30 अक्टूबर 2026
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आठवले का दावा: फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक मंच पर ला सकता हूँ

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आठवले का दावा: फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक मंच पर ला सकता हूँ

सारांश

महाराष्ट्र एमएलसी चुनावों के बाद की सियासत में केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले का दावा — कि वे फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ ला सकते हैं — हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा गया, लेकिन महायुति के भीतरी तनाव और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह बयान खासा मायने रखता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि वे CM देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं।
हाल के एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे , देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे एक मंच पर नज़र आए, जो अपने आप में असामान्य रहा।
महाराष्ट्र एमएलसी चुनावों की 28 सीटों में NDA को सर्वाधिक सीटें मिलीं, लेकिन महाराष्ट्र में पाँचों सीटें जीतने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ।
एमएलसी नतीजों के बाद BJP और शिवसेना के बीच मतभेद सामने आए; आठवले ने कहा इन्हें जल्द सुलझाया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनासकांठा से पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त के तहत 9.34 करोड़ किसानों को ₹18,680 करोड़ ट्रांसफर किए।

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 30 अक्टूबर 2026 को मजाकिया लेकिन सियासी रूप से चर्चित बयान देते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को भविष्य में हमेशा के लिए एक साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं। यह बयान तब आया जब हाल ही में संपन्न महाराष्ट्र एमएलसी चुनावों के परिणामों के बाद दोनों नेता एक कार्यक्रम में एक ही मंच पर नज़र आए।

एक मंच पर तीन दिग्गज — और आठवले की चुटकी

एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक ही मंच पर उपस्थित हुए। इस पर केंद्रीय राज्यमंत्री आठवले ने कहा, 'उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस का एक मंच पर आना सोचना भी मुश्किल था, लेकिन राज ठाकरे ने उन्हें एक दिन के लिए एक साथ ला दिया।' उन्होंने आगे जोड़ा कि नेता अक्सर शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों में एक मंच साझा करते हैं।

आठवले ने दावा किया कि वे भविष्य में फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ लाने का प्रयत्न कर सकते हैं। हालाँकि जब उनसे इसके लिए कोई समयसीमा पूछी गई, तो वे सीधा जवाब देने से बचते नज़र आए।

एमएलसी चुनाव परिणाम और गठबंधन में खटास

हाल के महाराष्ट्र एमएलसी चुनावों में 28 सीटों में से सर्वाधिक सीटें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिलीं। लेकिन आठवले ने स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में नुकसान हुआ — पाँचों सीटें जीतने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका; केवल नागपुर में एक सीट मिली। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार होने के बावजूद वहाँ भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा।

एमएलसी परिणामों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा। आठवले ने इसे 'राजनीति का सामान्य हिस्सा' बताते हुए कहा कि महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि BJP और शिवसेना के बीच उभरे मतभेद जल्द सुलझा लिए जाएँगे और यह कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं है।

पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त

आठवले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश भर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹18,680 करोड़ ट्रांसफर किए गए।

आठवले ने कहा, 'अगर किसान न होते, तो हमारा जीवन आसान नहीं होता, इसलिए उन्हें सशक्त बनाना हमारी जिम्मेदारी है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण रोज़गार और कृषि संकट पर राष्ट्रीय बहस जारी है।

सियासी पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच 2019 के महाराष्ट्र सरकार गठन विवाद के बाद से राजनीतिक दूरियाँ गहरी हैं। उद्धव ने उस समय BJP से संबंध तोड़कर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ 'महाविकास अघाड़ी' सरकार बनाई थी। बाद में 2022 में उनकी सरकार गिरी और फडणवीस नेतृत्व वाले 'महायुति' गठबंधन ने सत्ता संभाली। इस पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं का एक मंच पर दिखना और आठवले का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

आगे की राजनीतिक दिशा

आठवले का यह बयान महज़ हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिया गया हो सकता है, लेकिन महाराष्ट्र की बदलती राजनीति में इसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है। एमएलसी चुनाव नतीजों के बाद महायुति गठबंधन के भीतर आंतरिक तनाव सामने आए हैं, और विपक्षी महाविकास अघाड़ी की राजनीतिक स्थिति भी असमंजस में है। आने वाले महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह महाराष्ट्र की राजनीति की एक गहरी सच्चाई उजागर करता है — महायुति गठबंधन एमएलसी हार के बाद दरकता नज़र आ रहा है और BJP-शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे का फडणवीस के साथ एक मंच पर आना — भले ही अराजनीतिक संदर्भ में हो — 2019 की कटुता को देखते हुए उल्लेखनीय है। असली सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति अगले चुनाव से पहले फिर से नई करवट लेगी, और आठवले जैसे सहयोगी दलों की भूमिका इस पुनर्गठन में कितनी निर्णायक होगी।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास आठवले ने फडणवीस और उद्धव ठाकरे को साथ लाने का दावा क्यों किया?
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने मजाकिया अंदाज़ में कहा कि वे CM देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं। यह बयान तब आया जब दोनों नेता राज ठाकरे के आयोजन में एक ही मंच पर दिखे, जो 2019 के बाद राजनीतिक रूप से दुर्लभ घटना मानी जा रही है।
महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव 2026 में किसे फ़ायदा हुआ और किसे नुकसान?
28 सीटों में से NDA को सर्वाधिक सीटें मिलीं, लेकिन महाराष्ट्र में पाँचों सीटें जीतने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ — केवल नागपुर में एक सीट मिली। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार होने के बावजूद वहाँ भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा।
एमएलसी नतीजों के बाद BJP और शिवसेना में क्या विवाद है?
एमएलसी चुनावों में हार के बाद BJP और शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आठवले ने इसे 'राजनीति का सामान्य हिस्सा' बताया और कहा कि ये मतभेद जल्द सुलझा लिए जाएँगे।
पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी की, जिसके तहत देश भर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹18,680 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच राजनीतिक दूरी कब से है?
2019 के महाराष्ट्र सरकार गठन विवाद के बाद उद्धव ठाकरे ने BJP से संबंध तोड़ लिए थे और कांग्रेस-NCP के साथ महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी। 2022 में उनकी सरकार गिरने के बाद फडणवीस के नेतृत्व में महायुति गठबंधन सत्ता में आया, और दोनों के बीच राजनीतिक कटुता अब भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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