भट्टी विक्रमार्क का केंद्र से सवाल: वोट की निष्पक्षता और विदेश में IT पेशेवरों की सुरक्षा पर जवाब दो
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 9 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से दो बड़े सवालों का जवाब माँगा — एक, नागरिकों के मत की निष्पक्षता की रक्षा कौन करेगा; और दो, अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्रमाणन संकट से जूझ रहे भारतीय आईटी पेशेवरों के हितों के लिए कौन आवाज़ उठाएगा। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने इन्हें 'विश्वास के दो अलग-अलग संकट' बताया।
दो संकट, एक साझा सवाल
भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि देश के भीतर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कथित 'वोट चोरी' और चुनावी पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर दोनों नेताओं को हिरासत का सामना करना पड़ा।
इसके साथ ही, उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो समेत कई प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रमाणन से जुड़े एक अहम कार्यक्रम से निलंबित किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, यह निलंबन विदेशों में कार्यरत हजारों भारतीय पेशेवरों की आजीविका और भविष्य को सीधे प्रभावित करता है।
राजघाट पर विरोध प्रदर्शन में भागीदारी
भट्टी विक्रमार्क इससे एक दिन पहले, गुरुवार 8 अक्टूबर को, नई दिल्ली के राजघाट पर कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इस प्रदर्शन में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी उपस्थित थे।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं की जाँच और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा था। महात्मा गांधी की समाधि पर खड़े होकर उपमुख्यमंत्री ने लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया।
उपमुख्यमंत्री के प्रमुख उद्धरण
एक्स पर पोस्ट में भट्टी विक्रमार्क ने लिखा, 'राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कथित वोट चोरी और चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग करते हुए उन्हें हिरासत का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रमाणन से जुड़े एक अहम कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।'
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा कि संविधान उनका मार्गदर्शक है और जनता का वोट उसकी ताकत — दोनों की रक्षा करना उनका अडिग संकल्प है।
आम जनता और पेशेवरों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियाँ भारतीय आईटी क्षेत्र पर दबाव बढ़ा रही हैं। ग्रीन कार्ड प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबन का सीधा असर उन हजारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों पर पड़ता है जो अमेरिका में स्थायी निवास की प्रक्रिया में हैं।
गौरतलब है कि विपक्ष लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता रहा है। एसआईआर विवाद उस बहस को नई धार दे रहा है। आलोचकों का कहना है कि इन दोनों मुद्दों — घरेलू चुनावी पारदर्शिता और विदेश में भारतीयों की सुरक्षा — पर केंद्र की चुप्पी चिंताजनक है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की माँग है कि केंद्र सरकार संसद में इन दोनों मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखे। चुनाव आयोग और विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक इस मुद्दे को संसद के अगले सत्र तक जीवित रख पाते हैं।