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क्या भाई दूज पर अमृत चौघड़िया में तिलक करने से शुभ फल मिलता है?

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क्या भाई दूज पर अमृत चौघड़िया में तिलक करने से शुभ फल मिलता है?

सारांश

भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। जानिए इस साल कब मनाया जाएगा और किस राशि के लिए ये दिन विशेष होगा।

मुख्य बातें

भाई दूज भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है।
तिलक करने का सबसे शुभ समय अमृत चौघड़िया में है।
कुछ राशियों के लिए यह दिन विशेष लाभ लाता है।
सफेद रंग की वस्तुओं का उपहार देना शुभ माना जाता है।
इस पर्व की पवित्र कथा से हमें रिश्तों का महत्व समझ में आता है।

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। दीपावली के इस पांच दिवसीय महापर्व का समापन भाई दूज के साथ होता है, जिसे भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पवित्र प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।

इस दिन, बहने अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करते हुए तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और अपने हाथों से भोजन कराती हैं। भाई भी बहन को जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देते हैं और उपहार भेंट करते हैं।

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 को रात 8 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगी और 23 अक्टूबर 2025 को रात 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि पर्वों को उदय तिथि यानी जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, उस दिन मनाया जाता है, इसलिए भाई दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाना ही शास्त्रों के अनुसार उचित माना गया है। भाई दूज की पूजा और तिलक का कार्य सुबह नहीं बल्कि दोपहर के समय करना शुभ रहता है।

ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन का सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 2 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस दौरान 12:05 से 1:30 तक शुभ चौघड़िया और 1:30 से 2:54 तक अमृत चौघड़िया रहेगा, जो कि अत्यंत फलदायी और सौभाग्यवर्धक माना गया है। विशेष रूप से अमृत चौघड़िया के समय तिलक करना भाई के जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।

भाई दूज से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है, जो सूर्यपुत्र यमराज और उनकी बहन यमुनाजी से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्रेम करते थे लेकिन व्यस्तताओं के कारण वे उनसे मिलने नहीं जा पाते थे। यमुनाजी ने बार-बार अपने भाई को आमंत्रित किया और एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज उनकी बात मानकर उनके घर पहुंचे।

यमुनाजी ने अपने भाई का तिलक कर भव्य स्वागत किया और उन्हें अनेक पकवानों से भरा स्वादिष्ट भोजन कराया। यमराज ने अपनी बहन की सेवा और प्रेम से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक कर भोजन कराएगी, उसके भाई को कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। तभी से यह पर्व यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

ज्योतिष के अनुसार, इस वर्ष भाई दूज के दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि में हो रहा है, जो विशेष रूप से कुछ राशियों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। मेष राशि वालों को माता-पिता से स्नेह मिलेगा और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। धन लाभ के योग भी बन रहे हैं। कन्या और धनु राशि के जातकों को पारिवारिक जीवन में सुख की प्राप्ति होगी और भाई-बहन के संबंधों में मजबूती आएगी। खासकर धनु राशि वालों को भाई दूज के दिन कोई शुभ समाचार मिल सकता है और व्यापार में भी लाभ के संकेत हैं। इस दिन यदि जातक अपनी बहन को सफेद रंग की वस्तुएं जैसे वस्त्र, मिठाई या चांदी का कोई तोहफा भेंट करें तो विशेष फल प्राप्त होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पारिवारिक बंधनों को और भी गहरा करता है। समर्पण, प्रेम, और विश्वास का यह पर्व आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई दूज कब मनाया जाता है?
भाई दूज हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
अमृत चौघड़िया क्या है?
अमृत चौघड़िया एक विशेष समय होता है जब तिलक करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
भाई दूज पर कौन सी राशियाँ विशेष रूप से लाभान्वित होंगी?
मेष, कन्या, और धनु राशि के जातकों को विशेष लाभ और सुख की प्राप्ति होगी।
क्या भाई दूज को उपहार देना आवश्यक है?
जी हाँ, भाई दूज पर अपनी बहन को उपहार देने से रिश्तों में मजबूती आती है।
भाई दूज पर तिलक का महत्व क्या है?
तिलक करने से भाई की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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