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क्या बागपत में प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी से बेटियों का भविष्य मजबूत होगा?

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क्या बागपत में प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी से बेटियों का भविष्य मजबूत होगा?

सारांश

बागपत में 'नव देवियों की शक्ति' के तहत बेटियों के लिए 9 नई योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रशासन और खाप पंचायतों का सहयोग इसे एक अद्वितीय पहल बना रहा है। यह कार्यक्रम बेटियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है।

मुख्य बातें

बेटियों का सम्मान सुरक्षा और स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता खाप पंचायतों की भूमिका समाज में बदलाव

लखनऊ, ११ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के लिए बागपत में शुरू की गई 'नव देवियों की शक्ति' पर आधारित ९ योजनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यह मॉडल बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर इन कार्यक्रमों में प्रशासन और खाप पंचायतों के बीच सहयोग देखा जा रहा है, जो प्रदेश में एक अद्वितीय प्रयोग है।

इनका उद्देश्य बेटियों को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि समान अवसर और सामाजिक स्वीकृति भी प्रदान करना है। सोचिए, एक घर के आंगन में छोटी बेटी हंस रही है। पहले जो बेटी चुपचाप रहती थी, आज उसी के नाम की नेम प्लेट घर की दीवार पर चमक रही है। यह केवल एक नेम प्लेट नहीं, बल्कि यह संदेश है कि “बेटी बोझ नहीं, घर की शान है।” यह परिवर्तन किसी जादू से नहीं आया, बल्कि नवदेवी के नौ मंत्रों से शुरू हुआ, जिन्हें बागपत ने अपनाया और उत्तर प्रदेश के लिए एक उदाहरण बना दिया।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि निरा योजना के तहत बालिकाओं और महिलाओं को फ्री कॉटन रियूजेबल सेनेट्री पैड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये पैड दो से ढाई साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं और पूरी तरह रीसाइकिल योग्य हैं। इससे बच्चियों और महिलाओं का स्वास्थ्य सुरक्षित हो रहा है। इसके साथ ही, प्लास्टिक वेस्ट में कमी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

बेटी का नाम घर की शान अभियान के तहत घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही हैं। ग्राम प्रधान, कर्मचारियों, मीडिया, और आमजन को इस मुहिम से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य पितृसत्तात्मक सोच को बदलना और यह संदेश देना है कि बेटी बोझ नहीं, परिवार की पहचान और गौरव है।

वहीं, मेरी बेटी मेरी कुलदीपक यूपी में अपनी तरह के पहले अभियान के रूप में उन परिवारों को सम्मानित कर रही है जिनकी एक या दो बेटियां हैं। बेटियों को उपहार देकर यह संदेश दिया जा रहा है कि अच्छे संस्कार और अवसर मिलें तो बेटियां समाज का उजाला बनती हैं।

इसके अलावा, ‘कन्या जन्मोत्सव’ की शुरुआत की जा रही है। इसके तहत नवजात के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट, मोरिंगा (सहजन) का पौधा और एक सुंदर बेबी स्वैडल (लपेटने का कपड़ा) भेंट किया जाएगा। साथ ही, अस्पताल में ही नवजात बालिका को सुमंगला योजना सहित उन सभी सरकारी योजनाओं में तुरंत नामांकित किया जाएगा, जिनकी वह पात्र है, ताकि परिवार के लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

हुनर से आत्मनिर्भरता: बुनकर महिलाओं को योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। इससे पारंपरिक हुनर को नया बाजार मिल रहा है और महिलाएं स्वयं की पहचान बना रही हैं। इस योजना के अंतर्गत बागपत में बड़े पैमाने पर रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।

नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए ‘सांस’ अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नवजात शिशुओं के उपचार में सुधार हुआ है और नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा रही है।

कार्यस्थल पर महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्हें भरोसा दिया जा रहा है कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा का पूरा सम्मान होगा। इसके अलावा बागपत में सार्वजनिक स्थलों पर ‘आंचल’ स्तनपान कक्ष की शुरुआत की गई है। बड़ौत बस डिपो से शुरू हुई यह पहल कामकाजी और शिक्षार्थी महिलाओं को सुविधा और गरिमा देती है ताकि किसी तरह की बाधा न बने और न संकोच का कारण।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि ‘किशोरी का पिटारा’ नाम से एक नई पहल शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य किशोरियों से जुड़े उन संवेदनशील मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है, जिनके बारे में वे खुलकर सवाल पूछने में सहज नहीं होतीं। इस पहल के तहत वे अपने सवाल कागज पर लिखकर एक बॉक्स (पिटारा) में डालेंगी। इसके बाद प्रशिक्षित काउंसलर एक-एक पर्ची निकालकर उन सवालों के जवाब वैज्ञानिक तरीके से देंगे।

खाप पंचायतों के साथ सामाजिक क्रांति मिशन शक्ति 5.0 के तहत विशेष संवाद में सभी प्रमुख खाप पंचायतों ने दहेज, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ एकजुट होने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि बेटियां समाज की असली शक्ति हैं और बागपत अब प्रगति का प्रतीक बनेगा। कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाने और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लाइसेंस निलंबित और अवैध रूप से संचालित मशीनें जब्त की गई हैं।

अस्मिता लाल ने कहा कि बागपत मॉडल का उद्देश्य बेटियों को केवल संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर, सामाजिक स्वीकृति और आत्मनिर्भरता दिलाना है। ‘नव देवियों की शक्ति’ के नौ मंत्र स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और गरिमा से जुड़े हैं। यह पहल प्रशासन और समाज की साझेदारी से आगे बढ़ रही है, जिसमें खाप पंचायतों की भागीदारी इसे एक मजबूत सामाजिक आंदोलन बनाती है। हमारा संकल्प है कि बेटी को सम्मान, सुरक्षा, पहचान और अवसर, चारों ही स्तरों पर पूरा अधिकार मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे हम समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण को बदल सकते हैं। यह न केवल बागपत के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण हो सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बागपत में 'नव देवियों की शक्ति' योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों को सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है।
क्या इस योजना में खाप पंचायतों की भागीदारी है?
हाँ, इस योजना में प्रशासन और खाप पंचायतों के बीच सहयोग देखा जा रहा है, जो इसे एक अनोखा प्रयोग बनाता है।
बेटियों के लिए कौन-कौन सी योजनाएं शुरू की गई हैं?
इस योजना के अंतर्गत फ्री सेनेट्री पैड, कन्या जन्मोत्सव, और अन्य सामाजिक कार्यक्रम शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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