8 अक्टूबर 2026
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बंगाल विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस आज TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर करेंगे सुनवाई

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बंगाल विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस आज TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर करेंगे सुनवाई

सारांश

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सियासी संकट नए मोड़ पर है। स्पीकर रथिंद्र बोस आज 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर सुनवाई करेंगे — सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद। इस फैसले से विपक्ष के नेता पद और विधानसभा का शक्ति संतुलन दोनों प्रभावित होंगे।

मुख्य बातें

स्पीकर रथिंद्र बोस ने 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर सुनवाई बुलाई।
बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी फिलहाल विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता (एलओपी) हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने फैसला दिया था कि अयोग्यता का अंतिम निर्णय स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में है।
भारत निर्वाचन आयोग ने मूल 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और चिन्ह दोनों गुटों से वापस लेकर नए नाम-चिन्ह आवंटित किए।
ममता गुट को 'फुटबॉल खिलाड़ी' और रितब्रत गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह मिला।

पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने 8 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर निर्णायक सुनवाई बुलाई है। इस सुनवाई में बागी गुट के नेता और पार्टी से निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी भी शामिल हैं, जो फिलहाल सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता (एलओपी) के पद पर बने हुए हैं। यह सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद बुलाई गई है, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में अंतिम फैसला करने का अधिकार स्पीकर के पास है।

सुनवाई का विवरण

विधानसभा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह सुनवाई गुरुवार दोपहर 3 बजे विधानसभा परिसर में अध्यक्ष के कक्ष में आयोजित की गई है। रितब्रत बनर्जी सहित TMC के 10 बागी विधायक और उनके अधिवक्ता इस सुनवाई में उपस्थित रहने की संभावना है। दूसरी ओर, ममता गुट की ओर से पार्टी के वरिष्ठ विधायक शोवनदेब चट्टोपाध्याय और उनके अधिवक्ता की भागीदारी अपेक्षित है।

सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

गौरतलब है कि शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें रितब्रत बनर्जी सहित 10 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की माँग की गई थी। पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय ने यह मामला निपटाते हुए स्पष्ट किया कि अयोग्यता पर अंतिम निर्णय का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास है। न्यायालय ने यह भी कहा कि 'यह वांछनीय है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में जल्द से जल्द अंतिम निर्णय लें।'

स्पीकर की वापसी और प्राथमिकता

यह सुनवाई ऐसे समय बुलाई गई है जब स्पीकर बोस हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से उबरे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के समय वे आधिकारिक विदेश दौरे पर थे और कोलकाता लौटने के बाद इस महीने के शुरू में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। काम पर लौटने के बाद उन्होंने पहली प्राथमिकता के रूप में इसी सुनवाई को बुलाया है, जो मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

चुनाव आयोग का हस्तक्षेप

विधायी संकट के समानांतर, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने हाल ही में मूल पार्टी नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और चुनावी चिन्ह 'ग्रासरूट्स एंड फ्लावर' दोनों पर रोक लगा दी है। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिन्ह आवंटित किया है, जबकि रितब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह दिया गया है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में दलबदल और गुटबाजी के सवाल तीखे हो चले हैं। स्पीकर का निर्णय न केवल इन 10 विधायकों के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि विपक्ष के नेता पद की वैधता और विधानसभा में शक्ति संतुलन को भी नए सिरे से परिभाषित करेगा। आज की सुनवाई के नतीजे पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी गुट का नेता फिलहाल विपक्ष का आधिकारिक नेता बना हुआ है — यह संवैधानिक विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ होता है। चुनाव आयोग द्वारा पार्टी नाम और चिन्ह की जब्ती के बाद यह सुनवाई और भी निर्णायक हो जाती है, क्योंकि अब विधायी और चुनावी — दोनों मोर्चों पर दोनों गुटों का भविष्य दांव पर है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के 10 बागी विधायकों का मामला क्या है?
तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायक ममता बनर्जी गुट से अलग हो गए। ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट में इनकी अयोग्यता की माँग की, जिस पर न्यायालय ने निर्णय का अधिकार विधानसभा स्पीकर को सौंप दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने फैसला दिया कि 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के पास है। न्यायालय ने यह भी कहा कि स्पीकर को यह फैसला जल्द से जल्द लेना चाहिए।
रितब्रत बनर्जी कौन हैं और उनकी अभी क्या स्थिति है?
रितब्रत बनर्जी TMC के बागी गुट के नेता हैं जिन्हें पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। इसके बावजूद वे अभी भी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के आधिकारिक नेता (एलओपी) के पद पर बने हुए हैं।
चुनाव आयोग ने TMC विभाजन पर क्या कदम उठाए हैं?
भारत निर्वाचन आयोग ने मूल पार्टी नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और चुनाव चिन्ह 'ग्रासरूट्स एंड फ्लावर' दोनों पर रोक लगा दी है। ममता गुट को 'ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिन्ह, जबकि रितब्रत गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चिन्ह दिया गया है।
आज की सुनवाई के बाद क्या होगा?
स्पीकर रथिंद्र बोस की आज की सुनवाई के बाद यदि विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाता है तो विपक्ष नेता का पद रिक्त हो सकता है और विधानसभा में शक्ति-संतुलन बदल सकता है। यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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