राहुल गांधी के बयान पर पूर्व CM बोम्मई की माफी की मांग, बोले — 'देश की जनता सबक सिखाएगी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज एस. बोम्मई ने शुक्रवार, 22 मई को कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। बोम्मई ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के इस बयान ने न केवल संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाई, बल्कि पूरे देश का अपमान किया है।
बोम्मई के मुख्य आरोप
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान बोम्मई ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री मोदी को संविधान के अनुसार तीन बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। उन्होंने दावा किया कि विश्व के अनेक नेताओं ने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की है और भारत के नागरिक उन्हें अपना नेता पाकर गौरवान्वित महसूस करते हैं।
बोम्मई के अनुसार, विपक्ष के नेता का पद एक जिम्मेदार संवैधानिक पद है और ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति को 'निम्न स्तर की टिप्पणी' से परहेज करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को 'संवैधानिक पद का अपमान' करार दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के कदमों का बचाव
बोम्मई ने केंद्र सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने से जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद की जड़ों को कमज़ोर करने में मदद मिली। उन्होंने यह भी कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के ज़रिए सरकार ने पाकिस्तान को कथित तौर पर आतंकवादियों को समर्थन देने पर सबक सिखाया। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि देश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया गया है।
कांग्रेस पर चुनावी कमज़ोरी का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर भी हमला बोलते हुए दावा किया कि हाल के विधानसभा चुनावों में पाँच में से चार राज्यों में पार्टी का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की इस तरह की विवादित टिप्पणियाँ पार्टी को और अधिक कमज़ोर करेंगी।
माफी की मांग
बोम्मई ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा, 'राहुल गांधी को अपने बयान के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए, ऐसा न करने पर जनता खुद उन्हें सबक सिखाएगी।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच राजनीतिक दलों के बीच वाक्युद्ध तेज़ हो गया है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह विवाद संसद के आगामी सत्र से पहले राजनीतिक माहौल को और गरमा सकता है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान और पलटवार आने वाले चुनावी मौसम की आहट हो सकते हैं।