25 अक्टूबर 2026
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ओडिशा विजिलेंस ने वन विभाग के क्लर्क को ₹2.60 करोड़ के गबन में गिरफ्तार किया

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ओडिशा विजिलेंस ने वन विभाग के क्लर्क को ₹2.60 करोड़ के गबन में गिरफ्तार किया

सारांश

ओडिशा विजिलेंस ने वन विभाग के वरिष्ठ सहायक बबलू सुना को ₹2.60 करोड़ से अधिक के कथित गबन में गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने मृत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी बिलों से धन परिजनों के खातों में भेजा। यह ढेंकानाल मामले के ठीक एक सप्ताह बाद आई दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है।

मुख्य बातें

ओडिशा विजिलेंस ने 25 अक्टूबर 2026 को वन विभाग के वरिष्ठ सहायक बबलू सुना को ₹2,60,21,306 के कथित गबन में गिरफ्तार किया।
आरोपी सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा में तैनात था और पिछले छह महीनों से फरार था।
फर्जी MACP/RACP एरियर बिलों के ज़रिये धन पत्नी, भाई, बहन व सहयोगियों के खातों में भेजा गया।
रिकॉर्ड में हेरफेर कर अतिरिक्त वेतन वृद्धि से ₹10.58 लाख से अधिक की अवैध निकासी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNS के तहत कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज।
18 अक्टूबर को ढेंकानाल में वन विभाग के एक अन्य क्लर्क को ₹65.90 लाख गबन में गिरफ्तार किया जा चुका है।

ओडिशा विजिलेंस ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को राज्य के वन विभाग के एक वरिष्ठ सहायक को ₹2.60 करोड़ से अधिक की सरकारी धनराशि के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया। आरोपी पिछले छह महीनों से फरार था और उसे बलांगीर में उसके ठिकाने से पकड़ा गया।

आरोपी की पहचान और तैनाती

गिरफ्तार अधिकारी की पहचान बबलू सुना के रूप में हुई है, जो सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा के मंडल वन अधिकारी (DFO) कार्यालय में स्थापना अनुभाग का प्रभारी वरिष्ठ सहायक था। जाँच के अनुसार, उसने 2023 से संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP) और राज्य संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (RACP) योजनाओं के तहत फर्जी बिल तैयार कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाया।

घोटाले का तरीका

विजिलेंस के अनुसार, बबलू सुना ने सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग के पूर्व, सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों की पहचान और बैंक साख का दुरुपयोग करते हुए फर्जी एरियर बिल संसाधित किए। विजिलेंस के आधिकारिक बयान के अनुसार, 'इन फर्जी बिलों के माध्यम से सार्वजनिक धन को उसके परिवार के सदस्यों — पत्नी, भाई, बहन और दो करीबी सहयोगियों — के निजी बैंक खातों में हस्तांतरित किया गया।'

इसके अलावा, जाँच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपने वैध अधिकार से अधिक वेतन वृद्धि हासिल की। लंबी अवधि तक अतिरिक्त मासिक वेतन बिल बनाकर ₹10.58 लाख से अधिक की अतिरिक्त निकासी की गई। कुल कथित गबन की राशि ₹2,60,21,306 आँकी गई है।

कानूनी कार्रवाई

आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। आरोपी के पिछले छह महीनों से फरार रहने के बाद शनिवार रात विजिलेंस की टीम ने बलांगीर में छापा मारकर उसे हिरासत में लिया।

ओडिशा में भ्रष्टाचार पर विजिलेंस की लगातार कार्रवाई

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा विजिलेंस वन विभाग में भ्रष्टाचार पर लगातार शिकंजा कस रही है। गौरतलब है कि महज एक सप्ताह पहले, 18 अक्टूबर को, विजिलेंस ने ढेंकानाल जिले में वन विभाग के एक अन्य वरिष्ठ सहायक और उसके दो सहयोगियों को 2016 से 2026 की अवधि में ₹65,90,773 की सरकारी राशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस प्रकार, एक ही विभाग में दो अलग-अलग मामलों में दस दिनों के भीतर कई गिरफ्तारियाँ यह संकेत देती हैं कि भर्ती और वेतन प्रबंधन प्रणाली में संरचनात्मक खामियाँ हो सकती हैं।

आगे की जाँच जारी है और विजिलेंस के अनुसार अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ऑडिट विफलता का प्रमाण है। विजिलेंस की कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि आंतरिक नियंत्रण तंत्र ने इसे पहले क्यों नहीं पकड़ा।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा वन विभाग घोटाले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
ओडिशा विजिलेंस ने सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा के DFO कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक बबलू सुना को गिरफ्तार किया है। उस पर ₹2,60,21,306 की सरकारी धनराशि के कथित गबन का आरोप है।
बबलू सुना ने कथित तौर पर गबन कैसे किया?
आरोप है कि उसने MACP और RACP योजनाओं के तहत पूर्व, सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों की पहचान का उपयोग कर फर्जी एरियर बिल बनाए और धन परिजनों के बैंक खातों में हस्तांतरित किया। इसके अलावा, आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर कर अतिरिक्त वेतन वृद्धि से भी ₹10.58 लाख से अधिक निकाले गए।
आरोपी के खिलाफ कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज किए गए हैं।
क्या ओडिशा के वन विभाग में यह पहला गबन मामला है?
नहीं, इससे महज एक सप्ताह पहले 18 अक्टूबर को ओडिशा विजिलेंस ने ढेंकानाल जिले में वन विभाग के एक अन्य वरिष्ठ क्लर्क और उसके दो सहयोगियों को 2016 से 2026 के बीच ₹65,90,773 के गबन में गिरफ्तार किया था। यह दर्शाता है कि विभाग में भ्रष्टाचार का यह पैटर्न व्यापक हो सकता है।
आरोपी को कहाँ से और कैसे गिरफ्तार किया गया?
बबलू सुना पिछले छह महीनों से फरार था। ओडिशा विजिलेंस ने शनिवार रात बलांगीर में उसके ठिकाने पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया।
राष्ट्र प्रेस
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