क्या भारत ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को फिर से दोहराया गया।
- गहन परिचालन सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- आसियान केंद्रीयता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
- क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण है।
- संयुक्त अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाने पर सहमति।
नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने आतंकवाद के प्रति अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को पुनः दोहराया है। काउंटर टेररिज्म पर विशेषज्ञ कार्य समूह (ईडब्लूजी) की एक महत्वपूर्ण बैठक में भारत का यह रुख सामने आया। यह बैठक बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित की गई। यह बैठक 16वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के अंतर्गत हुई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया ने की। यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
भारत ने 16वीं एडीएमएम-प्लस आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह की बैठक में आतंकवाद के प्रति अपनी ‘शून्य टॉलरेंस’ नीति को फिर से स्पष्ट किया। इस अवसर पर भारत ने आसियान केंद्रीयता के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। साथ ही, बदलते, सीमा-रहित आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए गहन परिचालन सहयोग, क्षमता निर्माण, संयुक्त अभ्यास और प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद आज पारंपरिक सीमाओं से परे एक जटिल और बहुआयामी चुनौती बन चुका है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सदस्य देशों के बीच समयबद्ध सूचना साझा करना आवश्यक है। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच समन्वित कार्रवाई, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और संयुक्त प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हैं। यह विशेषज्ञ कार्यसमूह भारत और मलेशिया द्वारा संयुक्त रूप से सह-अध्यक्षता में आयोजित किया गया। भारत की ओर से मेजर जनरल कुलवीर सिंह, कमांडेंट, काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल, तथा मलेशिया की ओर से दातो मोहम्मद अमीर, अवर सचिव, मलेशिया रक्षा मंत्रालय, सह-अध्यक्ष रहे।
बता दें कि विभिन्न अवसरों पर यह स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद के उभरते स्वरूप जैसे साइबर स्पेस का दुरुपयोग, ड्रोन और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल और सीमा-पार नेटवर्क से प्रभावी ढंग से निपटने की आवश्यकता है। इसके लिए बहुपक्षीय ढांचे में विश्वास-निर्माण उपायों को मजबूत करना चाहिए। इसके साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका को और सशक्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। बैठक में प्रतिभागी देशों ने आतंकवाद-रोधी सहयोग को और प्रभावी बनाने, संयुक्त अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाने, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को विस्तार देने और नवीन प्रौद्योगिकियों के उपयोग के माध्यम से सामूहिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आसियान के 11 सदस्य देश शामिल हुए। बैठक में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड और तिमोर लेस्ते के प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही 7 संवाद साझेदार देश भी इसका हिस्सा हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, जापान, चीन, अमेरिका और रूस तथा आसियान सचिवालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यह वर्ष 2024 से 2027 के बीच चल रहे चक्र के अंतर्गत तीसरी बैठक है।
दरअसल, एडीएमएम-प्लस भागीदार देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच व्यावहारिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। वर्तमान में यह मंच सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, शांति स्थापना अभियान, सैन्य चिकित्सा, मानवीय खदान कार्रवाई तथा साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग को सुगम बनाने के लिए विशेषज्ञ कार्य समूह का गठन किया गया है।