प्रमोद तिवारी ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर खुशी जताई, केंद्र सरकार को घेरा

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प्रमोद तिवारी ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर खुशी जताई, केंद्र सरकार को घेरा

सारांश

प्रयागराज, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर प्रमोद तिवारी ने खुशी जताई और इसे शांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही, केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। जानें वे क्या कहते हैं इस अस्थायी शांति के बारे में।

Key Takeaways

  • अमेरिका-ईरान युद्धविराम को प्रमोद तिवारी ने राहत भरी खबर बताया।
  • उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
  • 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता की संभावना है।
  • असम के मुख्यमंत्री की भाषा की निंदा की गई।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान किया गया।

प्रयागराज, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे शांति की चाह रखने वाले सभी लोगों के लिए सुखद समाचार बताया। उन्होंने कहा कि यह दो हफ्ते का युद्धविराम यदि स्थायी शांति में परिवर्तित हो जाए, तो यही उनकी ईश्वर से प्रार्थना है। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अगर संघर्ष जारी रहता, तो इसका प्रभाव केवल उन देशों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह पूरी दुनिया को प्रभावित करता, विशेषकर उन देशों को जिन्हें ऊर्जा और ईंधन की आवश्यकता है। तिवारी ने कहा कि इस अस्थायी शांति के दौरान वैश्विक संवाद और वार्ता को आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने की संभावनाएं हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है।

साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज करते हुए कहा कि विश्वगुरू बनने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी इस महत्वपूर्ण अवसर पर पीछे रह गए। तिवारी ने कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर था जिसे खो दिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद की नर्सरी है और इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारत पर पड़ता है। इसके बावजूद, पाकिस्तान की भूमिका इस मामले में स्पष्ट है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है, लेकिन यदि अमन और शांति कायम होती है, तो इसका स्वागत होना चाहिए।

वहीं, प्रमोद तिवारी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की भाषा पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रति जिस प्रकार की असभ्य भाषा का प्रयोग किया गया, वह किसी सभ्य व्यक्ति या मुख्यमंत्री के लिए उचित नहीं है। उन्होंने इस व्यवहार की कड़ी निंदा की और कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

तिवारी ने कहा कि पवन खेड़ा ने जो बातें कहीं, वे उनके सामने मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर थीं। उन्होंने कहा कि हमने तथ्य प्रस्तुत किए हैं, आप भी तथ्य दें। इसके बाद सही तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कल जो हुआ वह अत्यंत गलत था। उन्होंने कहा कि गुवाहाटी से पुलिस की कार्रवाई, जिसमें लोकतांत्रिक नियमों की अनदेखी की गई, यह निरंकुश और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि सभी मामलों में नियमों का पालन होना चाहिए और न्यायसंगत तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।

Point of View

NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रमोद तिवारी ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम को किस तरह से देखा?
उन्होंने इसे शांति चाहने वालों के लिए राहत भरी खबर बताया और इसे स्थायी शांति में बदलने की कामना की।
केंद्र सरकार पर प्रमोद तिवारी ने क्या आरोप लगाया?
तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इस अवसर पर पीछे रह जाना भारत के लिए एक बड़ी चूक है।
क्या इस्लामाबाद में शांति वार्ता की संभावना है?
हाँ, तिवारी ने बताया कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने की ख़बरें आ रही हैं।
प्रमोद तिवारी ने असम के मुख्यमंत्री के बारे में क्या कहा?
उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की असभ्य भाषा की निंदा की और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
क्या प्रमोद तिवारी ने पवन खेड़ा के बयान पर कोई टिप्पणी की?
जी हाँ, उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा ने जो बातें कही थीं, वे तथ्य के आधार पर थीं और इसके बाद उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
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