बंगाल: TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला टला, स्पीकर रथींद्र बोस ने मांगा नया आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर रथींद्र बोस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिका में प्रक्रियात्मक खामियाँ पाए जाने के कारण 9 अक्टूबर 2026 को नया आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोलकाता में इस घटनाक्रम के चलते दल-बदल विरोधी कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए और लंबी खिंच गई है। स्पीकर ने स्पष्ट किया है कि यह तकनीकी निर्देश मुख्य मुद्दे — यानी विधायकों पर दल-बदल के आरोपों के गुण-दोष — से अलग है और उस पर अभी कोई राय नहीं दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
TMC के बागी गुट के नेता और वर्तमान विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता (एलओपी) ऋतब्रत बनर्जी उन 10 विधायकों में शामिल हैं जिनकी अयोग्यता की याचिका दाखिल की गई थी। यह याचिका TMC की वरिष्ठ विधायिका सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने दायर की थी, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गुट का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब TMC के एक धड़े ने पार्टी लाइन से अलग हटकर सक्रियता दिखाई, जिसके बाद दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्यवाही की माँग उठी।
प्रक्रियात्मक खामियाँ क्या थीं
सूत्रों के अनुसार, मुख्य याचिका की जांच के दौरान पाया गया कि आवेदन प्रक्रिया के नियमों के अनुसार सही था, लेकिन उससे संलग्न दस्तावेजों के हर पन्ने पर विधिवत हस्ताक्षर नहीं किए गए थे और उनकी जांच भी नियमानुसार नहीं हुई थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियमों के तहत यह अनिवार्य है कि संलग्न दस्तावेजों के प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर हों और उनकी जांच उसी प्रक्रिया से हो जैसे मूल आवेदन की होती है।
सूत्रों ने बताया, 'स्पीकर ने पाया कि प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुसार नहीं किया गया था। साथ लगे दस्तावेजों के हर पन्ने की ठीक से जांच होनी चाहिए और उस पर हस्ताक्षर होने चाहिए, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया।'
स्पीकर का निर्णय और उसकी सीमाएँ
स्पीकर रथींद्र बोस ने गुरुवार को सुनवाई के बाद यह आदेश दिया, जिसकी जानकारी शुक्रवार सुबह सार्वजनिक हुई। सूत्रों के अनुसार, आदेश का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि स्पीकर ने 10 बागी विधायकों के विरुद्ध दल-बदल के आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सूत्रों ने स्पष्ट किया, 'इसका मतलब है कि स्पीकर ने इस बात पर कोई राय नहीं दी है कि इन बागी विधायकों पर दल-बदल के आरोप सही हैं या गलत।' सोवनदेब चट्टोपाध्याय को कानून के मुताबिक नई अर्जी दाखिल करने और सभी जरूरी फॉर्म भरने की छूट दी गई है।
राजनीतिक महत्त्व और आगे की राह
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ परवान चढ़ रही हैं और TMC के भीतर गुटीय तनाव उभरकर सामने आ रहा है। गौरतलब है कि अयोग्यता प्रक्रिया का लंबा खिंचना ऋतब्रत बनर्जी को फिलहाल विपक्ष के नेता के पद पर बनाए रखता है, जो सत्तारूढ़ TMC के लिए राजनीतिक रूप से असुविधाजनक स्थिति है।
अब जब सोवनदेब चट्टोपाध्याय नया आवेदन दाखिल करेंगे, तब स्पीकर दोबारा सुनवाई करेंगे और उसके बाद ही अयोग्यता पर कोई ठोस निर्णय संभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रक्रियात्मक देरी दल-बदल विरोधी मामलों में असामान्य नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव गहरा हो सकता है।