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बिहार में नशे का बढ़ता जाल: RJD सांसद मनोज झा ने गृह मंत्री अमित शाह से माँगा विशेष ध्यान

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बिहार में नशे का बढ़ता जाल: RJD सांसद मनोज झा ने गृह मंत्री अमित शाह से माँगा विशेष ध्यान

सारांश

शराबबंदी के बावजूद बिहार में 'सूखे नशे' का जाल फैलता जा रहा है। RJD सांसद मनोज झा ने गृह मंत्री अमित शाह को सोशल मीडिया पर टैग कर चेताया — अगली पीढ़ी दाँव पर है, और सरकार का नियंत्रण लगभग नदारद।

मुख्य बातें

RJD सांसद मनोज कुमार झा ने 22 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह से बिहार में नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
झा ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद 'सूखे नशे' का कारोबार बेकाबू हो चुका है और एक पूरी पीढ़ी इससे प्रभावित हो रही है।
उन्होंने गृह मंत्री को सोशल मीडिया पर टैग कर माँग की कि पंजाब की तरह बिहार पर भी नज़र डाली जाए।
शाह के 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य पर सवाल उठाते हुए झा ने कहा कि सरकारी आँकड़ों में 2047 तक की अलग-अलग समयसीमाएँ भी बताई गई हैं, जो भ्रम पैदा करती हैं।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव प्रचार समाप्त; तेजस्वी यादव ने वीडियो संदेश जारी किया।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बिहार में नशीले पदार्थों की बढ़ती तस्करी पर विशेष ध्यान देने की अपील की। झा ने चेतावनी दी कि यदि इस पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ इसकी सबसे बड़ी शिकार बनेंगी।

मुख्य घटनाक्रम

कोटा ड्रग मामले के बाद बिहार में नशीले पदार्थों के फैलते कारोबार की ओर ध्यान दिलाते हुए मनोज कुमार झा ने कहा कि एक प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार ने सबूतों और आँकड़ों के साथ इस पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। उन्होंने कहा, 'नशे के चलते एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गई है। जब सरकार का कोई नियंत्रण न हो, तो ऐसा ही होता है।' उनके अनुसार, राज्य में हालात 'पूरी तरह बेकाबू' हो चुके हैं और इसके कारण हत्या तथा बलात्कार की घटनाओं में भी वृद्धि हो सकती है।

गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद नशीले पदार्थों की तस्करी में कमी नहीं आई है — बल्कि 'सूखे नशे' का प्रचलन तेज़ी से बढ़ा है।

सरकार से अपील

मनोज झा ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए लिखा है कि 'पंजाब सही है, लेकिन मेरे बिहार पर भी नज़र डालिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह माँग किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि इसलिए है क्योंकि यह मुद्दा सीधे युवाओं और समाज की भलाई से जुड़ा है।

झा ने यह भी कहा कि अगली पीढ़ी तक इस समस्या को पहुँचने से रोकने के लिए समाज के हर वर्ग को सामूहिक रूप से विचार करना होगा।

2029 बनाम 2047 — 'नशा मुक्त भारत' के लक्ष्य पर सवाल

गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने के बयान पर टिप्पणी करते हुए मनोज कुमार झा ने कहा कि शाह को स्पष्ट करना चाहिए कि यह लक्ष्य केवल पंजाब के लिए है या पूरे देश के लिए, क्योंकि सरकारी आँकड़ों में अलग-अलग समयसीमाएँ बताई गई हैं — जिनमें से कुछ 2047 तक की हैं।

झा ने तर्क दिया, 'आज से 2047 तक 21 साल हैं। इस तरह की दीर्घकालिक गणना से कोई भी देश किसी संकट से नहीं उबर सकता। गृह मंत्री की ज़िम्मेदारी है कि देश का हर नागरिक उन पर भरोसा करे, लेकिन अब उस भरोसे में कमी आई है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार केंद्र सरकार की नशा-निरोधक नीतियों की धीमी प्रगति पर सवाल उठा रहा है।

बिहार विधान परिषद चुनाव पर रुख

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर आगामी चुनाव के बारे में मनोज कुमार झा ने कहा कि प्रचार का चरण समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव ने एक वीडियो संदेश के ज़रिए मतदाताओं से अपील की है।

झा ने उम्मीद जताई कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पारंपरिक विपक्ष की मज़बूत उपस्थिति सरकार को नीतिगत बदलाव लाने पर मजबूर करेगी।

आगे क्या

मनोज झा की इस अपील के बाद देखना होगा कि गृह मंत्रालय बिहार में नशा-तस्करी पर कोई विशेष अभियान या समीक्षा बैठक बुलाता है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि शराबबंदी के बावजूद 'सूखे नशे' की समस्या के लिए बहु-आयामी नीति और ज़िला स्तर पर ठोस प्रवर्तन ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'सूखे नशे' की समस्या चुपचाप और गहरी होती रही। गृह मंत्री का '2029 नशामुक्त भारत' का नारा और उसी सरकार के दस्तावेज़ों में '2047 के लक्ष्य' — यह अंतर्विरोध नीति की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। असली चिंता यह है कि बिहार में ज़िला-स्तरीय प्रवर्तन तंत्र कमज़ोर है और राज्य सरकार के पास उसे मज़बूत करने की इच्छाशक्ति का प्रमाण कम दिखता है। जब तक नशा-निरोध के लिए सत्यापन योग्य, समयबद्ध लक्ष्य और जवाबदेह तंत्र नहीं बनता, ये बयान महज़ सुर्खियाँ बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने गृह मंत्री अमित शाह से क्या माँग की?
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने गृह मंत्री अमित शाह से बिहार में बढ़ती नशीले पदार्थों की तस्करी पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने शाह को सोशल मीडिया पर टैग कर कहा कि पंजाब की तरह बिहार की समस्या को भी गंभीरता से लिया जाए।
बिहार में शराबबंदी के बावजूद नशे की समस्या क्यों बढ़ रही है?
कथित तौर पर शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में 'सूखे नशे' — यानी अफीम, हेरोइन व अन्य मादक पदार्थों — का प्रचलन तेज़ी से बढ़ा है। मनोज झा के अनुसार राज्य में सरकारी नियंत्रण कमज़ोर पड़ चुका है, जिससे तस्करों को खुला मैदान मिल रहा है।
गृह मंत्री के '2029 नशामुक्त भारत' लक्ष्य पर क्या विवाद है?
मनोज कुमार झा ने सवाल उठाया कि अमित शाह का '2029 तक नशामुक्त भारत' का बयान क्या केवल पंजाब के लिए है या पूरे देश के लिए, क्योंकि सरकारी दस्तावेज़ों में कुछ लक्ष्य 2047 तक के बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पष्टता से नागरिकों का भरोसा कमज़ोर होता है।
बिहार विधान परिषद चुनाव में विपक्ष की क्या स्थिति है?
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है। RJD नेता तेजस्वी यादव ने वीडियो संदेश के ज़रिए मतदाताओं से अपील की है। मनोज झा को उम्मीद है कि स्नातक और शिक्षक सीटों पर विपक्ष की मज़बूत उपस्थिति सरकार को नीतिगत बदलाव के लिए मजबूर करेगी।
बिहार में नशे की समस्या से किसे सबसे ज़्यादा नुकसान?
मनोज झा के अनुसार, युवा पीढ़ी इस संकट की सबसे बड़ी शिकार है। उन्होंने चेताया कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर अगली पीढ़ी तक पहुँचेगा और हत्या व बलात्कार जैसी सामाजिक समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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