24 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता: शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दूसरी बार दाखिल की याचिका

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता: शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में दूसरी बार दाखिल की याचिका

सारांश

TMC के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने दूसरी बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है — इस बार विधानसभा अध्यक्ष द्वारा तीन महीने की समय-सीमा चूकने के बाद। रितब्रत बनर्जी और फिरहाद हकीम समेत 10 विधायकों पर दलबदल विरोधी कानून की तलवार लटक रही है।

मुख्य बातें

शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने 23 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दूसरी बार याचिका दाखिल की।
याचिका में रितब्रत बनर्जी , फिरहाद हकीम सहित TMC के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता माँगी गई।
विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस ने 8 अक्टूबर 2026 की तीन महीने की समय-सीमा में कोई निर्णय नहीं लिया।
पहला आवेदन 8 जुलाई 2026 को स्पीकर को सौंपा गया था; सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को समय-सीमा तय की थी।
मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना; दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत कार्रवाई की माँग।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में पुनः याचिका दाखिल कर पार्टी के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता की माँग की है। इस याचिका में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी तथा कोलकाता नगर निगम (KMC) के पूर्व महापौर फिरहाद हकीम सहित दस विधायकों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका की पृष्ठभूमि

यह पहली बार नहीं है जब चट्टोपाध्याय ने इस मामले में न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। इसी वर्ष सितंबर 2026 में उन्होंने इन्हीं 10 बागी विधायकों को दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत बर्खास्त करने की माँग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में पहली याचिका दाखिल की थी। 28 सितंबर को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पहला आवेदन 8 जुलाई 2026 को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था, जिससे तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित हो गई थी। हालाँकि अध्यक्ष रथेंद्र बोस ने उस समय-सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं सुनाया, जिसके कारण यह मामला एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लाया गया है।

किन विधायकों पर है अयोग्यता की तलवार

चट्टोपाध्याय की नई याचिका में जिन 10 विधायकों की अयोग्यता माँगी गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं — रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अरूप रॉय, शिउली साहा, अख्तरुज्जमान, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान। इसके अतिरिक्त विधानसभा के प्रधान सचिव को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

सुनवाई अगले सप्ताह संभावित

सूत्रों के अनुसार इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है। याचिका में मुख्य रूप से विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस पर निर्णय न लेने का आरोप है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर गुटबाजी चरम पर बताई जा रही है।

राजनीतिक महत्व

दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत अयोग्यता की माँग पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी हलचल मचा सकती है। रितब्रत बनर्जी विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं, जबकि फिरहाद हकीम TMC के वरिष्ठतम चेहरों में से एक रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह मामला न केवल TMC की आंतरिक एकता पर सवाल उठाता है, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका और न्यायिक निगरानी के बड़े प्रश्न भी खड़े करता है।

सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं — यह फैसला भविष्य में अन्य राज्यों में बागी विधायकों के मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह इस मामले की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में किसके खिलाफ याचिका दाखिल की है?
चट्टोपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस के खिलाफ निर्णय न लेने के आधार पर याचिका दाखिल की है, जिसमें रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम सहित TMC के 10 बागी विधायकों को प्रतिवादी बनाया गया है। वे दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत इन विधायकों की अयोग्यता चाहते हैं।
TMC के किन 10 बागी विधायकों पर अयोग्यता की माँग की गई है?
इन 10 विधायकों के नाम हैं — रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अरूप रॉय, शिउली साहा, अख्तरुज्जमान, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान। विधानसभा के प्रधान सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में क्या कहा था?
28 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता आवेदन का निपटारा तीन महीने के भीतर करना चाहिए। पहला आवेदन 8 जुलाई को दिया गया था, इसलिए समय-सीमा 8 अक्टूबर थी, जो बिना निर्णय के बीत गई।
दलबदल विरोधी अधिनियम क्या है और यह इस मामले में कैसे लागू होता है?
दलबदल विरोधी अधिनियम (दसवीं अनुसूची) उन विधायकों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान करता है जो अपनी पार्टी के विरुद्ध मतदान करते हैं या पार्टी सदस्यता छोड़ते हैं। इस मामले में TMC का आरोप है कि ये 10 विधायक पार्टी निर्देशों के विरुद्ध जाकर बागी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिससे उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
रिपोर्टों के अनुसार इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है। यह दूसरी याचिका है और न्यायालय का अगला आदेश विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर निर्णायक दिशा दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले