27 अगस्त 2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा: स्पीकर से मुलाकात नहीं मिली तो TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय चैंबर के बाहर धरने पर बैठे

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पश्चिम बंगाल विधानसभा: स्पीकर से मुलाकात नहीं मिली तो TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय चैंबर के बाहर धरने पर बैठे

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष को स्पीकर रथींद्र बोस ने मिलने का समय नहीं दिया — तो वे चैंबर के बाहर ही धरने पर बैठ गए। विपक्ष के नेता के पद की अनदेखी और संवाद की टूटती परंपरा अब खुले टकराव की शक्ल ले रही है।

मुख्य बातें

शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष ने 27 मई 2026 को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के चैंबर के बाहर धरना दिया।
दोनों नेताओं का आरोप — पहले से पत्र और दस्तावेज़ भेजने के बावजूद मिलने का समय नहीं दिया गया।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि स्पीकर बिना सुने चले गए और सीआरपीएफ से घिरे थे।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं दी गई हैं।
स्पीकर रथींद्र बोस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 27 मई 2026 को उस समय असामान्य दृश्य देखने को मिला जब विपक्ष के नेता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय अपने साथी विधायक कुणाल घोष के साथ विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों नेताओं का आरोप है कि वे ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए स्पीकर से मिलने आए थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया और उनकी बात को नज़रअंदाज़ किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करने पहुँचे थे। उनका कहना है कि पहले से ज़रूरी पत्र और दस्तावेज़ भेजे जाने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और मिलने का समय भी नहीं दिया गया। इसी नाराज़गी में दोनों नेता चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए।

शोभनदेव चट्टोपाध्याय का बयान

मीडिया से बातचीत में शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा, 'यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है। उन्होंने हमारी बात सुनने की कोशिश नहीं की और भागने लगे। वे सीआरपीएफ से घिरे हुए थे। हमारे कार्यकर्ता भी वहाँ थे। फिर भी, वे भागे और उनका पैर एक कुर्सी से टकरा गया। वे गिर सकते थे। हमने कुछ नहीं कहा और चुप रहे।'

उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्षों का हवाला देते हुए कहा कि बिमान बनर्जी, हाशिम अब्दुल हलीम और अपूर्वा लाल मजूमदार के कार्यकाल में ऐसी कोई समस्या नहीं आई थी। उनके अनुसार विधानसभा हमेशा से चर्चा और संवाद का केंद्र रही है, जहाँ विधायक अपनी बात — चाहे खुशी हो या शिकायत — रखने आते हैं।

कुणाल घोष की आपत्तियाँ

TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के पद को उचित संस्थागत मान्यता नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता को आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जो एक संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध है।

संवाद की परंपरा पर सवाल

यह ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच विधायी संवाद पहले से ही तनावपूर्ण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि विपक्ष के नेता का पद संसदीय लोकतंत्र में एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका निभाता है और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष से मिलने का अधिकार परंपरागत रूप से स्वीकृत रहा है। इस घटना ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में संस्थागत संवाद की स्थिति पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

आगे क्या

फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। TMC नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि संवाद की यह स्थिति नहीं बदली तो वे अपना विरोध और तेज़ करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उन्हें स्पीकर से मिलने से रोकना — चाहे कारण कुछ भी हो — विधायी परंपराओं के लिए चिंताजनक है। विडंबना यह है कि TMC खुद सत्तारूढ़ दल है और उसी के नेता संस्थागत उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं, जो बताता है कि यह टकराव दलीय नहीं बल्कि व्यक्तिगत या गुटीय है। मुख्यधारा की कवरेज इसे 'धरने' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी आवाज़ — यहाँ तक कि सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी — के लिए संस्थागत जगह सिकुड़ रही है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष ने धरना क्यों दिया?
दोनों TMC नेता विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए मिलने आए थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया। पहले से पत्र और दस्तावेज़ भेजने के बावजूद कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने चैंबर के बाहर ही धरना देने का फैसला किया।
विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने स्पीकर पर क्या आरोप लगाए?
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि स्पीकर रथींद्र बोस ने उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की और सीआरपीएफ की घेराबंदी में वहाँ से चले गए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले के विधानसभा अध्यक्षों — बिमान बनर्जी, हाशिम अब्दुल हलीम और अपूर्वा लाल मजूमदार — के समय ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी थी।
कुणाल घोष ने विपक्ष के नेता के पद को लेकर क्या कहा?
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के पद को उचित संस्थागत मान्यता नहीं दी जा रही है और शोभनदेव चट्टोपाध्याय को आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस मामले पर क्या कहा?
इस घटना पर अब तक विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा में संस्थागत संवाद की स्थिति पर सवाल उठाती है। TMC नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि स्थिति नहीं बदली तो वे अपना विरोध और तेज़ करेंगे, जिससे विधानसभा सत्र में और तनाव बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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