बाबा रामदेव ने जताई चिंता, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर दिया महत्वपूर्ण बयान
सारांश
Key Takeaways
- शांति की आवश्यकता पर जोर
- कोई भी देश कमजोर नहीं है
- लोकतंत्र का मतलब डराना नहीं है
- एकजुटता की अपील
- मतदान के महत्व पर जोर
हरिद्वार, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। योग गुरु बाबा रामदेव ने हाल ही में राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया एक नाजुक स्थिति में है। इस समय सभी को संयम बरतना चाहिए और कोई भी ऐसा कार्य या बयान नहीं देना चाहिए जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचे।
रामदेव ने कहा, "युद्ध की स्थिति पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच का तनाव वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है।"
उन्होंने आगे सभी देशों से अपील करते हुए कहा कि वे शांति स्थापित करने के लिए मिलकर प्रयास करें। एक व्यक्ति की मृत्यु या छोटी घटना से भी बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। इसलिए समाधान बातचीत और कूटनीति से ही होना चाहिए। रामदेव ने कहा, "न तो अमेरिका जीतेगा और न ही ईरान हारेगा। ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से यह साबित कर दिया है कि किसी भी देश को कमजोर समझकर डराया नहीं जा सकता।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का अर्थ किसी को डराना नहीं है। अमेरिका, जो खुद को दुनिया का सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र मानता है, को दूसरे देशों की स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।
बाबा रामदेव ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने कहा, "कोई एक देश या सत्ता पूरे विश्व पर हावी नहीं हो सकती। भारत को अपनी प्राचीन विरासत और स्वतंत्र विदेश नीति के साथ दुनिया को जोड़ने का कार्य जारी रखना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।"
बाबा रामदेव ने आगे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में परिवर्तन स्वाभाविक है। इससे नवीनीकरण होता है। रामदेव ने कहा, "जनता को उन नेताओं और पार्टियों को चुनना चाहिए जिनकी नीति और नेतृत्व राष्ट्र निर्माण के लिए उपयुक्त हो।"
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे मतदान अवश्य करें और ऐसे लोगों को वोट दें जिनका देश के विकास में योगदान रहा हो।
बाबा रामदेव ने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र के मुद्दों पर सभी को एकजुट होना चाहिए। विशेषकर विदेश नीति और कूटनीति जैसे संवेदनशील विषयों पर देश को मजबूती से खड़ा दिखना चाहिए।