बेमेतरा में प्रतीकात्मक शव यात्रा: कांग्रेस विधायक देवेन्द्र यादव सहित 17 नेताओं पर एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के थाना चंदनू क्षेत्र अंतर्गत ग्राम झिरिया में निकाली गई प्रतीकात्मक शव यात्रा मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव समेत 17 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई जिला पंचायत सदस्य अंजू उर्फ अंजय बघेल की लिखित शिकायत के आधार पर 12 मई 2025 को की गई।
मुख्य घटनाक्रम
9 मई को दोपहर 2 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच ग्राम झिरिया बाजार चौक में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। आरोप है कि इन नेताओं ने छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल को मृत घोषित करते हुए शोक पत्र छपवाया और मंच से भाषण दिए। इसके बाद बांस से पुतला बनाकर मुख्य मार्ग पर शव यात्रा निकाली गई, जिससे सड़क जाम हो गया और आमजन की आवाजाही बाधित हुई।
किन नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर
एफआईआर में नामजद प्रमुख आरोपियों में देवेन्द्र यादव (भिलाई नगर विधायक), गुरूदयाल सिंह बंजारे (पूर्व विधायक), आरिफ बाठिया (नांदघाट), प्रांजल तिवारी (बहेरा, बेमेतरा), सनतधर दीवान (बेमेतरा), शक्तिधर दीवान (नवागढ़), सतीश मारकण्डे (कूरा), अंजली मारकण्डे (कूरा), देवेंद्र साहू (बदनारा), अरमान साहू (बदनारा), हर्ष बघेल (नवलपुर), प्रिंस डेहरे (सम्बलपुर), विजय यादव (नांदघाट), दीपक दिनकर (सिंघनपुरी), विनोद तिवारी (झिरिया), मोंटू तिवारी (दाढ़ी) और अजयराज सेन (बेमेतरा) शामिल हैं। इनके अलावा एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी एफआईआर में शामिल हैं।
पुलिस की प्रतिक्रिया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जाँच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति इस घटना में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ता गौवंश की हत्या के मामले को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार गौवंश की हत्या रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करती, विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा।
आगे क्या होगा
गठित जाँच टीम शीघ्र ही सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू करेगी। यह मामला छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है, क्योंकि गौवंश संरक्षण का मुद्दा राज्य में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।