प्रधानमंत्री मोदी ने असम के सिलचर में 24 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट का भूमि पूजन किया, बराक वैली बनेगा व्यापार केंद्र
सारांश
Key Takeaways
- शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन भारत के पहले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण है।
- यह प्रोजेक्ट बराक वैली को एक बड़ा ट्रेड हब बनाने में सहायक होगा।
- किसानों और चाय बागानों से जुड़े परिवारों को जमीन का अधिकार दिया गया है।
- यह क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा और रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
- बराक वैली का विकास एक नई आर्थिक दिशा में ले जाएगा।
सिलचर, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम के सिलचर में शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया, जो उत्तर-पूर्वी भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड चार-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर है। उन्होंने कैपिटल पॉइंट के पास ट्रंक रोड से सिलचर के रंगिरखारी पॉइंट तक एनएच-306 पर बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर (चरण-1) का भूमि पूजन भी किया। इसके अलावा, करीमगंज जिले के पथारकंडी में एक नए कृषि महाविद्यालय की आधारशिला रखी गई।
सिलचर में अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि बराक वैली और उत्तर-पूर्व की कनेक्टिविटी से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। चाहे वह सड़क हो, रेल हो, या कृषि महाविद्यालय, इन सभी प्रोजेक्ट्स से बराक वैली नॉर्थ-ईस्ट का एक प्रमुख लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनने जा रहा है। इससे यहां के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनगिनत अवसर उपलब्ध होंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि सिलचर को बराक घाटी का 'गेटवे' कहा जाता है। यह क्षेत्र इतिहास, संस्कृति और उद्यमिता का संगम है और इसकी एक विशिष्ट पहचान है। यहां के लोग बंगाली, असमिया और अन्य जनजातीय भाषाएं बोलते हैं, और इसी विविधता के साथ आप इस क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। यही बराक घाटी की ताकत है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार स्थिति को बदलने में लगातार प्रयासरत है। हम बराक घाटी को व्यापार और कारोबार का एक बड़ा हब बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आज करीब 24 हजार करोड़ रुपए के शिलांग-सिलचर हाईस्पीड कॉरिडोर का भूमिपूजन हुआ है।
उन्होंने आगे कहा, "यह केवल एक हाईवे प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पूर्व के दशकों पुराने इंतजार का अंत है। इस कॉरिडोर के माध्यम से सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा के क्षेत्र आपस में जुड़े जाएंगे। इन तीनों राज्यों के आगे बांग्लादेश और म्यांमार हैं, और फिर दक्षिण-पूर्व एशिया का विशाल बाजार है। इस प्रकार, बराक घाटी आज एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ने का शिलान्यास कर रही है।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां बड़ी संख्या में चाय बागानों में काम करने वाले लोग हैं। असम सरकार ने चाय बागानों से जुड़े हजारों परिवारों को उनकी जमीन का अधिकार देने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यह इन परिवारों के भविष्य को बदलने की एक बड़ी शुरुआत है। जमीन के पट्टे मिलने से इन परिवारों को सुरक्षा मिली है और उन्हें सम्मान की ज़िंदगी जीने का अवसर प्राप्त हुआ है।
असम सरकार को बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आपने चाय बागानों में कई पीढ़ियों के संघर्ष को सम्मान दिया है, जो करीब 200 सालों से सेवा दे रहे हैं।