11वें आयुर्वेद दिवस पर विशेषज्ञों का दावा: 240 दिनों में जड़ से ठीक होता है रोग, त्रिकाल सत्य है आयुर्वेद
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 23 सितंबर 2026 को 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विशेषज्ञ आयुर्वेदाचार्यों ने स्पष्ट किया कि आयुर्वेद को भारत की चिकित्सा परंपरा में 'पहला उपचार' माना गया है और यह 'त्रिकाल सत्य' है — अर्थात यह भूतकाल में था, वर्तमान में है और भविष्य में भी रहेगा। इस दिवस का उद्देश्य भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और इसके समग्र स्वास्थ्य लाभों को विश्व स्तर पर प्रसारित करना है।
आयुर्वेद और सप्त धातु सिद्धांत
आयुर्वेदाचार्य राहुल के अनुसार, मानव शरीर पंच महाभूतों — आकाश, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी — से निर्मित है और प्रकृति में सब कुछ एक संतुलन में रहता है। उन्होंने बताया कि शरीर के भीतर सात धातुएँ (सप्त धातु) होती हैं, जिनमें रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र धातु शामिल हैं।
उनके अनुसार, शरीर में एक धातु के निर्माण में 40 दिन लगते हैं और सातों धातुओं के पूर्ण निर्माण में 280 दिन का समय लगता है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब आयुर्वेद की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों में कई भ्रांतियाँ प्रचलित हैं।
240 दिनों की आयुर्वेदिक चिकित्सा का दावा
आयुर्वेदाचार्य राहुल ने दावा किया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार 240 दिनों तक आयुर्वेदिक औषधियाँ लेता रहे, तो शरीर में इतना आंतरिक परिवर्तन संभव है कि बड़े से बड़ा रोग भी 240 दिनों के भीतर या उससे पूर्व समाप्त हो सकता है। उनके अनुसार, रोग की अपनी एक प्रतिरोधक शक्ति होती है — यदि रोग तीन दिन का हो और छह दिन दवाई ली जाए, तो रोग को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है।
गौरतलब है कि इन दावों को वैज्ञानिक रूप से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है और ये आयुर्वेदाचार्य की व्यक्तिगत चिकित्सीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
आयुर्वेद एलोपैथी से धीमा नहीं: विशेषज्ञ
आयुर्वेद को लेकर एक आम धारणा यह है कि इसका असर एलोपैथी की तुलना में धीमा होता है। इस पर आयुर्वेदाचार्य राहुल ने कहा कि यह धारणा पूर्णतः सही नहीं है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में कुछ औषधियाँ तुरंत असर दिखाती हैं। सप्त धातुओं में 'रस धातु' सबसे प्रथम है — जो भोजन करने पर जीभ पर रस के रूप में प्रकट होती है और सीधे रक्त पर प्रभाव डालती है, जिससे शरीर पर असर शीघ्र दिखता है।
जीवनशैली सुधार के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे
दिल्ली के आयुर्वेदाचार्य डॉ. कुणाल शंकर (बीएएमएस) ने जीवनशैली सुधार के संदर्भ में कहा कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए वात और पित्त का संतुलन ज़रूरी है, साथ ही ओज, तेज और प्राण तत्व को सशक्त करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि ओज तत्व को बेहतर बनाने के लिए 10 बादाम, 5-6 सफेद मिर्च, छोटी इलायची, सौंफ और 1 चम्मच देसी गाय का घी गाय के दूध में धागे वाली मिश्री के साथ मिलाकर लेना लाभकारी है। तेज तत्व के लिए अदरक या सौंठ के छोटे टुकड़ों में नमक और नींबू मिलाकर सेवन की सलाह दी। प्राण तत्व को जागृत करने के लिए दो चुटकी चौसठ प्रहरी पीपल को शहद के साथ लेने का सुझाव दिया।
डॉ. शंकर ने ज़ोर दिया कि इन सभी उपायों का आधार इम्यूनिटी है — जितनी अधिक रोगप्रतिरोधक क्षमता, उतना ही अधिक प्रभाव।
आयुर्वेद दिवस का महत्त्व और आगे की राह
हर वर्ष धनवंतरि जयंती के अवसर पर मनाया जाने वाला आयुर्वेद दिवस इस वर्ष अपने 11वें संस्करण में है। यह दिवस भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के नेतृत्व में मनाया जाता है और देश-विदेश में आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों के समाधान में आयुर्वेद की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक प्रासंगिक होगी।