कामाख्या कॉरिडोर परियोजना में तेजी आएगी, कानूनी बाधाएं हटीं: हिमंता बिस्वा सरमा

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कामाख्या कॉरिडोर परियोजना में तेजी आएगी, कानूनी बाधाएं हटीं: हिमंता बिस्वा सरमा

सारांश

₹498 करोड़ की मां कामाख्या एक्सेस कॉरिडोर परियोजना की राह में आड़े आ रही कानूनी अड़चनें अब दूर हो गई हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि पूर्वोत्तर की इस सबसे बड़ी मंदिर पुनर्निर्माण पहल में अब तेज़ी आएगी — लाखों तीर्थयात्रियों के लिए राहत की खबर।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 14 मई 2026 को कामाख्या कॉरिडोर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।
₹498 करोड़ की यह परियोजना फरवरी 2024 में शुरू हुई थी और पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मंदिर पुनर्निर्माण पहलों में से एक है।
अधिकांश कानूनी बाधाएं दूर होने के बाद अब परियोजना में तेज़ी आने की उम्मीद है।
पहुँच मार्गों की चौड़ाई 8-10 फीट से बढ़ाकर 27-30 फीट और खुला स्थान 3,000 वर्ग फीट से बढ़ाकर 1 लाख वर्ग फीट से अधिक किया जाएगा।
परियोजना केंद्र की पीएम-देविन योजना के तहत लागू की जा रही है।
विरासत संरचनाओं और भूमिगत जल स्रोतों पर प्रभाव को लेकर दायर याचिकाएं अब निपट चुकी हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 14 मई 2026 को घोषणा की कि गुवाहाटी में चल रही ₹498 करोड़ की मां कामाख्या एक्सेस कॉरिडोर परियोजना अब तेज़ गति से आगे बढ़ेगी, क्योंकि इससे जुड़ी अधिकांश कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित पूजनीय कामाख्या मंदिर के तीर्थयात्रियों को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स पर लिखा, 'मैंने मां कामाख्या एक्सेस कॉरिडोर परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। अधिकांश कानूनी प्रक्रियाएं अब पूरी हो चुकी हैं, इसलिए आने वाले दिनों में काम में तेजी आएगी। हमारा लक्ष्य मां कामाख्या मंदिर आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को एक उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करना है।' यह समीक्षा बैठक परियोजना की प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

परियोजना का विवरण और महत्व

फरवरी 2024 में शुरू की गई यह ₹498 करोड़ की परियोजना पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मंदिर पुनर्निर्माण पहलों में से एक मानी जाती है। इसका उद्देश्य देश के सबसे पूजनीय शक्ति पीठों में से एक, ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर के आसपास के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक और सुविधाजनक बनाना है। यह कॉरिडोर परियोजना केंद्र सरकार की पीएम-देविन योजना के तहत कार्यान्वित की जा रही है।

बुनियादी ढाँचे में बदलाव

अधिकारियों के अनुसार, पुनर्निर्माण योजना में तीन स्तरीय कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। मौजूदा पहुँच मार्गों की चौड़ाई लगभग 8-10 फीट से बढ़ाकर करीब 27-30 फीट की जाएगी। इसके अलावा, मंदिर परिसर के आसपास का खुला स्थान लगभग 3,000 वर्ग फीट से बढ़ाकर 1 लाख वर्ग फीट से अधिक किया जाएगा।

कानूनी और पर्यावरणीय चुनौतियाँ

गौरतलब है कि इस पुनर्विकास पहल को पहले कानूनी और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। नीलाचल पहाड़ी पर स्थित मंदिर की विरासत संरचनाओं और भूमिगत जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। अब इन अधिकांश कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

तीर्थयात्रियों पर असर

इस परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य मंदिर परिसर में भीड़भाड़ को कम करना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है। विशेष रूप से वार्षिक अंबुबाची मेले जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान, जब लाखों तीर्थयात्री मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, यह अवसंरचना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। कानूनी बाधाएं दूर होने के बाद अब परियोजना के निर्धारित समय-सीमा में पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता होगी। फरवरी 2024 में शुरू हुई इस परियोजना को दो वर्षों से अधिक समय में कानूनी अड़चनों ने धीमा रखा — यह पूर्वोत्तर में बड़े धार्मिक-पर्यटन अवसंरचना प्रकल्पों में आने वाली एक परिचित समस्या है। ₹498 करोड़ की इस पहल के लिए असली कसौटी यह होगी कि अंबुबाची मेले से पहले कितना काम ज़मीन पर दिखता है — क्योंकि लाखों तीर्थयात्रियों की भीड़ हर साल इस परिसर की क्षमता की सीमाओं को उजागर करती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां कामाख्या एक्सेस कॉरिडोर परियोजना क्या है?
यह गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर के आसपास के बुनियादी ढाँचे को उन्नत करने की ₹498 करोड़ की परियोजना है, जो फरवरी 2024 में शुरू हुई। इसे पीएम-देविन योजना के तहत लागू किया जा रहा है और यह पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मंदिर पुनर्निर्माण पहलों में से एक है।
कामाख्या कॉरिडोर परियोजना में क्या-क्या बदलाव होंगे?
परियोजना में तीन स्तरीय कॉरिडोर का निर्माण, पहुँच मार्गों की चौड़ाई 8-10 फीट से बढ़ाकर 27-30 फीट करना और मंदिर परिसर का खुला स्थान 3,000 वर्ग फीट से बढ़ाकर 1 लाख वर्ग फीट से अधिक करना शामिल है।
कामाख्या कॉरिडोर परियोजना को किन कानूनी बाधाओं का सामना करना पड़ा था?
नीलाचल पहाड़ी पर मंदिर की विरासत संरचनाओं और भूमिगत जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर याचिकाएं दायर की गई थीं। अब अधिकारियों के अनुसार अधिकांश कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं।
इस परियोजना से तीर्थयात्रियों को क्या फायदा होगा?
परियोजना पूरी होने पर मंदिर परिसर में भीड़भाड़ कम होगी और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम होगी। विशेष रूप से अंबुबाची मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
पीएम-देविन योजना क्या है?
पीएम-देविन (PM DEVINE) केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढाँचा विकास परियोजनाएं वित्त पोषित की जाती हैं। कामाख्या कॉरिडोर परियोजना इसी योजना के अंतर्गत कार्यान्वित हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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