भोपाल में CGST अधीक्षक ₹2 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार, घर से ₹72.50 लाख नकद बरामद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 11 अक्टूबर 2026 को भोपाल में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्तालय, भोपाल के प्रिवेंटिव ब्रांच (मुख्यालय) में तैनात अधीक्षक राजेश कुमार को ₹2 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद भोपाल और कानपुर स्थित उनके आवासों पर की गई तलाशी में ₹72.50 लाख नकद और अचल संपत्ति के दस्तावेज़ बरामद हुए।
मामला कैसे सामने आया
CBI के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को आरोपी अधीक्षक के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि राजेश कुमार ने भोपाल स्थित एक स्क्रैप कारोबारी फर्म के मालिक से प्रति माह ₹2 लाख की अवैध राशि की माँग की थी। इसके बदले उसने स्क्रैप सामग्री ले जाने वाले वाहनों को नहीं रोकने और व्यापारी के कारोबार में बाधा न डालने का आश्वासन दिया था।
शिकायत मिलने पर CBI ने सावधानीपूर्वक जाल बिछाया और आरोपी अधिकारी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
तलाशी में क्या मिला
गिरफ्तारी के तुरंत बाद CBI की टीमों ने आरोपी के भोपाल और कानपुर स्थित दोनों आवासों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान ₹72.50 लाख नकद राशि बरामद की गई। इसके साथ ही अचल संपत्ति से जुड़े अनेक दस्तावेज़ भी जब्त किए गए, जिनकी जाँच अभी जारी है।
CGST में भ्रष्टाचार का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब CBI पहले ही 8 अक्टूबर 2026 को CGST के एक इंस्पेक्टर सहित चार लोगों को एक बड़े बैंक भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा गिरोह के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। वह गिरोह दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में पहचान छिपाकर परीक्षाओं और साक्षात्कारों में शामिल होने का नेटवर्क संचालित कर रहा था। गौरतलब है कि यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सिलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज FIR के बाद CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई ने की थी।
इस प्रकार महीने भर के भीतर CGST से जुड़े दो अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में CBI की कार्रवाई ने विभाग की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जाँच की स्थिति
CBI ने बताया कि बरामद नकदी, संपत्ति दस्तावेज़ों और अन्य साक्ष्यों की विधिवत जाँच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी की संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल और आय से अधिक संपत्ति के पहलू की भी जाँच हो सकती है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया गया है।