बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नो व्हीकल डे: पैदल और साइकिल से पहुंचे कर्मचारी, कुलपति ने की अपील

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नो व्हीकल डे: पैदल और साइकिल से पहुंचे कर्मचारी, कुलपति ने की अपील

सारांश

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नो व्हीकल डे पर कर्मचारी पैदल और साइकिल से पहुँचे। कुलपति ने स्वास्थ्य, पर्यावरण और ईंधन बचत का हवाला देते हुए इसे दैनिक आदत बनाने की अपील की।

मुख्य बातें

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 16 मई, शनिवार को नो व्हीकल डे का आयोजन किया गया।
सभी कर्मचारियों को पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचने का पूर्व-आदेश जारी था।
कुलपति ने साइकिल को स्वास्थ्य, पर्यावरण और ईंधन बचत तीनों दृष्टिकोणों से लाभकारी बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के आह्वान के अनुरूप यह पहल आयोजित की गई।
कुलपति ने सभी से नियमित जीवन में भी साइकिल चलाने की आदत अपनाने की अपील की।

बिहार के कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार, 16 मई को नो व्हीकल डे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी कर्मचारियों और अधिकारियों ने बिना वाहन के पैदल अथवा साइकिल से अपने कार्यालय पहुँचकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पहले से जारी आदेश के अनुपालन में यह पहल उत्साहपूर्वक संपन्न हुई।

मुख्य घटनाक्रम

विश्वविद्यालय प्रशासन ने नो व्हीकल डे के संबंध में पूर्व में ही अधिसूचना जारी कर दी थी, जिसमें समस्त कर्मियों को पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचने का निर्देश दिया गया था। आयोजन के दिन परिसर में एक अलग उत्साह का माहौल देखा गया और लोग पूरी गंभीरता के साथ इस निर्देश का पालन करते नज़र आए।

कुलपति की अपील

विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस अवसर पर कहा कि साइकिल चलाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा, 'सभी लोगों के लिए यह ज़रूरी हो जाता है कि वे पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचें — इससे उनका स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा और पर्यावरण को भी फायदा पहुँचेगा।'

कुलपति ने ईंधन खपत के दृष्टिकोण से भी इस पहल की उपयोगिता रेखांकित की। उनके अनुसार, मौजूदा दौर में ईंधन की खपत लगातार बढ़ रही है और यदि छोटी दूरियों के लिए वाहनों पर निर्भरता कम की जाए, तो स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों को व्यापक लाभ मिल सकता है।

राष्ट्रीय नेतृत्व का संदर्भ

कुलपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के आह्वान पर इस आयोजन को विश्वविद्यालय परिसर में विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

कुलपति ने सभी से अपील की कि वे नियमित जीवन में भी साइकिल चलाने की आदत अपनाएँ। यह पहल केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि एक दीर्घकालिक जीवनशैली परिवर्तन का हिस्सा बने। गौरतलब है कि देश के विभिन्न शैक्षणिक और सरकारी संस्थानों में इस तरह के 'नो व्हीकल डे' आयोजन पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत आयोजित किए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह एकल-दिवसीय प्रतीकात्मकता से आगे बढ़ पाता है। देश के कई संस्थानों में इस तरह के 'ग्रीन डे' आयोजन होते हैं, पर अनुवर्ती नीति और बुनियादी ढाँचे — जैसे साइकिल पार्किंग, सुरक्षित साइकिल लेन — के अभाव में ये अभियान अक्सर कागज़ी रह जाते हैं। कुलपति की अपील सराहनीय है, किंतु संस्थागत बदलाव के लिए नियमित अनुपालन तंत्र और कर्मचारी प्रोत्साहन ज़रूरी हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में नो व्हीकल डे क्या है?
यह एक पर्यावरण जागरूकता पहल है जिसमें विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को वाहन छोड़कर पैदल या साइकिल से कार्यालय पहुँचने का निर्देश दिया जाता है। 16 मई को इसे विश्वविद्यालय परिसर में उत्साहपूर्वक मनाया गया।
नो व्हीकल डे का उद्देश्य क्या है?
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ईंधन खपत घटाना, पर्यावरण प्रदूषण कम करना और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। कुलपति के अनुसार, छोटी दूरियों के लिए वाहनों पर निर्भरता कम करने से दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।
क्या यह पहल नियमित रूप से जारी रहेगी?
कुलपति ने सभी से अपील की है कि वे नियमित जीवन में भी साइकिल चलाने की आदत अपनाएँ, जो दर्शाता है कि विश्वविद्यालय इसे एकमुश्त आयोजन नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक जीवनशैली अभियान के रूप में देखता है।
इस आयोजन को किसके आह्वान पर आयोजित किया गया?
कुलपति ने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के आह्वान के अनुरूप किया गया, ताकि समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
नो व्हीकल डे से किसे फायदा होता है?
इस पहल से कर्मचारियों के शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन घटता है और ईंधन की बचत होती है। व्यापक स्तर पर अपनाए जाने पर यह शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने में भी सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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