12 अगस्त 2026
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अगरतला एमबीबी एयरपोर्ट पर सेना ने सीआईएसएफ जवानों को दी 13 दिन की टैक्टिकल ट्रेनिंग

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अगरतला एमबीबी एयरपोर्ट पर सेना ने सीआईएसएफ जवानों को दी 13 दिन की टैक्टिकल ट्रेनिंग

सारांश

भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन ने अगरतला के एमबीबी एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों को 13 दिन की विशेष टैक्टिकल ट्रेनिंग दी — काउंटर-ड्रोन, एक्सेस कंट्रोल और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर केंद्रित यह पहल पूर्वोत्तर की हवाई सुरक्षा को नई धार देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 27 जुलाई से 8 अगस्त 2026 के बीच अगरतला के एमबीबी एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों के लिए 13 दिवसीय टैक्टिकल ट्रेनिंग आयोजित की।
प्रशिक्षण रेड शील्ड डिवीजन की देखरेख में 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' पहल के तहत संपन्न हुआ।
मॉड्यूल में काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन , एडवांस्ड एक्सेस कंट्रोल, तोड़-फोड़ रोधी उपाय और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल थे।
एमबीबी एयरपोर्ट पूर्वोत्तर भारत का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है; सीआईएसएफ इस क्षेत्र के अधिकांश हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
इससे पहले असम राइफल्स और सेना ने भी सीआईएसएफ के लिए इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

भारतीय सेना ने 27 जुलाई से 8 अगस्त 2026 के बीच अगरतला के महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) एयरपोर्ट पर तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों के लिए एक विशेष 13 दिवसीय टैक्टिकल ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार, यह पहल विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच परिचालन तालमेल और पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण विमानन अवसंरचना की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई।

प्रशिक्षण का ढाँचा और जिम्मेदारी

यह कार्यक्रम भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 'रेड शील्ड डिवीजन' की देखरेख में 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' पहल के अंतर्गत संचालित किया गया। सेना के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने सीआईएसएफ जवानों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर कठोर प्रशिक्षण दिया। प्रवक्ता ने बताया कि इस व्यापक मॉड्यूल को ऑपरेशनल तैयारी बढ़ाने और बदलते खतरों के विरुद्ध हवाई अड्डे की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था।

प्रशिक्षण में शामिल विषय

दो सप्ताह के इस प्रशिक्षण में कई उन्नत सुरक्षा विषयों को समाहित किया गया। इनमें एडवांस्ड एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा घेरे को सुदृढ़ करना, तोड़-फोड़ रोधी उपाय, काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं विमानन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एकीकृत रणनीतियाँ शामिल थीं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के हवाई अड्डों पर ड्रोन-आधारित खतरों को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ विशेष रूप से सतर्क हैं।

समापन समारोह और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

समापन समारोह में अधिकारियों ने बताया कि इस संयुक्त पहल ने सेना की सामरिक युद्ध विशेषज्ञता और सीआईएसएफ की विमानन सुरक्षा की विशेष जिम्मेदारी को एकसूत्र में पिरोने का अपना उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण में शामिल जवानों ने व्यावसायिक दक्षता, शारीरिक सहनशक्ति और परिचालन तालमेल का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के बीच संयुक्त क्षमता निर्माण की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

एमबीबी एयरपोर्ट की सामरिक अहमियत

सीआईएसएफ पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकांश हवाई अड्डों की सुरक्षा का दायित्व निभाती है, जिसमें अगरतला का एमबीबी एयरपोर्ट भी शामिल है। गौरतलब है कि यह गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (LGBIA) के बाद इस क्षेत्र का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। इससे पहले भी भारतीय सेना और असम राइफल्स ने सीआईएसएफ जवानों के लिए इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जो इस क्षेत्र में अंतर-एजेंसी सहयोग की स्थापित परंपरा को दर्शाता है।

आगे की राह

इस उन्नत प्रशिक्षण के बाद एमबीबी एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ की टुकड़ी आधुनिक सुरक्षा खतरों — विशेष रूप से ड्रोन और तोड़-फोड़ की कोशिशों — से निपटने में अधिक सक्षम हो गई है। यह पहल पूर्वोत्तर भारत में हवाई सुरक्षा को नए मानकों पर ले जाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन काउंटर-ड्रोन और सामरिक युद्ध प्रशिक्षण के लिए उसे सेना पर निर्भर रहना पड़ता है — यह संस्थागत अंतर नीति-निर्माताओं के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न है। 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' की यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसे नियमित और संस्थागत बनाए बिना यह एकमुश्त अभ्यास बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगरतला एमबीबी एयरपोर्ट पर सेना ने सीआईएसएफ को क्या ट्रेनिंग दी?
भारतीय सेना की रेड शील्ड डिवीजन ने 27 जुलाई से 8 अगस्त 2026 के बीच 13 दिन का टैक्टिकल ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, एडवांस्ड एक्सेस कंट्रोल, तोड़-फोड़ रोधी उपाय और आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल थे। यह 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' पहल के तहत आयोजित किया गया।
यह ट्रेनिंग क्यों आयोजित की गई?
रक्षा विभाग के अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच परिचालन तालमेल बढ़ाना और बदलते खतरों के विरुद्ध महत्वपूर्ण विमानन अवसंरचना की सुरक्षा को सुदृढ़ करना था। पूर्वोत्तर भारत में ड्रोन और तोड़-फोड़ के खतरों को देखते हुए यह प्रशिक्षण विशेष रूप से प्रासंगिक माना जा रहा है।
एमबीबी एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए कौन जिम्मेदार है?
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकांश हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, जिसमें अगरतला का एमबीबी एयरपोर्ट भी शामिल है। यह गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद इस क्षेत्र का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है।
क्या इससे पहले भी ऐसे संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम हुए हैं?
हाँ, इससे पहले भी भारतीय सेना और असम राइफल्स ने सीआईएसएफ जवानों के लिए इसी तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। यह पूर्वोत्तर में अंतर-एजेंसी सुरक्षा सहयोग की एक स्थापित परंपरा का हिस्सा है।
इस ट्रेनिंग से सीआईएसएफ जवानों को क्या फायदा होगा?
इस प्रशिक्षण के बाद एमबीबी एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ जवान काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, उन्नत पहुँच नियंत्रण और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसी आधुनिक क्षमताओं से लैस हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इससे क्षेत्र में हवाई सुरक्षा के समग्र स्तर में सुधार होगा।
राष्ट्र प्रेस
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