13 जुलाई 2026
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बकरीद 2026: जामा मस्जिद समेत देशभर में कड़ी सुरक्षा के बीच ईद-उल-अजहा की नमाज़ अदा

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बकरीद 2026: जामा मस्जिद समेत देशभर में कड़ी सुरक्षा के बीच ईद-उल-अजहा की नमाज़ अदा

सारांश

बकरीद 2026 देशभर में उत्साह और आस्था के साथ मनाई जा रही है — दिल्ली की जामा मस्जिद से लेकर देश के कोने-कोने तक। चाँद दिखने की भिन्नता के कारण जम्मू-कश्मीर में यह पर्व एक दिन पहले मना, जबकि अधिकांश राज्यों में 28 मई को नमाज़ अदा की गई।

मुख्य बातें

ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार, 28 मई 2026 को देशभर के अधिकांश हिस्सों में मनाई जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने जामा मस्जिद परिसर में भारी सुरक्षा तैनात की; प्रवेश से पहले प्रत्येक श्रद्धालु की जाँच की गई।
जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में बकरीद 27 मई को मनाई गई, क्योंकि वहाँ चाँद एक दिन पहले दिखा।
धार्मिक अधिकारियों के अनुसार, धुल-हिज्जा का चाँद समय पर न दिखने के कारण अधिकांश राज्यों में तारीख एक दिन आगे खिसकी।
श्रद्धालुओं ने त्योहार को भाईचारे, बलिदान और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में मनाया।

ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार, 28 मई 2026 को देशभर में हर्षोल्लास और आस्था के साथ मनाई जा रही है। सुबह से ही हज़ारों श्रद्धालु मस्जिदों और ईदगाहों में एकत्रित हुए और विशेष नमाज़ अदा की। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद सहित देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए।

नमाज़ और उत्सव का माहौल

श्रद्धालु पारंपरिक परिधान पहनकर नमाज़ में शामिल हुए और नमाज़ के बाद परिवार, मित्रों तथा पड़ोसियों को बधाई दी। लोगों ने कहा कि यह त्योहार भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश देता है। साथ ही यह करुणा, बलिदान और दान की भावना की याद भी दिलाता है।

गौरतलब है कि ईद-उल-अजहा इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जो पैगंबर इब्राहिम की उस अटूट आस्था और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है, जब वे ईश्वर के आदेश का पालन करते हुए अपने पुत्र की कुर्बानी देने को तत्पर हुए थे। यह अवसर ईश्वर के प्रति आज्ञाकारिता, कृतज्ञता, क्षमा और दान का प्रतीक माना जाता है।

दिल्ली की जामा मस्जिद पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

दिल्ली पुलिस ने जामा मस्जिद परिसर और उसके आसपास भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। मस्जिद में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की पूरी जाँच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी गई, ताकि कानून-व्यवस्था सुचारु बनी रहे। कई अन्य शहरों में भी प्रशासन ने त्योहार के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए समुचित सुरक्षा बंदोबस्त किए।

चाँद दिखने पर निर्भर रही तारीख

इस वर्ष बकरीद की तारीख को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में मामूली अंतर रहा। धार्मिक अधिकारियों के अनुसार, भारत के कई राज्यों में धुल-हिज्जा का चाँद तय समय पर नहीं दिखा, जिससे इस्लामी महीने की शुरुआत एक दिन आगे खिसक गई। इसी कारण देश के अधिकांश राज्यों में बकरीद 28 मई को मनाई जा रही है। हालाँकि जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में यह पर्व बुधवार, 27 मई को ही मना लिया गया।

त्योहार का धार्मिक और सामाजिक महत्व

ईद-उल-अजहा दुनियाभर के मुसलमानों के लिए गहरे धार्मिक महत्व का पर्व है। यह ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मज़बूत करने की आवश्यकता पर सामाजिक विमर्श जारी है। इस पर्व के ज़रिये समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एकता और सहयोग का संदेश प्रसारित होता है।

आगामी दिनों में कुर्बानी, दान और परिजनों के साथ मेल-मिलाप की परंपराएँ जारी रहेंगी, और देशभर में त्योहार का उत्साह बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो त्योहारी माहौल और सतर्कता के बीच की जटिल संतुलन-रेखा को उजागर करती है। चाँद दिखने की भिन्नता के कारण अलग-अलग तारीखों पर बकरीद मनाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह हर बार प्रशासनिक समन्वय की माँग करता है जो अक्सर नज़रअंदाज़ रहती है। मुख्यधारा की कवरेज उत्सव और सुरक्षा पर केंद्रित रहती है, जबकि यह पर्व सामाजिक एकता और अंतर-धार्मिक संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर भी है — जिस पर गहरी रिपोर्टिंग की गुंजाइश बनी रहती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बकरीद 2026 में भारत के अधिकांश राज्यों में किस तारीख को मनाई गई?
भारत के अधिकांश राज्यों में बकरीद 28 मई 2026 (गुरुवार) को मनाई गई। धार्मिक अधिकारियों के अनुसार, धुल-हिज्जा का चाँद समय पर न दिखने के कारण इस्लामी महीने की शुरुआत एक दिन आगे खिसक गई, जिससे तारीख 28 मई निर्धारित हुई।
जम्मू-कश्मीर में बकरीद कब मनाई गई?
जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में बकरीद 27 मई 2026 (बुधवार) को मनाई गई, क्योंकि वहाँ चाँद एक दिन पहले दिख गया था। ईद-उल-अजहा की तारीख चाँद दिखने पर निर्भर होती है, इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों में तारीख में अंतर आना सामान्य है।
दिल्ली की जामा मस्जिद पर बकरीद के दौरान क्या सुरक्षा इंतज़ाम किए गए?
दिल्ली पुलिस ने जामा मस्जिद परिसर और उसके आसपास भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। मस्जिद में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की पूरी जाँच के बाद ही अंदर जाने की अनुमति दी गई, ताकि कानून-व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
ईद-उल-अजहा (बकरीद) का धार्मिक महत्व क्या है?
ईद-उल-अजहा पैगंबर इब्राहिम की उस अटूट आस्था और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है, जब वे ईश्वर के आदेश का पालन करते हुए अपने पुत्र की कुर्बानी देने को तत्पर हुए थे। यह पर्व ईश्वर के प्रति आज्ञाकारिता, कृतज्ञता, करुणा, क्षमा और दान का प्रतीक है।
क्या इस बार देशभर में बकरीद शांतिपूर्ण रही?
रिपोर्टों के अनुसार, देशभर में बकरीद का त्योहार शांतिपूर्वक मनाया गया। कई शहरों में प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की, जिससे कानून-व्यवस्था बनी रही और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ नमाज़ अदा की।
राष्ट्र प्रेस
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