के पेरेन जिले के जालुकी स्थित ड्रोन ट्रेनिंग नोड पर भारतीय सेना की स्पीयर कोर के तहत दो दिवसीय ड्रोन अभ्यास आयोजित किया था। इसका उद्देश्य निगरानी क्षमता बढ़ाना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।
इस प्रशिक्षण में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
प्रशिक्षण कार्यक्रम में असम राइफल्स, सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियाँ शामिल थीं। सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल पर विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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