प्रियांक खड़गे का बड़ा आरोप: केपीएससी जांच की आड़ में कांग्रेस नेताओं पर ED-IT का दुरुपयोग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक केंद्रीय मंत्री, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती जांच को राजनीतिक आड़ बनाकर, उनके और उनके कैबिनेट सहयोगियों के विरुद्ध केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करवाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयान उस समय आया जब बेंगलुरु में स्टिंग ऑपरेशन विवाद और केपीएससी भर्ती घोटाले को लेकर राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
खड़गे के आरोपों का सार
खड़गे ने बिना नाम लिए केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी. कुमारस्वामी की ओर स्पष्ट इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली के सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि एक केंद्रीय मंत्री, केंद्र सरकार पर लगातार दबाव डाल रहे हैं कि वे मेरे कैबिनेट सहयोगियों और मेरे खिलाफ आयकर विभाग (IT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का इस्तेमाल करें — और इसके लिए केपीएससी जांच को एक राजनीतिक आड़ के तौर पर उपयोग किया जा रहा है।’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़ा एक व्यक्ति ED का उपयोग करके केपीएससी भर्ती मामले के आरोपियों पर दबाव बना रहा है, ताकि कांग्रेस नेताओं को झूठे मामलों में फँसाया जा सके।
स्टिंग ऑपरेशन और मोबाइल फोन का सुराग
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने रविवार, 1 नवंबर को खुलासा किया कि जांचकर्ताओं को ऐसे साक्ष्य प्राप्त हुए हैं जो यह संकेत देते हैं कि कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले के संदर्भ में दिल्ली स्थित कुमारस्वामी के आवास पर एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान हुआ था। यह खुलासा पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच के दौरान सामने आया।
गौरतलब है कि यह जांच सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी जनता दल (सेक्युलर) — JD(S) के बीच टकराव की धुरी बन चुकी है।
कुमारस्वामी का पलटवार
पुलिस कमिश्नर के बयान के बाद कुमारस्वामी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता और उन्होंने कई ‘बड़े खुलासे’ करने की घोषणा की। कुमारस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि जब खड़गे सिद्दारमैया सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री थे, तब ‘ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना’ के अंतर्गत असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों की भर्ती में हुए कथित घोटाले में खड़गे की संलिप्तता थी।
खड़गे का खंडन और तकनीकी तर्क
प्रियांक खड़गे ने कुमारस्वामी के दावों को पूरी तरह नकारते हुए स्पष्ट किया कि ओएमआर शीट की कस्टडी केपीएससी के पास होती है, न कि उनके विभाग आरडीपीआर के पास, और परीक्षा प्रक्रिया का प्रबंधन भी पूर्णतः केपीएससी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित आरोपबाजी करार दिया।
खड़गे ने यह भी कहा कि यह मंत्री अकेले फँसने से बचने के लिए अपने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगियों को भी इस विवाद में खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे की स्थिति
केपीएससी भर्ती घोटाले और स्टिंग ऑपरेशन की जांच अभी जारी है और इसके दायरे का विस्तार होता दिख रहा है। दिल्ली कनेक्शन के साक्ष्य सामने आने के बाद यह प्रकरण अब केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा — इसके केंद्र-राज्य संबंधों पर भी दूरगामी निहितार्थ हो सकते हैं। जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और कुमारस्वामी के ‘प्रस्तावित खुलासों’ पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।