विश्व वास्तुकला दिवस पर CM हिमंता का संदेश: रंग घर से कामाख्या तक, असम विकास और विरासत दोनों साध रहा
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 5 अक्टूबर 2026 को विश्व वास्तुकला दिवस के अवसर पर कहा कि आधुनिक असम अपनी ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत को संजोते हुए समकालीन विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रंग घर और कामाख्या मंदिर जैसी प्रतिष्ठित संरचनाओं को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया और कहा कि नई परियोजनाएँ इसी विरासत से प्रेरणा ले रही हैं।
मुख्यमंत्री का संदेश
सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'रंग घर से लेकर कामाख्या मंदिर तक, असम हमेशा से ही महान स्थापत्य कौशल की भूमि रही है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'विश्व वास्तुकला दिवस के इस अवसर पर, देखें कि कैसे आधुनिक असम इस समृद्ध विरासत को बरकरार रखते हुए विकास और विरासत दोनों को समाहित करते हुए संरचनाओं और डिजाइनों का निर्माण कर रहा है।'
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सरमा अपने कार्यकाल में राज्य की सांस्कृतिक विरासत और बुनियादी ढाँचे के विस्तार को साथ-साथ आगे बढ़ाने की नीति पर लगातार ज़ोर देते रहे हैं।
असम की स्थापत्य विरासत
शिवसागर में स्थित रंग घर अहोम युग की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक संरचनाओं में से एक है। यह दो मंजिला इमारत अपनी विशिष्ट अर्धवृत्ताकार छत के लिए प्रसिद्ध है और शाही खेल मंडप के रूप में उपयोग की जाती थी — इसे भारत के सबसे पुराने खेल परिसरों में से एक माना जाता है।
गुवाहाटी की नीलांचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर असम का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। अपनी अनूठी नागर और बरा शैली की वास्तुकला के लिए यह मंदिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
विकास और संरक्षण का समन्वय
राज्य सरकार कई विरासत और सांस्कृतिक स्थलों के आसपास पर्यटन एवं बुनियादी ढाँचे के विकास को प्रोत्साहन दे रही है। इसमें ऐतिहासिक स्थलों के मूल स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए कनेक्टिविटी और आगंतुक सुविधाओं में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्य आधुनिकीकरण और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।
असम सरकार का घोषित दृष्टिकोण यह है कि नई अवसंरचना परियोजनाएँ राज्य के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को प्रतिबिंबित करने वाले तत्वों को समाहित करें — न कि उन्हें विस्थापित करें।
आगे की राह
मुख्यमंत्री सरमा की यह टिप्पणी असम के व्यापक विकास एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें आधुनिक सार्वजनिक स्थानों के निर्माण के साथ-साथ राज्य की विरासत को जीवित रखने पर बल दिया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतिगत प्रतिबद्धताएँ ज़मीनी परियोजनाओं में किस हद तक परिवर्तित होती हैं।