बेंगलुरु पुलिस के प्रदर्शनकारियों से बर्ताव की समीक्षा होगी: गृह मंत्री प्रियांक खड़गे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि 12 अक्टूबर को बेंगलुरु के के.आर. सर्कल के पास प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के बर्ताव की औपचारिक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है और इसे किसी भी परिस्थिति में दबाया नहीं जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
12 अक्टूबर को बेंगलुरु के के.आर. सर्कल के पास प्रदर्शनकारियों का एक समूह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग लेकर एकत्रित हुआ था। यह समूह चुनाव अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहा था।
बेंगलुरु सिटी पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारी बिना किसी पूर्व अनुमति या सूचना के इकट्ठा हुए थे, जिससे उच्च न्यायालय के उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ, जिनके तहत विरोध-प्रदर्शन केवल फ्रीडम पार्क जैसी निर्धारित स्थानों पर ही किए जा सकते हैं। पुलिस ने पहले भीड़ से फ्रीडम पार्क जाने का अनुरोध किया और जब प्रदर्शनकारियों ने इनकार कर दिया, तो उन्हें एहतियातन हिरासत में लेकर वहाँ से हटाया गया।
गृह मंत्री की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बयान में कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कोई रुकावट न आए। उन्होंने कहा, 'शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतंत्र का मूल आधार है। इसका सम्मान किया जाना चाहिए, इसकी रक्षा की जानी चाहिए, और इसे कभी दबाया नहीं जाना चाहिए।'
खड़गे ने यह भी कहा, 'लोकतंत्र में, शांतिपूर्ण असहमति कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं है। यह एक ऐसा अधिकार है जिसकी रक्षा कानून-व्यवस्था को करनी चाहिए।' उन्होंने अधिकारियों की जिम्मेदारी को केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित न रखकर ऐसा माहौल बनाने तक भी विस्तारित बताया, जिसमें नागरिक बिना किसी भय के अपनी असहमति जाहिर कर सकें।
प्रदर्शनकारियों से अपील
गृह मंत्री ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे पुलिस के साथ सहयोग करें और अपनी सुरक्षा तथा दूसरों के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिकारियों को पूर्व सूचना देते रहें। उनका संदेश था: 'पुलिस आपके अधिकारों की रक्षा के लिए है, न कि आपकी आवाज़ को दबाने के लिए।'
व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में आई है जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के तहत बेंगलुरु में अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन पर प्रतिबंध है, जो इस विवाद की जड़ में है।
आगे क्या
गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस कार्रवाई की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट होगा कि क्या पुलिस के बर्ताव में कोई प्रशासनिक चूक हुई। समीक्षा के नतीजे भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों से निपटने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया तय कर सकते हैं।