बंगाल युवा कांग्रेस ने 26 नेताओं को निलंबित किया, रामलीला मैदान प्रदर्शन से अनुपस्थिति पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल प्रदेश युवा कांग्रेस ने 4 नवंबर 2026 को अपने 26 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया, क्योंकि वे 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे। निलंबित नेताओं में छह जिला अध्यक्ष भी शामिल हैं। यह अनुशासनात्मक कदम पश्चिम बंगाल युवा कांग्रेस के भीतर नई बहस का कारण बन गया है।
निलंबन आदेश का विवरण
3 नवंबर 2026 को जारी इस निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा और अगले आदेश तक जारी रहेगा। पश्चिम बंगाल प्रदेश युवा कांग्रेस के लेटरहेड पर जारी आदेश में कहा गया है कि अखिल भारतीय युवा कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में हुए आंदोलन में संबंधित पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया, इसीलिए यह संगठनात्मक कार्रवाई की गई।
इस आदेश पर संगठन के राष्ट्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल प्रभारी एहसान अहमद खान और पश्चिम बंगाल प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष सौरव प्रसाद के हस्ताक्षर हैं।
निलंबित नेताओं की सूची
निलंबित जिला अध्यक्षों में कूच बिहार जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष सुकमल बर्मन, जलपाईगुड़ी के नबीनेन्दु मौलिक, उत्तरी दिनाजपुर के मामुन रेजा, पूर्वी बर्दवान के मिथुन सरकार, उत्तरी कोलकाता के अभिषेक गुप्ता और दक्षिण कोलकाता के इंद्रजीत मंडल शामिल हैं।
इसके अलावा, उपाध्यक्ष बाबुल एसके और कई महासचिवों को भी निलंबित किया गया है। अन्य निलंबित नेताओं में शफीकुल मल्लिक, कुणालकंती चौधरी, सुबार्थी चक्रवर्ती, तारिक अनवर शेख, साहिल नवाज, परिक्षित नाग, संजय खान, साजिद मोल्लाह, मौ मंडल, तारिक अनवर, पुरब कुमार बसु, अर्पण सिन्हा, बादशाह आलमगीर, अरिजीत चक्रवर्ती, रेजाउल चौधरी और परवाज खान शामिल हैं। महासचिव बापीरुल मंडल, सचिव सैनुर रेबा, दबिश इस्तियाक और चंद्रशेखर गंगोपाध्याय के खिलाफ भी निलंबन आदेश जारी किए गए हैं।
प्रदेश नेता की आपत्ति
इस फैसले का विरोध करते हुए प्रदेश कांग्रेस नेता रोहन मित्रा निलंबित नेताओं और कार्यकर्ताओं के समर्थन में सामने आए। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में लंबे समय से संगठन को एकजुट रखने वाले लोगों को उनकी अनुपस्थिति का कारण जाने बिना अचानक निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था।
मित्रा ने नेतृत्व से अपील की कि वे इस मामले को मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें। उनके अनुसार, युवा कांग्रेस के कई कार्यकर्ता साधारण परिवारों से आते हैं और 8 से 10 साल तक संगठन के लिए काम करने के बाद भी उनके पास आर्थिक या राजनीतिक संसाधन नहीं हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युवा कांग्रेस में सक्रिय रहने की आयु सीमा 35 वर्ष है, फिर भी कई लोग वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे हैं।
संगठन पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने कांग्रेस पहले से ही कमज़ोर स्थिति में है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के सामूहिक निलंबन से ज़मीनी कार्यकर्ताओं में हताशा बढ़ सकती है। संगठन के भीतर यह बहस अब तेज़ हो गई है कि अनुशासन और कार्यकर्ताओं की व्यावहारिक सीमाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।