बांदीकुई में ACB का जाल: रेलवे इंजीनियर समेत तीन ₹10,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने 30 सितंबर 2026 को दौसा जिले के बांदीकुई में एक सुनियोजित गुप्त ऑपरेशन के तहत तीन सरकारी अधिकारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) के वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (विद्युत) और जयपुर डिस्कॉम के दो कर्मचारी शामिल हैं, जिन पर बांदीकुई रेलवे जंक्शन पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र की नेट मीटरिंग के लिए मीटर परिवर्तन आदेश (एमसीओ) जारी करने के बदले ₹10,000 की रिश्वत लेने का आरोप है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
एसीबी के अनुसार, तीनों आरोपियों की पहचान इस प्रकार है — धर्मराज गुर्जर, वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (विद्युत), बांदीकुई रेलवे जंक्शन, उत्तर पश्चिम रेलवे; छोटेलाल सैनी, सहायक अभियंता कार्यालय, जयपुर डिस्कॉम, बांदीकुई; और धर्मेंद्र सैनी, लाइनमैन ग्रेड-प्रथम, सहायक अभियंता कार्यालय, जयपुर डिस्कॉम, बांदीकुई।
तीनों पर आरोप है कि उन्होंने मिलीभगत से एक निजी कंपनी के शिकायतकर्ता से रिश्वत वसूली। शिकायतकर्ता की कंपनी ने नेट मीटरिंग के लिए फाइल जमा की थी, जिसे जानबूझकर लंबित रखा गया था।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे बिछाया गया जाल
एसीबी की दौसा चौकी को शिकायत मिलने के बाद, जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय के निर्देशों पर गुप्त ऑपरेशन शुरू किया गया। यह अभियान एसीबी के उप पुलिस महानिरीक्षक रामेश्वर सिंह की देखरेख में और एसीबी चौकी दौसा के प्रभारी ज्ञान सिंह चौधरी के नेतृत्व में चलाया गया।
जाल के दौरान, धर्मेंद्र सैनी और छोटेलाल सैनी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को सीधे धर्मराज गुर्जर के कार्यालय भेजा। एसीबी के अनुसार, गुर्जर ने शिकायतकर्ता से ₹10,000 लिए और नोटों की गिनती स्वयं की। इसके बाद उन्होंने ₹5,000 एक खाकी लिफाफे में रखकर धर्मेंद्र सैनी और छोटेलाल सैनी को सौंप दिए।
एसीबी टीम ने फाइल में छिपाए गए ₹5,000 बरामद कर लिए और तीनों को मौके पर ही दबोच लिया। शेष ₹5,000, जो गुर्जर ने लेन-देन के दौरान शिकायतकर्ता को लौटाए थे, उन्हें भी बाद में साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया।
सरकारी तंत्र और भ्रष्टाचार का यह पैटर्न
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ नेट मीटरिंग आवेदनों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। गौरतलब है कि एमसीओ जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी और उनसे जुड़ी अनौपचारिक माँगें छोटे व्यवसायों के लिए बड़ी बाधा बन जाती हैं।
इस मामले में एक रेलवे अधिकारी और विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत यह भी दर्शाती है कि भ्रष्टाचार का जाल कभी-कभी अलग-अलग विभागों में फैला होता है, जिससे शिकायतकर्ता के लिए बचाव के रास्ते और भी संकरे हो जाते हैं।
आगे की कानूनी कार्रवाई
एसीबी की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और पुलिस महानिरीक्षक एस. परिमाला की देखरेख में तीनों आरोपियों से पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे जाँच की जा रही है और अन्य संभावित संलिप्तताओं की भी पड़ताल होगी।