भोपाल में BJP का कांग्रेस दफ्तर घेराव: काले कपड़ों में खंडेलवाल के नेतृत्व में प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 22 जुलाई को काले कपड़े पहनकर सड़कों पर उतरते हुए कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने का प्रयास किया। यह प्रदर्शन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के निकट दिए गए धरने के विरोध में आयोजित किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
BJP प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता रेड क्रॉस चौराहे पर एकत्रित हुए। सभी नेता और कार्यकर्ता काले वस्त्र धारण किए हुए थे और हाथों में नारे लिखी तख्तियाँ थामे हुए थे। रेड क्रॉस चौराहे से कार्यकर्ता कांग्रेस दफ्तर की दिशा में आगे बढ़े, किंतु पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण वे कार्यालय तक नहीं पहुँच सके।
BJP की प्रतिक्रिया
प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कांग्रेस पर संविधान-विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार संविधान की अवमानना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'चुनाव में हार मिलती है तो कांग्रेस पिछले दरवाजे से अराजकता फैलाने का काम करती है।' खंडेलवाल ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं।
खंडेलवाल ने आगे कहा कि जो दल चुनावी प्रक्रिया में सफल नहीं होता, वह लोकतंत्र को दबाने और अराजकता का मार्ग अपनाने की कोशिश करता है। BJP ने इस प्रदर्शन को कांग्रेस की 'संविधान-विरोधी गतिविधि' के विरुद्ध अपनी आवाज़ बताया।
कांग्रेस का जवाब
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस दफ्तर के बाहर कांग्रेस नेता हाथों में फूल लिए खड़े थे और BJP कार्यकर्ताओं का प्रतीकात्मक स्वागत कर रहे थे। यह कदम BJP के प्रदर्शन को हल्के में लेने का संकेत माना जा रहा है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने की घटना ने देशभर में BJP और कांग्रेस के बीच प्रतिक्रिया-प्रतिप्रतिक्रिया का दौर शुरू किया है। मध्य प्रदेश में BJP सत्ता में है और यह प्रदर्शन राज्य में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।
आगे की स्थिति
पुलिस बैरिकेडिंग के बाद प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ। फिलहाल किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह वाकयुद्ध और तेज़ हो सकता है।