19 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ओडिशा: ₹65.90 लाख के गबन में वन विभाग का वरिष्ठ लिपिक और दो सहयोगी गिरफ्तार, 10 साल की धोखाधड़ी उजागर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ओडिशा: ₹65.90 लाख के गबन में वन विभाग का वरिष्ठ लिपिक और दो सहयोगी गिरफ्तार, 10 साल की धोखाधड़ी उजागर

सारांश

ओडिशा के ढेंकनाल में वन विभाग के एक वरिष्ठ लिपिक ने दस साल तक फर्जी वेतन, पेंशन और TA दावों के ज़रिए ₹65.90 लाख सरकारी धन अपने परिवार और सहयोगियों के खातों में डाले। तकनीकी निगरानी से पकड़े गए तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया।

मुख्य बातें

ओडिशा सतर्कता विभाग ने 18 अक्टूबर 2026 को ढेंकनाल के DFO कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक सुजीत कुमार जेना और दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया।
कथित गबन की राशि ₹65.90 लाख से अधिक; धोखाधड़ी 2016 से 2026 तक — एक दशक चली।
जेना की माँ के खाते में ₹8,72,520 , बेहरा के खाते में ₹10,48,866 और स्वैन के खाते में ₹8,86,193 स्थानांतरित किए गए।
फर्जी दावों में बर्खास्त कर्मचारियों का वेतन, अनंतिम पेंशन और यात्रा भत्ते शामिल थे।
कटक सतर्कता थाने में BNS और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला संख्या 40/26 दर्ज।
तीनों आरोपी ढेंकनाल के सतर्कता विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किए गए।

ओडिशा सतर्कता विभाग ने 18 अक्टूबर 2026 को ढेंकनाल जिले के मंडलीय वन अधिकारी (DFO) कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक सुजीत कुमार जेना और उसके दो सहयोगियों को ₹65.90 लाख के सरकारी धन के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार यह धोखाधड़ी वर्ष 2016 से 2026 के बीच — यानी एक दशक तक — बेरोकटोक जारी रही।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार है: सुजीत कुमार जेना, जो ढेंकनाल स्थित DFO कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात थे; सौम्य रंजन बेहरा, सदर रेंज के हाथी दस्ते में तैनात वन विभाग कर्मचारी; और रश्मि रंजन स्वैन, जेना के करीबी सहयोगी। सतर्कता विभाग ने इनकी गिरफ्तारी को इस मामले में बड़ी सफलता बताया है।

गबन का तरीका: कैसे हुई धोखाधड़ी

आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्य आरोपी जेना ने अपने प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन को अपने, अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किया। कथित रूप से बर्खास्त और फरार कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान, अनंतिम पेंशन, स्थापना-संबंधी वेतन, आकस्मिक खर्च, कर्मचारियों के बकाया वेतन और यात्रा भत्ते (TA) के फर्जी दावों के जरिए धन का हस्तांतरण किया गया।

जांच में सामने आया कि ₹8,72,520 जेना की माँ के बैंक खाते में, ₹10,48,866 सौम्य रंजन बेहरा के खाते में, और ₹8,86,193 रश्मि रंजन स्वैन के खाते में स्थानांतरित किए गए।

कैसे पकड़े गए आरोपी

मामले का खुलासा होने के बाद तीनों आरोपी लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचते रहे। सतर्कता विभाग ने बताया कि तकनीकी खुफिया जानकारी और मोबाइल लोकेशन की निगरानी के जरिए उनकी गतिविधियों का पता लगाया गया, जिसके बाद उन्हें पकड़ा जा सका। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान तेज किए गए हैं।

कानूनी कार्रवाई

इस मामले में कटक सतर्कता थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला संख्या 40/26 दर्ज किया गया है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 18 अक्टूबर को ढेंकनाल स्थित सतर्कता मामलों के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला एक दशक लंबी कथित वित्तीय अनियमितता को उजागर करता है, जिसमें कार्यालय के भीतर सुनियोजित सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार आगे की जांच में अन्य संभावित सहयोगियों और धन के ठिकाने का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। न्यायालय की अगली कार्यवाही से यह तय होगा कि आरोपियों को जमानत मिलेगी या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पेंशन और TA दावे बिना किसी आंतरिक ऑडिट के पकड़ में न आना यह सवाल उठाता है कि DFO कार्यालय की वित्तीय समीक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। ओडिशा सतर्कता विभाग की तकनीकी निगरानी से गिरफ्तारी प्रशंसनीय है, लेकिन असली जवाबदेही तब बनेगी जब यह जांच उन वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचे जिनकी देखरेख में यह घोटाला संभव हुआ।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा वन विभाग गबन मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
ढेंकनाल के DFO कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक सुजीत कुमार जेना, वन विभाग कर्मचारी सौम्य रंजन बेहरा और रश्मि रंजन स्वैन को 18 अक्टूबर 2026 को ओडिशा सतर्कता विभाग ने गिरफ्तार किया।
ओडिशा वन विभाग में कितने रुपये का गबन हुआ और कैसे?
कथित तौर पर ₹65.90 लाख से अधिक का गबन किया गया। जांच के अनुसार फर्जी वेतन, बकाया पेंशन, यात्रा भत्ते के दावों और आकस्मिक खर्चों के जरिए सरकारी धन निजी बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया।
यह धोखाधड़ी कितने समय तक चली और कैसे उजागर हुई?
आरोपों के अनुसार यह धोखाधड़ी 2016 से 2026 तक — करीब एक दशक — जारी रही। वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच के दौरान सतर्कता अधिकारियों ने इसका खुलासा किया और तकनीकी खुफिया जानकारी व मोबाइल लोकेशन से आरोपियों को पकड़ा।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ दर्ज की गई हैं?
कटक सतर्कता थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला संख्या 40/26 दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों का अगला कानूनी कदम क्या है?
तीनों आरोपियों को 18 अक्टूबर को ढेंकनाल स्थित सतर्कता मामलों के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया। आगे की सुनवाई में जमानत और अन्य कानूनी कार्यवाही तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले