बारामूला के एसएसएम कॉलेज में डॉ. रितु सिंह का संबोधन: कौशल विकास और नवाचार से युवाओं को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के प्रीहासपोरा पट्टन स्थित एसएसएम कॉलेज में 17 जून 2026 को आयोजित एक विशेष सेमिनार में प्रसिद्ध उद्यमी, शिक्षाविद, समाजसेवी और विरासत संरक्षण क्षेत्र में सक्रिय डॉ. रितु सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कौशल विकास, नवाचार और भविष्य की रोजगार संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।
मुख्य संदेश: कौशल और आत्मविश्वास
डॉ. रितु सिंह ने छात्रों से कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है — कौशल, नवाचार और आत्मविश्वास की त्रयी ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा, 'एक अच्छा नेता लोगों के भीतर आत्मविश्वास जगाता है, और यही आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।'
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में युवा रोजगार और उद्यमिता को लेकर नई संभावनाएँ तलाश रहे हैं। गौरतलब है कि केंद्रशासित प्रदेश में कौशल विकास कार्यक्रमों को हाल के वर्षों में नीतिगत प्राथमिकता दी गई है।
जम्मू-कश्मीर से भावनात्मक जुड़ाव
डॉ. रितु सिंह ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपने गहरे भावनात्मक संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों का इस भूमि से अटूट प्रेम रहा है और जब भी वे देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करती हैं, उन्हें एक विशेष अपनापन महसूस होता है।
उन्होंने अपने हालिया शिकारा भ्रमण का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक हाउसबोट में रहने वाली महिला ने उनका अत्यंत गर्मजोशी से स्वागत किया — उन्हें गले लगाया और पुराने अनुभव साझा किए, जिससे उन्हें एक विशेष आत्मीयता का अनुभव हुआ।
डोगरा शाही विरासत से जुड़ाव
डॉ. रितु सिंह जम्मू-कश्मीर के डोगरा शाही परिवार से संबंधित हैं और महाराजा हरि सिंह की पौत्रवधू हैं। सामाजिक परिवर्तन, जनकल्याण और विरासत संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के अनेक लोगों को प्रेरित किया है।
छात्रों और शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया
सेमिनार में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने डॉ. सिंह के विचारों को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि इस संवाद से उन्हें अपने भविष्य को लेकर नई दिशा और सकारात्मक सोच प्राप्त हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों के साथ कई प्रतिष्ठित शिक्षा विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को युवाओं के लिए उपयोगी बताया।
इस तरह के सेमिनार जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक परिदृश्य में उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक कदम माने जा रहे हैं।