भरत तिवारी परिवार ने ₹50 लाख वाले प्रशांत किशोर के दावे को नकारा, 15 दिन में मानहानि केस की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भोजपुर में भरत तिवारी की माँ आशा देवी और भाई चंदन तिवारी ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि परिवार को सरकारी सहायता के रूप में ₹50 लाख मिल चुके हैं। परिवार ने 6 अगस्त को स्पष्ट किया कि यदि 15 दिनों के भीतर इस आरोप का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया, तो वे प्रशांत किशोर के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
आशा देवी का बयान: 'झूठी बातें फैलाई जा रही हैं'
आशा देवी ने कहा कि उनके परिवार के बारे में बेबुनियाद बातें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मेरा बेटा आज जीवित होता तो किसी की हिम्मत नहीं होती कि इस तरह के आरोप लगाए जाएं।' उन्होंने माँग की कि 15 दिनों के भीतर जाँच कर ली जाए कि परिवार को ₹50 लाख मिले हैं या नहीं — और यदि प्रशांत किशोर का दावा झूठ साबित हुआ तो वह मानहानि का मुकदमा करेंगी।
आशा देवी ने यह भी दावा किया कि उनके बेटे को पहले ₹4 करोड़ की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने स्वयं अस्वीकार कर दिया था। उनके अनुसार, जब ₹4 करोड़ नहीं लिए गए तो ₹50 लाख लेने का सवाल ही नहीं उठता।
प्रशांत किशोर की चुनौती पर परिवार की प्रतिक्रिया
प्रशांत किशोर ने सांसद मनोज तिवारी को एक महीने के भीतर परिवार को न्याय दिलाने की चुनौती दी थी। इस पर आशा देवी ने कहा कि प्रशांत किशोर पहले भी 15 दिन में न्याय दिलाने का वादा कर चुके थे, जो पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मनोज तिवारी ने परिवार का साथ दिया है और उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी भरोसा है कि न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की मौत पर राजनीति की गई और फोटो खिंचवाकर राजनीतिक लाभ उठाया गया।
चंदन तिवारी का पक्ष: 'बिना प्रमाण के आरोप अपमानजनक'
चंदन तिवारी ने कहा कि सरकार जब भी किसी को आर्थिक सहायता देती है, तो वह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कैमरे के सामने चेक देकर दी जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ₹3 करोड़ मिलने की बात कह रहे हैं तो कुछ ₹50 लाख का दावा कर रहे हैं, लेकिन इनमें कोई सच्चाई नहीं है। उनके अनुसार, जब भरत तिवारी जीवित थे तब भी ₹4 करोड़ की सहायता की पेशकश को परिवार ने ठुकरा दिया था।
चंदन तिवारी ने कहा कि उनका परिवार किसी की राजनीतिक लड़ाई में हस्तक्षेप नहीं कर रहा, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उनके भाई की शहादत को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशांत किशोर से अपील की कि वह एक पढ़े-लिखे व्यक्ति होने के नाते परिवार को बदनाम न करें।
आगे क्या होगा
परिवार ने स्पष्ट किया है कि 15 दिनों की समयसीमा के भीतर यदि प्रशांत किशोर प्रमाण नहीं दे पाए तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। चंदन तिवारी ने विश्वास जताया कि एक दिन सच्चाई सबके सामने आएगी और न्याय की प्रक्रिया जारी रहेगी। यह विवाद बिहार की राजनीति में एक नई कानूनी और सार्वजनिक टकराव की दिशा ले सकता है।