1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकालेश्वर उज्जैन: भांग-चंदन से सजे बाबा महाकाल, रजत मुकुट-मुंडमाला में भस्म आरती के दर्शन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकालेश्वर उज्जैन: भांग-चंदन से सजे बाबा महाकाल, रजत मुकुट-मुंडमाला में भस्म आरती के दर्शन

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन कृष्ण पंचमी पर बाबा महाकाल को भांग-चंदन से सजाया गया, रजत मुकुट और मुंडमाला धारण कर उन्होंने साकार रूप में दर्शन दिए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म आरती की सदियों पुरानी परंपरा के साक्षी बनने हजारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 1 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग और चंदन से सजाया गया; बाबा ने रजत मुकुट और मुंडमाला धारण कर साकार दर्शन दिए।
जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक के बाद कपूर आरती तथा भस्म आरती का क्रमबद्ध अनुष्ठान हुआ।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात से ही दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध रहे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 1 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी पर गुरुवार की भोर में बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने की परंपरा और अभिषेक

तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और उसके बाद दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया, और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े तथा शंखनाद के मंगलमय वातावरण में भस्म आरती का आयोजन हुआ।

भांग-चंदन का दिव्य श्रृंगार

भस्म आरती से पूर्व भगवान महाकाल को भांग और चंदन से विशेष रूप से सजाया गया। तत्पश्चात बाबा ने रजत मुकुट और मुंडमाला धारण कर साकार स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसके बाद पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों से अनवरत चली आ रही है और देशभर के भक्तों को पावन नगरी उज्जैन की ओर आकर्षित करती है।

श्रद्धालुओं की आस्था और उमड़ी भीड़

गुरुवार की इस भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अपने आराध्य के दर्शन की लालसा में अनेक भक्त बुधवार रात से ही पंक्तिबद्ध हो गए थे। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से सुबह की बेला में एक अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया।

गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती देशभर में अपनी अनूठी धार्मिक महत्ता के लिए विख्यात है। आश्विन माह की कृष्ण पक्ष पंचमी पर यह दर्शन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और आस्था की अटूट निरंतरता का प्रतीक है। आश्विन माह की तिथियों पर यहाँ उमड़ने वाली भीड़ यह दर्शाती है कि डिजिटल युग में भी भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक जड़ें कितनी गहरी हैं। महानिर्वाणी अखाड़े की सदियों पुरानी परंपरा और मंदिर प्रशासन की व्यवस्था मिलकर इस अनुभव को अद्वितीय बनाती है — यह वह धरोहर है जिसे संरक्षित रखना उतना ही ज़रूरी है जितना श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन की सबसे प्रमुख और विशिष्ट पूजा है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म (राख) अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। यह परंपरा महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा सदियों से निभाई जा रही है।
1 अक्टूबर 2026 को महाकाल का श्रृंगार कैसे किया गया?
1 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी पर बाबा महाकाल को भांग और चंदन से सजाया गया। इसके बाद उन्होंने रजत मुकुट और मुंडमाला धारण कर साकार स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु कब से आते हैं?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रायः एक रात पहले से ही उज्जैन पहुँचकर कतारबद्ध हो जाते हैं। 1 अक्टूबर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त बुधवार रात से ही मंदिर परिसर के बाहर पंक्तिबद्ध थे।
महाकालेश्वर मंदिर में पूजा का क्रम क्या होता है?
पूजा का आरंभ भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर कपाट खोलने से होता है। इसके बाद जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पण, कपूर आरती और अंत में ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न होती है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्या महत्व है?
श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन में स्थित है। यहाँ की भस्म आरती अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले