पश्चिम बंगाल विधानसभा: स्पीकर से मुलाकात नहीं मिली तो TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय चैंबर के बाहर धरने पर बैठे
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 27 मई 2026 को उस समय असामान्य दृश्य देखने को मिला जब विपक्ष के नेता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय अपने साथी विधायक कुणाल घोष के साथ विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों नेताओं का आरोप है कि वे ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए स्पीकर से मिलने आए थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया और उनकी बात को नज़रअंदाज़ किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, शोभनदेव चट्टोपाध्याय और कुणाल घोष विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करने पहुँचे थे। उनका कहना है कि पहले से ज़रूरी पत्र और दस्तावेज़ भेजे जाने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और मिलने का समय भी नहीं दिया गया। इसी नाराज़गी में दोनों नेता चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय का बयान
मीडिया से बातचीत में शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा, 'यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है। उन्होंने हमारी बात सुनने की कोशिश नहीं की और भागने लगे। वे सीआरपीएफ से घिरे हुए थे। हमारे कार्यकर्ता भी वहाँ थे। फिर भी, वे भागे और उनका पैर एक कुर्सी से टकरा गया। वे गिर सकते थे। हमने कुछ नहीं कहा और चुप रहे।'
उन्होंने पूर्व विधानसभा अध्यक्षों का हवाला देते हुए कहा कि बिमान बनर्जी, हाशिम अब्दुल हलीम और अपूर्वा लाल मजूमदार के कार्यकाल में ऐसी कोई समस्या नहीं आई थी। उनके अनुसार विधानसभा हमेशा से चर्चा और संवाद का केंद्र रही है, जहाँ विधायक अपनी बात — चाहे खुशी हो या शिकायत — रखने आते हैं।
कुणाल घोष की आपत्तियाँ
TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के पद को उचित संस्थागत मान्यता नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता को आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जो एक संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध है।
संवाद की परंपरा पर सवाल
यह ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच विधायी संवाद पहले से ही तनावपूर्ण बताया जा रहा है। गौरतलब है कि विपक्ष के नेता का पद संसदीय लोकतंत्र में एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका निभाता है और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष से मिलने का अधिकार परंपरागत रूप से स्वीकृत रहा है। इस घटना ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में संस्थागत संवाद की स्थिति पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
आगे क्या
फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। TMC नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि संवाद की यह स्थिति नहीं बदली तो वे अपना विरोध और तेज़ करेंगे।