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भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट राजनीतिक दबाव में तैयार, दोषी बचाए गए: सज्जन सिंह वर्मा का आरोप

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भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट राजनीतिक दबाव में तैयार, दोषी बचाए गए: सज्जन सिंह वर्मा का आरोप

सारांश

इंदौर के भागीरथपुरा में करीब 40 मौतों के बाद आई जांच रिपोर्ट पर कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने बड़ा आरोप लगाया है — रिपोर्ट मुख्यमंत्री के दबाव में तैयार हुई और असली दोषी बचाए गए। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण के टकराव का प्रतीक बन गया है।

मुख्य बातें

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है; हाल ही में एक और महिला ने अस्पताल में दम तोड़ा।
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव के दबाव में तैयार की गई और वास्तविक दोषियों को बचाया गया।
वर्मा ने माँग की कि क्षेत्र के विधायक, संबंधित मंत्री और स्थानीय पार्षद समेत सभी जिम्मेदारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरों को जनसमस्याओं से सरकार को अवगत कराने का प्रयास बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों को वर्मा ने केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संस्थागत चिंता का विषय बताया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने 2 अक्टूबर 2026 को इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले की जांच रिपोर्ट पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव के राजनीतिक दबाव में तैयार की गई और वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश की गई है। वर्मा ने माँग की कि क्षेत्र के विधायक, संबंधित विभाग के मंत्री और स्थानीय पार्षद समेत उन सभी की जवाबदेही तय हो, जिन्हें इलाके की जल-संकट समस्या की जानकारी थी।

मुख्य घटनाक्रम

वर्मा के अनुसार, भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में एक और महिला की मौत हुई, जो लंबे समय से अस्पताल में भर्ती थीं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में केवल एक-दो अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया है।

गौरतलब है कि इलाके में पानी की समस्या के समाधान के लिए योजना बनाई गई थी, मंजूरी की प्रक्रिया चली, लेकिन मामला लंबे समय तक अटका रहा। वर्मा ने कहा कि इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सरकार पर आरोप

कांग्रेस नेता ने कहा कि भागीरथपुरा की यह त्रासदी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार, स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की घोर विफलता को उजागर करती है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री स्तर पर दबाव बनाकर जांच की दिशा को मोड़ा गया, ताकि राजनीतिक रूप से संवेदनशील नामों को रिपोर्ट से बाहर रखा जा सके।

वर्मा ने माँग की कि मौतों के वास्तविक कारणों और प्रशासनिक लापरवाही की स्वतंत्र जांच कराई जाए और सभी दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।

राहुल गांधी के दौरों का राजनीतिक संदर्भ

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे और मध्य प्रदेश में उनके लगातार दौरों के राजनीतिक प्रभाव पर पूछे गए सवाल पर वर्मा ने कहा कि इन दौरों का उद्देश्य राजनीतिक प्रभाव नहीं, बल्कि प्रदेश की जमीनी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से देखना है। उनके अनुसार, जब राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता प्रदेश में आकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं, तो शासन और प्रशासन भी अधिक सतर्क होता है।

वर्मा ने बालाघाट में छात्रों से जुड़े मुद्दों और कुपोषण से बच्चों की मौत का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार इन गंभीर समस्याओं को लेकर पर्याप्त रूप से सजग नहीं है।

चुनाव आयोग पर विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के विरोध पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार की उस टिप्पणी पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष चुनाव हारने पर अंपायर को दोष देता है, वर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल केवल विपक्षी दल नहीं उठा रहे — चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों की ओर से भी फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर ज्ञानेश कुमार द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि विपक्ष की चिंताओं को केवल चुनावी हार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब इंदौर के भागीरथपुरा मामले को लेकर राज्य स्तर पर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। कांग्रेस की माँग है कि उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इन आरोपों का जवाब कब और किस रूप में देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जवाबदेही की परिधि कहाँ खींची जाती है। करीब 40 मौतों के बावजूद यदि रिपोर्ट केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहती है, तो यह संरचनात्मक जवाबदेही की नहीं, बल्कि राजनीतिक सुरक्षा की कहानी बन जाती है। मध्यप्रदेश में यह पहली बार नहीं है जब किसी जन-स्वास्थ्य त्रासदी की जांच पर दबाव के आरोप लगे हों — सवाल यह है कि न्यायिक या उच्चस्तरीय निगरानी के बिना क्या निष्पक्षता संभव है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागीरथपुरा में दूषित पानी से कितनी मौतें हुई हैं?
कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा के अनुसार, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में एक और महिला की मौत हुई जो लंबे समय से अस्पताल में भर्ती थीं।
सज्जन सिंह वर्मा ने जांच रिपोर्ट पर क्या आरोप लगाए हैं?
वर्मा ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव के राजनीतिक दबाव में तैयार की गई और वास्तविक दोषियों को बचाया गया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में केवल एक-दो निचले स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराकर मामले को समाप्त करने की कोशिश की गई।
कांग्रेस की माँग क्या है?
कांग्रेस ने माँग की है कि क्षेत्र के विधायक, संबंधित विभाग के मंत्री, स्थानीय पार्षद और उन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए जिन्हें इलाके में जल संकट की जानकारी थी। पार्टी चाहती है कि निष्पक्ष जांच के बाद सभी दोषियों पर मुकदमा चलाया जाए।
राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरों को लेकर वर्मा ने क्या कहा?
वर्मा ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दौरों का उद्देश्य राजनीतिक प्रभाव नहीं, बल्कि प्रदेश की जमीनी समस्याओं को सीधे देखना है। उनके अनुसार इन दौरों से शासन और प्रशासन भी अधिक सतर्क होता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या विवाद है?
वर्मा ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल केवल विपक्ष नहीं, बल्कि आयोग के अपने अधिकारियों ने भी उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर ज्ञानेश कुमार द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
राष्ट्र प्रेस
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