8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पटना में पशुपालन विभाग का लिपिक ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार, जीपीएफ भुगतान में मांग रहा था पैसा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पटना में पशुपालन विभाग का लिपिक ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार, जीपीएफ भुगतान में मांग रहा था पैसा

सारांश

बिहार में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान जारी है — निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 2026 में 108वाँ ट्रैप केस दर्ज करते हुए पशुपालन विभाग के लिपिक को ₹20,000 रिश्वत लेते दबोचा। जीपीएफ की ₹6 लाख राशि जारी करने के लिए आम नागरिक से पैसे माँगे जा रहे थे।

मुख्य बातें

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में विजय कुमार को ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
आरोपी अवर प्रमंडल पशुपालन कार्यालय, दानापुर में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर कार्यरत था।
शिकायतकर्ता राजेंद्र प्रसाद की ₹6 लाख की जीपीएफ राशि जारी करने के बदले रिश्वत माँगी जा रही थी।
ऑपरेशन का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी ने किया; गिरफ्तारी एम्स गोलंबर के पास पान दुकान से हुई।
2026 में यह 108वाँ ट्रैप मामला; अब तक ₹38 लाख 8 हजार 800 रुपये रिश्वत राशि बरामद।
2025 में 101 ट्रैप मामले और ₹37 लाख 80 हजार 300 रुपये बरामद हुए थे।

बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में एक सरकारी लिपिक को ₹20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा। गिरफ्तार आरोपी विजय कुमार अवर प्रमंडल पशुपालन कार्यालय, दानापुर में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर तैनात था और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की ₹6 लाख की राशि जारी करने के बदले रिश्वत की माँग कर रहा था।

मामले का पूरा घटनाक्रम

पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र के निसरपुरा निवासी राजेंद्र प्रसाद ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जीपीएफ की ₹6 लाख की राशि का भुगतान करने के एवज में आरोपी लिपिक रिश्वत की माँग कर रहा है।

शिकायत मिलते ही ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत माँग की पुष्टि हुई। इसके बाद निगरानी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

ऑपरेशन की रणनीति और गिरफ्तारी

अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक जहाँगीर अंसारी के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया। टीम ने योजनाबद्ध ढंग से जाल बिछाया और विजय कुमार को पटना स्थित एम्स गोलंबर के निकट एक पान दुकान पर ₹20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ जारी है। ब्यूरो अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ पूरी होने पर उसे निगरानी के विशेष न्यायालय, पटना में प्रस्तुत किया जाएगा।

2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का रिकॉर्ड

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 118वीं प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक मामला अन्य जिले से स्थानांतरित होने के बाद ब्यूरो कुल 119 मामलों की जाँच कर रहा है, जिनमें ट्रैप से संबंधित यह 108वाँ मामला है।

इन ट्रैप मामलों में अब तक 108 अभियुक्त रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। 2026 में कुल ₹38 लाख 8 हजार 800 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है। इसके साथ ही ₹37 हजार मूल्य की एक नई वाशिंग मशीन भी बरामद हुई है।

पिछले वर्ष से तुलना

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में निगरानी ब्यूरो ने कुल 101 ट्रैप मामले दर्ज किए थे और ₹37 लाख 80 हजार 300 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की थी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान तेज़ हुआ है और 2026 में ट्रैप मामलों की संख्या पिछले वर्ष से पहले ही आगे निकल चुकी है।

मामले में आगे की जाँच जारी है और ब्यूरो यह पता लगा रहा है कि क्या इस मामले में और लोग भी संलिप्त हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपनी ही जीपीएफ राशि पाने के लिए रिश्वत देनी पड़े — यह सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाता है। बिहार निगरानी ब्यूरो का 2026 में 108 ट्रैप केस दर्ज करना उत्साहजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि गिरफ्तारियों के बाद दोषसिद्धि दर कितनी है और क्या यह अभियान केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित है। संरचनागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए डिजिटल जीपीएफ भुगतान प्रणाली जैसे सुधार अधिक प्रभावी होंगे, जो बिचौलियों की जरूरत ही खत्म कर दें।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में पशुपालन विभाग के लिपिक को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
लिपिक विजय कुमार को ₹20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। वह शिकायतकर्ता राजेंद्र प्रसाद की ₹6 लाख की जीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) राशि जारी करने के एवज में यह रिश्वत माँग रहा था।
बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने यह गिरफ्तारी कैसे की?
शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने सत्यापन कराया और रिश्वत माँग की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया और पटना के एम्स गोलंबर के पास एक पान दुकान पर जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा गया।
2026 में बिहार निगरानी ब्यूरो ने कितने भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं?
8 अक्टूबर 2026 तक ब्यूरो ने 2026 में 118 प्राथमिकियाँ दर्ज की हैं और 119 मामलों की जाँच चल रही है। ट्रैप मामलों में यह 108वाँ केस है और अब तक ₹38 लाख 8 हजार 800 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है।
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी?
विजय कुमार से पूछताछ जारी है। ब्यूरो अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ पूरी होने के बाद उसे निगरानी के विशेष न्यायालय, पटना में प्रस्तुत किया जाएगा और आगे की जाँच जारी रहेगी।
2025 की तुलना में 2026 में बिहार में ट्रैप केस कितने बढ़े हैं?
वर्ष 2025 में 101 ट्रैप मामले दर्ज हुए थे और ₹37 लाख 80 हजार 300 रुपये की रिश्वत बरामद हुई थी। 2026 में अक्टूबर तक ही 108 ट्रैप केस और ₹38 लाख 8 हजार 800 रुपये बरामद हो चुके हैं, जो पिछले पूरे साल के आँकड़े से अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले