बंगाल में 4000 ईवीएम जलने पर इमरान मसूद का हमला: 'लोकतंत्र खतरे में, देश को जागना होगा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 13 जून को सहारनपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर 4,000 ईवीएम जलाए जाने की घटना पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन हालात से निपटने के लिए विपक्षी एकता अनिवार्य है।
ईवीएम जलने पर मसूद की तीखी प्रतिक्रिया
इमरान मसूद ने कहा, 'ईवीएम तानाशाही और अराजकता का प्रतीक बन गया है। चुनावी अनियमितताओं की बात सामने आई तो ईवीएम पर भी सवाल खड़े हुए — और अब ईवीएम को जला दिया गया।' उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के लिए 'गंभीर संकेत' बताया और कहा कि जहाँ भी इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं, वहाँ सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उपयोग होने वाली ये ईवीएम कथित तौर पर जलकर नष्ट हो गईं, जिससे विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
लोकतंत्र पर मसूद की चेतावनी
मसूद ने कहा, 'अब देश को जाग जाना चाहिए। बंगाल और मध्य प्रदेश में जो कुछ हुआ है, उससे यह संकेत मिलता है कि लोकतंत्र का कोई मायना नहीं है। अगर देश में लोकतंत्र नहीं रहेगा तो गरीब आदमी की आवाज़ भी खत्म हो जाएगी।' उन्होंने आगे कहा कि देश लोकतंत्र के खात्मे की ओर जा रहा है और जनता को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सवाल उठाते रहे हैं।
विपक्षी एकता और राहुल गांधी का नेतृत्व
विपक्षी एकता के सवाल पर सहारनपुर के कांग्रेस सांसद ने कहा, 'मौजूदा परिस्थितियों में विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए। इन हालात से निपटने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में ही मजबूत लड़ाई लड़ी जा सकती है।' समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों पर उन्होंने कहा कि यह तय करना अखिलेश यादव का काम है, लेकिन अलग-अलग राहों से कोई फायदा नहीं होगा।
केंद्र सरकार और विदेश नीति पर निशाना
मसूद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह कई अहम मामलों में कड़े फैसले लेने में असमर्थ दिखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री कहीं भी जाएँ, लेकिन देश की स्थिति पर ध्यान देना ज़रूरी है।' आलोचकों का कहना है कि विपक्ष इस तरह के बयानों से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
आगे क्या होगा
ईवीएम जलाने की इस कथित घटना की जाँच की माँग विपक्षी दलों की ओर से उठ रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह मुद्दा आने वाले समय में संसद और चुनाव आयोग के स्तर पर भी गूँज सकता है। कांग्रेस इसे जन-जागरण का माध्यम बनाने की कोशिश में है।