चुनाव आयोग पर सवाल: कांग्रेस सांसद करमवीर बौद्ध बोले — जवाब आयोग प्रमुख को ही देना होगा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद करमवीर बौद्ध ने राहुल गांधी के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाताओं की चिंताओं का जवाब सीधे चुनाव आयोग को देना चाहिए — और यह जिम्मेदारी संस्था के प्रमुख की है।
संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही
करमवीर बौद्ध ने कहा कि भारत संविधान से चलता है और संविधान के तहत बनाई गई संवैधानिक संस्थाओं में काम करने वाले अधिकारी किसी दल या सरकार के नहीं, बल्कि नियम-कायदों के अधीन होते हैं। उनके अनुसार, 'अगर किसी संवैधानिक संस्था पर कोई टिप्पणी होती है, तो उसका जवाब संबंधित विभाग या उसके प्रमुख को ही देना चाहिए।'
उन्होंने जोर देकर कहा कि सवाल पूछना या आवाज़ उठाना गलत नहीं है — यह लोकतंत्र की बुनियाद है। बौद्ध ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और देश के प्रमुख राजनेताओं में से एक हैं, इसलिए उनके सवाल उठाना पूरी तरह वैध है।
SIR प्रक्रिया पर आरोप
कांग्रेस सांसद ने SIR की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के ज़रिये लाखों वैध मतों को काटा जा रहा है और गलत तरीके से नए मत पंजीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में लंबित मामलों का हवाला दिया।
बौद्ध ने सवाल किया कि चुनाव आयोग ने जितने मत काटे, जाँच के बाद उनमें से कितने सही पाए गए — और इसका जवाब कौन देगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावों में बड़ी धाँधली हुई है और आयोग ने एक बार भी इसका सीधा जवाब नहीं दिया।
चुनाव आयोग की सफाई और सरकार का पलटवार
गौरतलब है कि शनिवार को चुनाव आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया था कि SIR से जुड़े सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह संदेश दिया गया।
पटना में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'तीनों आयुक्त एक साथ बैठे, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपनी बात रखी। जब हम कैबिनेट में बैठते हैं तो राय में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जो फैसले लिए जाते हैं वे सर्वसम्मत होते हैं। चुनाव आयोग ने साबित कर दिया है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।'
विपक्ष पर निशाना
अशोक चौधरी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी छवि बनाने के लिए जनता के बीच भ्रम फैला रहा है। उनके अनुसार विपक्ष की इस माँग की कोई वैधता नहीं है और वह देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस सांसद बौद्ध ने पलटवार करते हुए कहा कि आयोग दस महीने तक चुप रहा और जब पूरे देश में सवाल उठने लगे, तब जाकर बयान आया — यह स्वयं ही प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
आगे का घटनाक्रम
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब कई राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। चुनाव आयोग, विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच बढ़ती तकरार लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के व्यापक सवाल को केंद्र में ले आई है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर और तीखी बहस की संभावना है।