डी. रामानायडू: 13 भाषाओं में 150+ फिल्में, गिनीज रिकॉर्ड धारक भारतीय सिनेमा के महानायक
सारांश
मुख्य बातें
दग्गुबाती रामानायडू — जिन्हें भारतीय सिनेमा जगत डी. रामानायडू के नाम से जानता है — ने अपने करियर में 13 भाषाओं में 150 से अधिक फिल्मों का निर्माण कर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो आज भी अटूट है। उनका यह रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है और उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वाधिक बहुभाषी निर्माताओं में अग्रणी स्थान दिलाता है।
साधारण शुरुआत से असाधारण यात्रा
रामानायडू का जन्म 6 जून 1936 को आंध्र प्रदेश के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गाँव के स्कूल में पूरी करने के बाद उन्होंने चेन्नई के प्रेजिडेंसी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव थिएटर और अभिनय की ओर हो गया था। स्नातक के बाद परिवार के चावल मिल और परिवहन व्यवसाय में हाथ बँटाया, लेकिन सिनेमा का आकर्षण उन्हें वहाँ टिकने नहीं देता था।
निर्णायक मोड़ तब आया जब उनके गाँव के निकट एक प्रोडक्शन कंपनी स्थापित हुई। रामानायडू ने अपने पिता को उसमें निवेश के लिए राजी किया और फिल्म सेट की बारीकियाँ सीखने लगे। 1958 में उनके पिता ने 'नम्मिना बंटू' फिल्म बनाई, जिसमें उस युग के दिग्गज अभिनेता अक्किनेनी नागेश्वर राव मुख्य भूमिका में थे। इसी फिल्म ने रामानायडू को मद्रास की राह दिखाई।
सुरेश प्रोडक्शंस और पहली बड़ी सफलता
1963 में दोस्तों के सहयोग से बनाई फिल्म 'अनुरागम' की सफलता ने उनकी पहचान को नई धार दी। इसके बाद उन्होंने अपने प्रतिष्ठित बैनर सुरेश प्रोडक्शंस की नींव रखी, जो कालांतर में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउसों में गिना जाने लगा। 1971 में आई फिल्म 'प्रेम नगर' ने जबरदस्त व्यावसायिक सफलता अर्जित की और बाद में इसे हिंदी तथा तमिल में भी बनाया गया।
1983 में उन्होंने हैदराबाद में एक अत्याधुनिक फिल्म स्टूडियो की स्थापना की — एक ऐसे समय में जब अधिकांश स्टूडियो मद्रास में केंद्रित थे। उनके इस दूरदर्शी कदम ने हैदराबाद को भारतीय फिल्म निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
13 भाषाएँ, एक अनूठी दृष्टि
रामानायडू की कार्यशैली समकालीन निर्माताओं से बिल्कुल भिन्न थी। जब अन्य निर्माता डबिंग के माध्यम से विभिन्न भाषाओं तक पहुँचते थे, वे हर भाषा के दर्शकों के लिए स्वतंत्र फिल्म बनाते थे — स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और निर्देशकों के साथ, ताकि फिल्म उस क्षेत्र की संस्कृति और भावनाओं के अनुकूल हो। उल्लेखनीय है कि उन्हें स्वयं उन सभी भाषाओं का ज्ञान नहीं था जिनमें उन्होंने फिल्में बनाईं।
उनकी फिल्मोग्राफी में तेलुगु, तमिल, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, उड़िया, गुजराती, भोजपुरी, असमिया और पंजाबी समेत 13 भाषाएँ शामिल हैं। हिंदी सिनेमा में उनकी उल्लेखनीय प्रस्तुतियों में 'तोहफा', 'दिलदार', 'हम आपके दिल में रहते हैं', 'आगाज़' और 'अनाड़ी' जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने श्रीदेवी, अनिल कपूर, काजोल, करिश्मा कपूर और सुनील शेट्टी जैसे शीर्ष सितारों के साथ काम किया।
सम्मान और विरासत
रामानायडू के अप्रतिम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा। इसके अतिरिक्त उन्हें दो राष्ट्रीय पुरस्कार और अनेक राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुए।
अपने करियर में उन्होंने 11 अभिनेत्रियों, 4 अभिनेताओं, 23 निर्देशकों और 4 संगीत निर्देशकों को फिल्म उद्योग में स्थापित किया। 18 फरवरी 2015 को प्रोस्टेट कैंसर के कारण 78 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी विरासत आज भी सुरेश प्रोडक्शंस के बैनर तले जीवित है और भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है।