सीबीआई ने मुंबई में आयकर निरीक्षक को ₹15 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, तलाशी में ₹11 लाख नकद बरामद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 28 अक्टूबर 2026 को मुंबई के सिंधिया हाउस स्थित आयकर कार्यालय के 'जांच विंग' में तैनात एक आयकर निरीक्षक को ₹15 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई मुंबई के एक शिकायतकर्ता की लिखित शिकायत पर आधारित थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि निरीक्षक ने बेनामी संपत्ति से जुड़े एक लंबित मामले को बंद कराने के एवज में अवैध राशि की माँग की थी।
मामले का पूरा घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, आरोपी आयकर निरीक्षक ने शिकायतकर्ता से ₹20 लाख की रिश्वत माँगी थी। यह माँग आयकर विभाग की 'बेनामी निषेध इकाई' के पास लंबित शिकायतकर्ता की बेनामी संपत्ति से जुड़े मामले को बंद करवाने के लिए की गई थी। बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच ₹15 लाख की राशि पर सहमति बनी।
सीबीआई ने शिकायत की जाँच के बाद मंगलवार को आरोपी निरीक्षक और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया। इसके बाद एजेंसी ने एक सुनियोजित जाल बिछाया और निरीक्षक को शिकायतकर्ता से ₹15 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
तलाशी में बरामदगी
गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान ₹11 लाख नकद और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। एजेंसी के अनुसार, इन दस्तावेजों की जाँच की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
गिरफ्तार निरीक्षक को बुधवार को मुंबई की संबंधित अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 तक यानी दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
अहमदाबाद कोर्ट का फैसला: एक और रिश्वत मामले में सजा
इसी दिन रिश्वत से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया। अहमदाबाद की एक सीबीआई अदालत ने सतधारी लाल साहू को रिश्वत के एक पुराने मामले में दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया।
साहू उस समय राजस्थान के जयपुर स्थित झालाना डूंगरी में 'नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया' के रिकॉर्ड सेंटर में आर्काइविस्ट (अभिलेखापाल) के पद पर तैनात थे। सीबीआई ने 26 दिसंबर 2012 को मामला दर्ज किया था, जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि साहू ने सरकारी रिकॉर्ड की प्रतियाँ देने के बदले में अवैध रूप से धन की माँग की।
सीबीआई के अनुसार, साहू ने राजकोट के सर्वे से जुड़े पुराने सीआरओ रिकॉर्ड और ब्रिटिश काल के भूमि अभिलेखों की प्रतियाँ देने के लिए ₹15,000 की रिश्वत माँगी थी। जाल बिछाकर उसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया और उसी दिन गिरफ्तार किया गया। करीब 14 वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने सजा सुनाई है।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की सक्रियता बढ़ी है। 'बेनामी निषेध इकाई' जैसी विशेष एजेंसियों के अधिकारियों पर ही रिश्वत के आरोप न केवल विभाग की साख पर सवाल उठाते हैं, बल्कि आम करदाताओं के विश्वास को भी चोट पहुँचाते हैं।
सीबीआई की ओर से दोनों मामलों में आगे की जाँच जारी है। मुंबई मामले में अज्ञात व्यक्तियों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने के प्रयास चल रहे हैं।