आरएसएस शताब्दी समापन: विश्वनाथ चरियाली में सैकड़ों स्वयंसेवकों का मार्च-पास्ट, महालया पर गूंजा 'हिंदू एकता' का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी के समापन वर्ष के उपलक्ष्य में असम के विश्वनाथ चरियाली में 10 अक्टूबर 2026 (महालया) को एक विशेष मार्च-पास्ट का आयोजन किया गया। उप-मंडल के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पारंपरिक गणवेश पहनकर शहर की सड़कों पर अनुशासित परेड की, जिसमें स्थानीय जनता का उत्साहपूर्ण समर्थन देखा गया। यह आयोजन संघ की 101वीं वार्षिकी के अवसर पर पूरे वर्ष चले कार्यक्रमों की श्रृंखला के समापन के रूप में आयोजित किया गया।
शताब्दी का ऐतिहासिक महत्व
संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी और 2025 में विजयादशमी पर ही संगठन ने अपने 100 वर्ष पूरे किए। एक संघ कार्यकर्ता ने बताया कि 101वें वर्ष में प्रवेश करते हुए यह मार्च-पास्ट शताब्दी समारोह के समापन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महालया और विजयादशमी जैसे पर्वों के साथ इस आयोजन को जोड़ना सांस्कृतिक और संगठनात्मक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है।
वरिष्ठ स्वयंसेवक की भावुक गवाही
एक वरिष्ठ संघ कार्यकर्ता ने बताया कि वे 1971 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं और संगठन के साथ उनका नाता लगभग 55 वर्षों का है। उन्होंने कहा कि 1972 में उन्हें संघ के तत्कालीन सरसंघचालक 'गुरुजी' से मिलने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था। उनके अनुसार, इतने दशकों में संगठन की कार्यशैली और अनुशासन में कोई कमी नहीं आई है।
मार्च-पास्ट का संदेश
कार्यक्रम में बोलते हुए एक कार्यकर्ता ने कहा, 'पिछले साल विजयादशमी के दिन संघ के 100 साल पूरे हुए थे और अब 101वां साल चल रहा है। पूरे एक साल चले कार्यक्रम का आज समापन हो रहा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्च का केंद्रीय संदेश है — 'पूरे विश्व के हिंदू सभी एक हैं।' यह संदेश शताब्दी समारोह की मूल भावना को रेखांकित करता है।
आम जनता और स्वयंसेवकों की भागीदारी
गौरतलब है कि यह आयोजन केवल विश्वनाथ चरियाली तक सीमित नहीं था — यह उस व्यापक राष्ट्रव्यापी शताब्दी-समापन कार्यक्रम श्रृंखला का हिस्सा है जो संघ ने पूरे भारत में आयोजित की। स्थानीय उप-मंडल के विभिन्न हिस्सों से स्वयंसेवकों का एकत्रित होना और अनुशासित परेड में शामिल होना स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महालया पर्व की धूम है और असम में सांस्कृतिक आयोजनों की एक लंबी परंपरा रही है।
आगे क्या
संघ के 101वें वर्ष की शुरुआत के साथ, आने वाले महीनों में संगठन के नए कार्यक्रमों और पहलों की घोषणा अपेक्षित है। विश्वनाथ चरियाली जैसे छोटे शहरों में संघ की यह सक्रिय उपस्थिति दर्शाती है कि संगठन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी जड़ें और मजबूत कर रहा है।