पटना में पशुपालन विभाग का लिपिक ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार, जीपीएफ भुगतान में मांग रहा था पैसा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 8 अक्टूबर 2026 को पटना में एक सरकारी लिपिक को ₹20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा। गिरफ्तार आरोपी विजय कुमार अवर प्रमंडल पशुपालन कार्यालय, दानापुर में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर तैनात था और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की ₹6 लाख की राशि जारी करने के बदले रिश्वत की माँग कर रहा था।
मामले का पूरा घटनाक्रम
पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र के निसरपुरा निवासी राजेंद्र प्रसाद ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जीपीएफ की ₹6 लाख की राशि का भुगतान करने के एवज में आरोपी लिपिक रिश्वत की माँग कर रहा है।
शिकायत मिलते ही ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत माँग की पुष्टि हुई। इसके बाद निगरानी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
ऑपरेशन की रणनीति और गिरफ्तारी
अनुसंधानकर्ता पुलिस निरीक्षक जहाँगीर अंसारी के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया। टीम ने योजनाबद्ध ढंग से जाल बिछाया और विजय कुमार को पटना स्थित एम्स गोलंबर के निकट एक पान दुकान पर ₹20,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ जारी है। ब्यूरो अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ पूरी होने पर उसे निगरानी के विशेष न्यायालय, पटना में प्रस्तुत किया जाएगा।
2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का रिकॉर्ड
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 118वीं प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक मामला अन्य जिले से स्थानांतरित होने के बाद ब्यूरो कुल 119 मामलों की जाँच कर रहा है, जिनमें ट्रैप से संबंधित यह 108वाँ मामला है।
इन ट्रैप मामलों में अब तक 108 अभियुक्त रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। 2026 में कुल ₹38 लाख 8 हजार 800 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है। इसके साथ ही ₹37 हजार मूल्य की एक नई वाशिंग मशीन भी बरामद हुई है।
पिछले वर्ष से तुलना
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में निगरानी ब्यूरो ने कुल 101 ट्रैप मामले दर्ज किए थे और ₹37 लाख 80 हजार 300 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की थी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान तेज़ हुआ है और 2026 में ट्रैप मामलों की संख्या पिछले वर्ष से पहले ही आगे निकल चुकी है।
मामले में आगे की जाँच जारी है और ब्यूरो यह पता लगा रहा है कि क्या इस मामले में और लोग भी संलिप्त हैं।